IND-W vs ENG-W only test: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स में ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो उनसे पहले कोई महिला क्रिकेटर नहीं कर सकी थी। यास्तिका ने इंग्लैंड के खिलाफ इकलौते टेस्ट में 113 रन की पारी खेली। वो लॉर्ड्स में शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बन गईं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ उनका नाम 'होम ऑफ क्रिकेट' के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हो गया।
तीसरे दिन 39 रन के निजी स्कोर से आगे खेलने उतरी यास्तिका ने बेहद धैर्य और शानदार तकनीक का प्रदर्शन किया। उन्होंने 145 गेंदों में अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया। एक्स्ट्रा कवर के ऊपर खेले गए शानदार चौके के साथ उन्होंने तीन अंकों का आंकड़ा छुआ और भावुक अंदाज में जश्न मनाया। उनकी 113 रन की पारी में 14 चौके शामिल रहे। इंग्लैंड की स्टार स्पिनर सोफी एक्लेस्टोन की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में वह एक्स्ट्रा कवर पर कैच आउट हो गईं।
Lord's rises to applaud a special performance ????????
Yastika Bhatia walks back after a historic 1️⃣1️⃣3️⃣(158) ????
यास्तिका लॉर्ड्स में टेस्ट शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर यास्तिका जब पवेलियन लौटीं तो लॉर्ड्स में मौजूद दर्शकों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के सदस्यों और इंग्लैंड की खिलाड़ियों ने भी तालियां बजाकर उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि का सम्मान किया।
यास्तिका दिग्गजों के एलीट क्लब में शामिल इस शतक के साथ यास्तिका भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गईं, जिन्होंने लॉर्ड्स में टेस्ट शतक लगाया। इस सूची में वीनू मांकड़, दिलीप वेंगसरकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, केएल राहुल और अजिंक्य रहाणे जैसे दिग्गज शामिल हैं।
यह शतक यास्तिका के लिए इसलिए भी खास रहा, क्योंकि इसी साल उन्होंने घुटने की सर्जरी से उबरकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की थी। इंग्लैंड दौरे के पहले टी20 मुकाबले में उन्होंने अर्धशतक लगाया था और अब टेस्ट में करियर की सबसे बड़ी पारी खेलकर अपनी वापसी को यादगार बना दिया।
मंधाना ने भी अर्धशतक जमाया भारत की दूसरी पारी में स्मृति मंधाना ने भी शानदार 70 रन बनाए, जबकि ऋचा घोष ने नाबाद अर्धशतक जड़ा। इन पारियों की बदौलत भारत ने अपनी दूसरी पारी 341/7 पर घोषित कर इंग्लैंड के सामने 457 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा।
भारत ऐतिहासिक टेस्ट जीत के करीब इससे पहले मैच की पहली पारी में तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने 5 विकेट लेकर लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर जगह बनाई थी। वहीं इंग्लैंड की स्पिनर सोफी एक्लेस्टोन ने भारत की दूसरी पारी में 5/118 के आंकड़े के साथ मैच में कुल आठ विकेट लेकर अपना नाम भी ऑनर्स बोर्ड में दर्ज कराया।
तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड की टीम 130/6 के स्कोर पर संघर्ष कर रही थी। उसे जीत के लिए अभी 327 रन और बनाने हैं, जबकि उसके सिर्फ चार विकेट शेष हैं। ऐसे में भारतीय महिला टीम लॉर्ड्स में ऐतिहासिक टेस्ट जीत दर्ज करने के बेहद करीब पहुंच गई है।
प्रतिष्ठित लॉर्ड्स स्टेडियम में टेस्ट शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनी भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया का मानना है कि उनका ‘‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना अभी बाकी है।’’
भाटिया ने इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में 158 गेंद पर 113 रन बनाए, जिसके बाद भारत ने तीसरे दिन चायकाल के ठीक पहले अपनी दूसरी पारी घोषित कर दी और मेजबान इंग्लैंड के सामने 457 रन का विशाल लक्ष्य रखा।
भाटिया ने तीसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘यह (लॉर्ड्स में शतक बनाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनना) अविश्वसनीय है क्योंकि छह महीने पहले मैं पूरी तरह से विपरीत स्थिति में थी और अगर तब किसी ने कहा होता कि मेरा नाम लॉर्ड्स के सम्मान बोर्ड में होगा तो मैं इस पर विश्वास नहीं करती।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अभी तो इससे बेहतर प्रदर्शन करना बाकी है।
मैं शुरू से यही मानती रही हूं कि मैं पहले से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हूं। लेकिन अब तक का समय वाकई बहुत अच्छा रहा है। यह तो बस शुरुआत है। अभी बहुत कुछ आना बाकी है और मैं उसका बेसब्री से इंतजार कर रही हूं।’’
उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार, टीम के साथियों और सहयोगी स्टाफ के सदस्यों को दिया, जिन्होंने पिछले साल अक्टूबर में उनके बाएं घुटने में लगी गंभीर चोट से उबरने में उनकी मदद की। इस चोट के लिए उन्हें सर्जरी करवानी पड़ी थी और वह स्वदेश में खेले गए वनडे विश्व कप में नहीं खेल पाई थी जिसमें भारत विजेता रहा था।
भाटिया ने कहा, ‘‘पर्दे के पीछे बहुत से लोग काम कर रहे हैं, मेरा परिवार, मेरे पिता, मां, मेरी बहन, वे मेरे लिए सबसे बड़ा सहारा रहे हैं। मेरे कोच, यहां टीम के सहयोगी स्टाफ के सदस्य और टीम के मेरे साथियों, सभी ने मेरा साथ दिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा सीओई (बीसीसीआई का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) भी, जहां मैंने चोट से उबरने की प्रक्रिया के दौरान काफी समय बिताया।इन सभी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके बिना यह संभव नहीं होता।’’
भाटिया ने कहा कि जब वह चोट के कारण बाहर थी तब खेल के प्रति उनके जुनून ने उन्हें सकारात्मक मानसिकता बनाए रखने में मदद की।
उन्होंने कहा, ‘‘सर्जरी के बाद मुझे बिल्कुल नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। दो महीने तक मुझे पूरी तरह से आराम करना पड़ा। लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था कि मैं इस चोट से उबरकर वापसी कर सकती हूं।
चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, लेकिन खेल के प्रति प्यार और खुद पर विश्वास रखना बेहद जरूरी है।’’
भाटिया ने अपने शतक के बारे में कहा, ‘‘मैंने शतक बनाने के बारे में नहीं सोचा, बल्कि अच्छी गति से बड़ा स्कोर बनाने पर ध्यान दिया ताकि हमें उनके 10 विकेट लेने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यही मेरे दिमाग में था। देश के लिए खेलना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।