भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं कुलदीप मैती, सेवा का लिया संकल्प
पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल तेज हो चुकी है. टीएमसी में फूट मची है. कई विधायक ममता बनर्जी के साथ छोड़कर जा चुके हैं. कई राज्यसभा और लोकसभा सांसद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भतीजे अभिषेक बनर्जी से नाराज चल रहे हैं. इस बीच बीजेपी सरकार ने उद्योगपतियों के लिए दरवाजे खोल रही हैं. VFS Capital के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुलदीप मैती ने अपनी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत से पहले माँ विन्ध्यवासिनी धाम, विन्ध्याचल में दर्शन-पूजन किया. उन्होंने प्रदेश की सुख-शांति और जनसेवा के लिए माँ से आशीर्वाद मांगा.
दर्शन के बाद मैती ने कहा, "सेवा ही संकल्प है. मां के आशीर्वाद से अब मैं कोलकाता और पश्चिम बंगाल के विकास में प्रत्यक्ष भूमिका निभाना चाहता हूं." सूत्रों के अनुसार वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम कर राज्यसभा जा सकते हैं. सदस्यता ग्रहण समारोह किसी वरिष्ठ नेता, संभवतः बीजेपी अध्यक्ष या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हो सकता है.
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का जाना-माना नाम
सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कुलदीप मैती को पूर्वी भारत के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का जाना-माना नाम माना जाता है. पिछले दो दशकों से वे महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के वित्तीय सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे हैं. मंदिर में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे. आशीर्वाद लेकर लौटने पर दर्शकों में उत्साह देखा गया.
आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई
टीएमसी से मोहभंग के बाद भाजपा में नए चेहरों के जुड़ने की चर्चा के बीच मैती का नाम भी तेजी से सामने आ रहा है. मैती बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल सेक्टर में दो मास्टर डिग्री के साथ डॉक्टरेट भी हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा रोजगार को लेकर वे जल्द अपनी कार्ययोजना की घोषणा करेंगे. भाजपा और मैती की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
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EXPLAINER: क्यों नहीं ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर टिक पाया? जानें वजह
ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर जंग ने भीषण रूप ले लिया है. इस बार अमेरिका ने करीब 140 ईरानी ठिकानों को टारगेट किया है. ईरान के अहम ठिकानों पर हमले के बाद तेहरान भी पलटवार कर रहा है. इससे पहले शांति वार्ता करके दोनों देशों ने सीजफायर के प्रयास किए थे मगर एक बार फिर हालात बिगड़ गए हैं. आपको बता दें कि इस साल फरवरी में अमेरिका—इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत हुई थी. इससे पहले भी वार्ता जारी थी कि अचानक ईरान पर हमला हुआ. इस हमले में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयोतल्ला खामेनेई और उनके साथ परिवार के कई सदस्य मारे गए. इस हमले के बाद युद्ध भड़क उठा और ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर दिया. इन हमलों में एक ऐसा वक्त भी जब अमेरिका का सुरक्षा कवच बेबस नजर आया. ईरान के मिसाइल और ड्रोन भारी तबाही मचा रहे थे.
वहीं यूएस के सैन्य बेस और इजरायल के अहम ठिकानों पर हमले हो रहे थे. होर्मुज स्ट्रेट में भी तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था. यहां पर जहाजों की आवाजाही को लेकर कई देशों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था. एक ओर ईरान कह रहा था कि कोई भी जहाज उसकी मर्जी के बगैर नहीं हिल पाएगा. वहीं अमेरिका का कहना था कि इस क्षेत्र में ईरान की मनमानी नहीं चलेगी. इसका असर पूरे विश्व में देखने को मिला. तेल के दाम अचानक आसमान छूने लगे. कई देशों में तेज की किल्लत भी देखने को मिली. इसका सबसे अधिक असर यूरोपीय देशों में दिखा. जहां पर तेल के दाम बढ़ने लगे. यहां पर ओमान से होनी आपूर्ति बाधित हो रही थी. बाद में अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद से शांति वार्ता की शुरुआत की. इस वार्ता में भी कई बार पेंच फंसे. मगर अंत में तय हुआ की सीजफायर को अमलीजामा पहनाया जाए.



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