दतिया उपचुनाव 2026: नामांकन से पहले मां पीतांबरा के दरबार पहुंचे घनश्याम सिंह, दिग्विजय सिंह ने भी टेका माथा
दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। नामांकन दाखिल करने से पहले कांग्रेस प्रत्याशी कुंअर घनश्याम सिंह ने दतिया स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पीतांबरा मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने मां पीतांबरा के चरणों में मत्था टेककर चुनाव में सफलता और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। इस दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ मौजूद रहे।
मंदिर में दर्शन के बाद कांग्रेस प्रत्याशी ने मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया कि उन्हें दतिया की जनता का पूरा समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों का विश्वास कांग्रेस के साथ है और उन्हें भरोसा है कि उपचुनाव में पार्टी को बड़ी जीत मिलेगी। उनके अनुसार चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और विकास से जुड़े मुद्दों का है। कांग्रेस ने भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा का मुकाबला मानते हुए पूरी ताकत झोंक दी है।
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत
नामांकन से पहले मां पीतांबरा मंदिर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि पार्टी इस उपचुनाव को बेहद गंभीरता से लड़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह ने भी मंदिर में विशेष पूजा की और कांग्रेस प्रत्याशी की जीत की कामना की। नेताओं ने धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए मां पीतांबरा का आशीर्वाद लिया और इसके बाद चुनावी रणनीति पर भी चर्चा की।
मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया सीट का अपना अलग महत्व माना जाता है। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों इस सीट पर पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं। चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों, रोजगार, सड़क, बिजली और किसानों से जुड़े सवाल प्रमुख रहने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बड़े नेताओं की सक्रिय मौजूदगी से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और चुनावी माहौल भी तेजी से बदलता है। कांग्रेस इसी रणनीति के तहत अपने शीर्ष नेताओं को लगातार दतिया भेज रही है।
मां पीतांबरा मंदिर से चुनावी शुरुआत का राजनीतिक संदेश
मध्य प्रदेश में चुनावी मौसम के दौरान नेताओं का धार्मिक स्थलों पर जाकर आशीर्वाद लेना नई बात नहीं है। दतिया का मां पीतांबरा मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है और यहां कई बड़े नेता चुनाव या महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों से पहले दर्शन करने पहुंचते रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से भी नामांकन से पहले मंदिर पहुंचना चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
अब सभी की नजर नामांकन प्रक्रिया और आगामी चुनाव प्रचार पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख दलों के बड़े नेताओं की चुनावी सभाएं, जनसंपर्क अभियान और रोड शो देखने को मिल सकते हैं।
कांग्रेस जहां जनता के समर्थन का दावा कर रही है, वहीं भाजपा भी इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी में जुटी है। दतिया उपचुनाव का परिणाम न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि प्रदेश की राजनीतिक दिशा के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। ऐसे में हर राजनीतिक गतिविधि पर जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।
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