पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने की तैयारी: पूर्व SC जज की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय कमेटी गठित, जल्द आएगा बिल
West Bengal UCC: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' (UCC) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इसके लिए 9 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। राज्य सरकार की योजना आगामी अगस्त महीने में होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान इस कानून को सदन में पेश करने की है। हालांकि, इस ड्राफ्ट में स्वदेशी समुदायों (indigenous communities) को विशेष छूट दी गई है।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)?
UCC का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति या समुदाय से ऊपर उठकर सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून बनाना है। यदि यह कानून लागू होता है, तो विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया और भरण-पोषण (अलिमोनी) जैसे निजी मामले एक समान कानूनी ढांचे के अधीन आ जाएंगे। इसका उद्देश्य नागरिकों के साथ नागरिक मामलों में समान व्यवहार सुनिश्चित करना है।
चौथा BJP शासित राज्य बनने की राह पर बंगाल
यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह विधेयक पारित हो जाता है, तो यह स्वतंत्र भारत में UCC की दिशा में कदम उठाने वाला चौथा भाजपा शासित राज्य बन जाएगा। इससे पहले फरवरी 2024 में उत्तराखंड ने UCC कानून लागू किया था। इसके बाद गुजरात और असम ने भी इसी दिशा में विधायी पहल की है। यह भाजपा के उस वादे का हिस्सा है जिसके तहत पूरे देश में UCC लागू करने की बात कही गई थी।
अमित शाह ने किया था ऐलान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान UCC भाजपा के प्रमुख चुनावी वादों में से एक था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने चुनावी घोषणापत्र को जारी करते हुए वादा किया था कि सत्ता में आने के छह महीने के भीतर राज्य में UCC पेश किया जाएगा। अगस्त सत्र में बिल को लाना इसी प्रमुख चुनावी प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विधानसभा में हंगामा के आसार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रस्तावित विधेयक को लेकर विधानसभा के अंदर और बाहर काफी तीखी बहस हो सकती है। जहां इसके समर्थक इसे कानूनी समानता और एकरूपता की दिशा में एक बड़ा कदम मानते हैं, वहीं आलोचकों का तर्क है कि इससे राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता पर प्रभाव पड़ सकता है।
'पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026'
UCC के अलावा, पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में 'पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026' भी पेश किया था, जिसे जून में विधानसभा द्वारा पारित कर दिया गया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य राज्य में हिंसा और असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। सरकार के अधिकारियों का कहना है कि यह कानून दंगा भड़काने वाले और अपराधी तत्वों को कड़ा दंड दिलाने में मददगार साबित होगा। इस बिल का लक्ष्य राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और अपराधियों में कानून का डर पैदा करना है।
INS Mahendragiri: 75 फीसदी स्वदेशी उपकरणों से बने INS महेंद्रगिरि नौसेना को समर्पित, हवा और समंदर के खतरों को करेगी ध्वस्त
भारत की समुद्री सीमा की सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक पकड़ को और अधिक मजबूत करने की दिशा में रक्षा क्षेत्र ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में शनिवार को आयोजित एक भव्य समारोह में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को समर्पित कर दिया।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पोत का जलावतरण करते हुए कहा कि यह नया युद्धपोत पूरी तरह से अभेद्य है और यह रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का एक सबसे बेहतरीन और जीता-जागता सबूत है, क्योंकि इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई 75 प्रतिशत से अधिक सामग्री और तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है।
तीन तरफा खतरों से एक साथ निपटने में सक्षम है महेंद्रगिरि, ब्रह्मोस मिसाइल और बराक-8 सिस्टम से होगा लैस
आईएनएस महेंद्रगिरि की मारक क्षमता और तकनीकी खूबियों की बात करें तो यह समंदर के भीतर एक तैरता हुआ शक्तिशाली किला है। रक्षा मंत्री ने बताया कि यह युद्धपोत हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे से एक साथ आने वाले किसी भी दुश्मन के बड़े खतरों से अकेले निपटने की पूरी क्षमता रखता है। इस पोत को दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' से लैस करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
इसके अतिरिक्त, दुश्मन के हवाई हमलों को नाकाम करने के लिए इसमें बराक-8 एडवांस एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, 76 एमएम की हैवी नौसैनिक तोप, टॉरपीडो लॉन्च पैड और एंटी-सबमरीन रॉकेट लगाए गए हैं। दुश्मन के रडार को चकमा देने के लिए इसमें खास स्टील्थ तकनीक और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर रडार सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।
प्रोजेक्ट 17ए का छठा शक्तिशाली स्टील्थ फ्रिगेट है महेंद्रगिरि, मुंबई के मझगांव डॉक ने किया है तैयार
इस युद्धपोत का नामकरण पूर्वी घाट की खूबसूरत पर्वत श्रृंखला के नाम पर 'आईएनएस महेंद्रगिरि' रखा गया है, जिसे भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने पूरी तरह डिजाइन किया है और इसका भौतिक निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा संपन्न किया गया है। नौसेना के विशेष 'प्रोजेक्ट 17ए' के तहत कुल सात स्टील्थ गाइडेड मिसाइल युद्धपोत बनाए जा रहे हैं, जिनमें से चार मुंबई में और तीन कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स में तैयार हो रहे हैं।
इस श्रृंखला में अब तक आईएनएस नीलगिरि, उदयगिरि, हिमगिरि, तारागिरि और दुनागिरि पहले ही नौसेना के बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं, और महेंद्रगिरि के शामिल होने के बाद अब इस प्रोजेक्ट का केवल एक आखिरी युद्धपोत आना बाकी रह गया है। 6,670 टन वजनी और 149 मीटर लंबे इस पोत की रफ्तार 28 नॉटिकल प्रतिघंटा है, जिस पर एक साथ 230 के करीब नौसैनिक अधिकारी तैनात रह सकते हैं और इस पर एमएच-60आर जैसे आधुनिक नौसैनिक हेलीकॉप्टर भी आसानी से लैंड कर सकते हैं।
नौसेना देश के आर्थिक हितों की भी रक्षक; ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत सुरक्षित बचाए 9,000 करोड़ के जहाज
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति और भारत के आर्थिक हितों पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार केवल समुद्री मार्गों के जरिए ही संचालित होता है, इसलिए समुद्री सीमाओं की सुरक्षा देश के आर्थिक विकास की रीढ़ है।
पश्चिम एशिया में जारी गंभीर सैन्य संघर्षों का जिक्र करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि भारतीय नौसेना ने 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' के तहत अपनी त्वरित और साहसिक प्रतिक्रिया दिखाते हुए अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में करीब 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के जरूरी सामान और कच्चे तेल को लेकर जा रहे व्यापारिक जहाजों को समुद्री लुटेरों व मिसाइल हमलों से बचाकर सुरक्षित रास्ता प्रदान किया है। इससे साफ होता है कि हमारी नौसेना न केवल सैन्य मोर्चे पर, बल्कि देश के आर्थिक हितों की रक्षा में भी एक मजबूत वैश्विक रक्षक बनकर उभरी है।
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