West Bengal के बीरभूम स्थित होटल में लगी भीषण आग, 8 लोगों की मौत के बाद 1 व्यक्ति हिरासत में
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सोमवार तड़के एक होटल में आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने होटल में उचित अग्निशमन व्यवस्था न होने के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के समय होटल में 43 लोग मौजूद थे, जिनमें से एक अस्पताल में भर्ती है, जबकि 34 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
किंवदंती के अनुसार, 13वीं सदी का तारापीठ मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां देवी तारा की पूजा की जाती है। मंदिर नगरी तारापीठ में चार मंजिला होटल के भूतल पर तड़के करीब 4:30 बजे आग लगी जब समय ज्यादातर मेहमान सो रहे थे। इनमें कई श्रद्धालु थे, जो सावन महीने के आखिरी सोमवार को पूजा करने आए थे।
अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के बाद घना धुआं पूरे भवन में फैलने के कारण कई मेहमान ऊपरी मंजिलों पर फंस गए, इसके बाद दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर भेजकर आग पर काबू पाया गया। उन्होंने कहा कि घायलों को रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोग झुलस गए, जबकि कुछ लोग दम घुटने के कारण बीमार हो गए।
होटल के अधिकारियों ने दावा किया कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था के एक उपकरण में चिंगारी भड़कने के बाद होटल के ‘रिसेप्शन’ के पास आग शुरू हुई। हालांकि आग लगने का सही कारण अभी पता नहीं चल पाया है।
अधिकारियों ने बताया कि होटल के अंदर सजावट और फाइबर की सामग्री के कारण आग तेजी से फैल गई और धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया, जिसके कारण कई मेहमान अपने कमरों में फंस गए। अधिकारियों ने बताया कि होटल में आग बुझाने वाले उपकरणों के रखरखाव में कथित लापरवाही के संबंध में पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। इस घटना और आगामी कौशिकी अमावस्या पर्व के दौरान भारी भीड़ जुटने के मद्देनजर बीरभूम जिला प्रशासन ने तारापीठ के होटलों, लॉज और अन्य प्रतिष्ठानों में बिजली व्यवस्था और अग्निशमन व्यवस्था की विशेष जांच कराने की घोषणा की है।
प्रशासन ने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी होटल, लॉज, गेस्ट हाउस, होमस्टे एवं अन्य प्रतिष्ठानों में पर्याप्त और सुरक्षित बिजली व्यवस्था तथा आग से बचाव एवं आग बुझाने की प्रभावी व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हादसे में लोगों की मौत होने पर दुख जताया और कहा कि मेहमान सावन के आखिरी सोमवार को मंदिर में पूजा करने के लिए तारापीठ आए थे। अधिकारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बीरभूम जिले के तारापीठ में होटल में आग लगने से जान गंवाने वाले तीर्थयात्रियों से जुड़ी इस घटना से मैं बहुत दुखी हूं।” उन्होंने कहा कि अपने प्रियजन को खोने वाले परिवारों के दुख को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में लोगों को बचाया, लेकिन “सभी प्रयासों के बावजूद आठ लोगों की दुखद मौत को नहीं टाला जा सका।” अधिकारी ने कहा कि पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी, स्थानीय विधायक ध्रुव साहा और अग्निशमन विभाग के राज्य मंत्री कौशिक चौधरी मौके पर रहे और बचाव कार्य की निगरानी की। उन्होंने कहा कि वे प्रभावित और मृतकों के परिवारों को सभी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए मेघालय सरकार और अलीपुरद्वार के स्थानीय प्रशासन के साथ भी समन्वय कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा, “राज्य सरकार ने इस घटना के मूल कारण का पता लगाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।” उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि “जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार उन्हें सख्त सजा दी जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ितों के लिए उचित मुआवजे की घोषणा उचित समय पर की जाएगी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने घटना पर दुख जताया।
उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “मैं तारापीठ में अचानक आग लगने की घटना से बेहद स्तब्ध हूं। मैं इस भयानक हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति और अपने प्रियजनों को खो चुके लोगों को इस दुख से उबरने की शक्ति देने की कामना करती हूं। मैं इलाज करा रहे लोगों के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की भी प्रार्थना करती हूं।” हादसे में बाल-बाल बची कोलकाता की एक महिला ने होटल के अंदर मची अफरा-तफरी को याद किया।
उसने कहा, “अचानक पूरा होटल धुएं से भर गया। हम सांस नहीं ले पा रहे थे और बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना मुश्किल था।” एक अन्य मेहमान तपनज्योति मंडल ने बताया कि वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ करीब 45 मिनट तक अपने कमरे में फंसे रहे। मंडल ने कहा, “आग के कारण हम दरवाजे से बाहर नहीं निकल सके।
कमरे में कोई खिड़की नहीं थी, इसलिए वे बाथरूम की छत के पास बने एक रास्ते से बाहर निकले।” घटना में मंडल की मां बेहोश हो गईं, जबकि उनकी बहन घायल हो गईं।
Supreme Court ने Election Commission से कहा: 1 साल में पूरी हो काले धन की जांच
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि चुनावी प्रक्रिया में काला धन लोकतंत्र, कानून के शासन और खुद चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाता है। शीर्ष अदालत ने इसी के साथ देश में चुनावों के दौरान काले धन की बरामदगी से जुड़े आपराधिक मामलों की समय पर जांच और उनका यथाशीघ्र निस्तारण की जरूरत को रेखांकित किया। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा, ‘‘कोई भी बाहरी कारक जो चुनाव की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, उसमें लोकतंत्र के मूल स्वरूप को ही खतरे में डालने की क्षमता होती है।’’ पीठ ने कहा कि अगर काला धन शामिल हो, तो व्यक्ति का चुनाव स्वतंत्र नहीं होता; बल्कि यह पैसे या किसी और तरह के लाभ, या कभी सच्चे तो कभी गुमराह करने वाले वादों से प्रभावित होता है।
न्यायालय ने कहा,‘‘चुनाव प्रक्रिया में काला धन यानी वह मुद्दा जिस पर हम यहां बात कर रहे हैं, एक ऐसा पहलू है जो लोकतंत्र, कानून के शासन और खुद चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करता है।’’ उच्चतम न्यायालय ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे अहम प्रक्रिया को दूषित करने वाले काले धन का चलन कोई नयी बात नहीं है और इसे बार-बार पहचाना गया है। पीठ ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान नकदी और संपत्ति जब्त किए जाने के मामलों का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘ज़ब्ती करने वाले अधिकारी को 24 घंटे के भीतर जिला मजिस्ट्रेट/अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट/अधिकार-क्षेत्र वाली अदालत को इसकी रिपोर्ट देनी होगी। साथ ही, जब्त की गयी नकदी या अन्य संपत्ति और संदिग्ध चुनावी अपराध के बीच प्रथम दृष्टया संबंध बताते हुए लिखित कारण भी देने होंगे।’’ पीठ की ओर से लिखे फैसले में न्यायमूर्ति करोल ने कहा कि जब प्राथमिकी दर्ज की जाती है, तो जांच अधिकारी की कोशिश इस प्रक्रिया को एक साल के भीतर पूरी करने की होनी चाहिए।
न्यायालय ने निर्देश दिया, ‘‘अगर इस समय-सीमा से ज़्यादा समय लगता है, तो इसके कारणों को दर्ज किया जाएगा और भारत के निर्वाचन आयोग को सूचित किया जाएगा।’’ न्यायालय ने यह आदेश कर्नाटक सरकार की उस याचिका पर दिया जो 2014 के लोकसभा चुनावों से जुड़ी थी, जब बेल्लारी जिले में चुनाव के दौरान भारी मात्रा में काला धन जब्त किया गया था। निर्वाचन आयोग और राज्य सरकारों से 18 नवंबर तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए पीठ ने कहा कि जांच अधिकारी को संबंधित जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त की मंज़ूरी के बाद, नोडल अधिकारी के ज़रिए जांच के बारे में तिमाही वस्तु स्थिति रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को सौंपनी होगी। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि जब अचल निगरानी टीम (एसएसटी) जांच के दौरान 10 लाख रुपये से अधिक की नकदी जब्त करती है तो इसकी जानकारी आयकर अधिकारियों को दी जानी चाहिए।
पीठ ने लोकतंत्र में चुनावों की अहमियत का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग खुद चुनाव लड़ रहे हैं, वे ही चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार नहीं हो सकते। न्यायालय ने कहा, ‘‘ अगर ऐसा होता है, तो चुनाव का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।’’ पीठ ने साथ ही निर्देश दिया कि बार-बार चुनाव होने की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, उम्मीदवारों और मौजूदा सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। पीठ ने मुकदमों की सुनवाई जल्द पूरा करने के लिए उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया कि वे तय प्रक्रियाओं का पालन करें और ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारे के लिए विशेष अदालतें तय करें।
न्यायालय द्वारा पूर्व में दिये गए निर्णयों का संदर्भ देते हुए पीठ ने कहा, ‘‘किसी खास चुनाव चक्र में उम्मीदवारों के खिलाफ मामले वापस लेने के लिए संबंधित उच्च न्यायालय की मंजूरी आवश्यक है।’’ पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग के हलफनामे में 2019-25 के बीच हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े लंबित मामलों की जानकारी दी गई है, जिससे ज्ञात होता है कि लंबित मामलों का प्रतिशत काफी अधिक है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संबंधित अदालतों को मामलों को यथाशीघ्र तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
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