CAG के संजय मूर्ति बोले, Kolkata सम्मेलन में जन अपेक्षाओं से SAIs की जिम्मेदारी बढ़ी
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) के संजय मूर्ति ने सोमवार को कहा कि सरकारें तेजी से जटिल होते माहौल में काम कर रही हैं और नागरिक अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहे हैं, ऐसे में सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थानों (एसएआई) की भूमिका भी बढ़ गई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) यहां शुरू हुए अनुवर्ती लेखापरीक्षा पर इनटोसाई कार्य समूह के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वर्ष 2025 में पेनांग (मलेशिया) में हुई पहली बैठक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए इस दूसरी बैठक में 2026 की कार्य योजना की समीक्षा करने और मौद्रिक तथा पर्यावरणीय परिणामों से लेकर डिजिटल तथा भ्रष्टाचार विरोधी परिणामों तक वास्तविक ऑडिट प्रभाव को मापने पर चर्चा हो रही है।
मूर्ति ने कहा कि आज सरकारें डिजिटल परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम मेधा (एआई) और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति से आकार लेने वाले एक तेजी से जटिल होते माहौल में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि साथ ही, नागरिक अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक सेवाओं के प्रभावी वितरण की अपेक्षा करते हैं। कैग ने कहा, ‘‘इस बदलते परिदृश्य में, सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थानों (एसएआई) की भूमिका का भी विस्तार हुआ है।
जहां अनुपालन और वित्तीय जवाबदेही बुनियादी बात बनी हुई है, वहीं विधायिका और नागरिक तेजी से इस बात का भरोसा चाहते हैं कि सार्वजनिक व्यय इच्छित परिणाम दे और ऑडिट सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
ICRA ने जताया अनुमान: पहली तिमाही में भारत की GDP growth घटकर 7 प्रतिशत रहेगी
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने सोमवार को चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो चार तिमाहियों का निचला स्तर होगा। जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही थी। इक्रा रेटिंग्स ने जून तिमाही में औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि 7.7 प्रतिशत, कृषि क्षेत्र की चार प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 की समूची अवधि के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.7 प्रतिशत थी। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों के विभिन्न आंकड़ों से जून तिमाही में घरेलू गतिविधियों की अच्छी तस्वीर सामने आई है। इससे पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण तिमाही के दौरान जिंस कीमतों में वृद्धि के प्रभाव को लेकर जताई गई चिंताएं कम हुई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में घटकर सात प्रतिशत रह जाएगी, जो वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत थी। यह तिमाही के लिए मौद्रिक नीति समिति के वृद्धि अनुमान के अनुरूप है।’’ इक्रा ने कहा कि जून तिमाही में सेवा क्षेत्र की कंपनियों की कारोबारी धारणा में उल्लेखनीय कमजोरी आई। पश्चिम एशिया संकट और लगातार बढ़ती मजदूरी लागत के दबाव के बीच आशावाद की गति पांच साल के निचले स्तर पर आ गई।
नायर ने कहा कि 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 80-85 डॉलर प्रति बैरल रहने की धारणा के आधार पर समूचे वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और मानसून से जुड़ी अनिश्चितता के कारण वृद्धि के जोखिम नकारात्मक बने हुए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच 2026-27 में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी की वृद्धि चार साल के उच्च स्तर 13 प्रतिशत पर पहुंच सकती है, जबकि 2025-26 में यह 8.9 प्रतिशत रही थी।
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