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Roti Benefits: हर रोटी में छिपा है अलग फायदा, जानें गेहूं से बेसन तक किसके लिए कौन सी रोटी बेहतर

Best Roti For Health: रोटी भारतीय थाली का सबसे जरूरी हिस्सा है। दाल हो या सब्जी, रोटी के बिना खाना अधूरा सा लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आटा बदलने से रोटी के फायदे भी बदल जाते हैं? गेहूं के अलावा ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का और बेसन की रोटी भी खाने में शामिल की जा सकती है।

अगर आप रोज एक ही तरह की रोटी खाकर बोर हो गए हैं, तो आटे में थोड़ा बदलाव कर सकते हैं। इससे स्वाद में भी  नयापन आएगा और शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलेंगे। आइए जानते हैं किस आटे की रोटी में क्या खास है।

1.गेहूं की रोटी
गेहूं की रोटी ज्यादातर घरों में रोज बनती है। साबुत गेहूं के आटे की रोटी में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कुछ मात्रा में प्रोटीन मिलता है। यह रोज के खाने का आसान और अच्छा विकल्प है। इसे सामान्य और संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। रोटी के लिए साबुत गेहूं का आटा लेना बेहतर रहता है।

2.ज्वार की रोटी
ज्वार एक मिलेट यानी मोटा अनाज है। इसमें फाइबर पाया जाता है और यह ग्लूटेन-फ्री भी होता है। ज्वार की रोटी उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकती है, जो अपनी थाली में अलग-अलग अनाज शामिल करना चाहते हैं। इसे दाल, सब्जी या दही के साथ खाया जा सकता है।

कौन सी रोटी है बेहतर

3.बाजरे की रोटी
बाजरे की रोटी खासकर सर्दियों में खूब पसंद की जाती है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। यह खाने में स्वादिष्ट होने के साथ थाली में एक अलग अनाज जोड़ती है। बाजरे की रोटी को सब्जी या दही के साथ खाना एक अच्छा कॉम्बिनेशन है।

4.रागी की रोटी
रागी यानी नाचनी में कैल्शियम और फाइबर पाया जाता है। इसे रोटी के अलावा चीला और डोसा बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। जो लोग अपनी डाइट में कैल्शियम और फाइबर वाले खाद्य पदार्थ बढ़ाना चाहते हैं, वे रागी को शामिल कर सकते हैं। 

कौन सी रोटी है बेहतर

5.मक्के की रोटी
मक्के की रोटी और सरसों का साग देसी खाने का फेमस कॉम्बिनेशन है। मक्के में कार्बोहाइड्रेट और फाइबर मिलता है। अगर आप गेहूं से अलग अनाज खाना चाहते हैं, तो मक्के की रोटी ट्राई कर सकते हैं।

6.बेसन की रोटी
बेसन चने से बनता है और इसमें प्रोटीन पाया जाता है। बेसन की रोटी या चीला खाने में शामिल करने से डाइट में प्रोटीन का एक और स्रोत जुड़ सकता है। इसे अकेले या किसी दूसरे आटे के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

रोटी के साथ थाली भी रखें बैलेंस
सिर्फ आटा बदलने से खाना पूरी तरह हेल्दी नहीं हो जाता। रोटी के साथ दाल, हरी सब्जी, दही और सलाद जैसी चीजें भी शामिल करें। इससे भोजन ज्यादा संतुलित रहेगा।

रोटी रोज की हो सकती है, लेकिन आटे में बदलाव करके आप स्वाद के साथ खाने में अलग-अलग पोषक तत्व भी डाइट में  जोड़ सकते हैं।

(disclaimer): अगर आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोई दूसरी बीमारी है, तो डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।

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  Sports

India vs Sri Lanka Galle Test | गाले टेस्ट में मानव सुथार का जलवा... 10 विकेट चटकाकर भारत को याद दिलाई 'क्लासिकल' स्पिन की असली कला

भारतीय रेड-बॉल (टेस्ट) क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजी को लेकर हाल के दिनों में बनी अनिश्चितता के बीच, 24 वर्षीय युवा स्पिनर मानव सुथार ने गाले टेस्ट में अपनी फिरकी का ऐसा जादू चलाया जिसने भारतीय फैंस को पुराने जमाने की क्लासिकल बाएं हाथ की स्पिन की याद दिला दी। श्रीलंका के खिलाफ भारत की 165 रन की शानदार जीत में सुथार ने मैच में कुल 10/131 का बेहतरीन आंकड़ा दर्ज किया। इसके साथ ही वे विदेशी सरजमीं पर खेले गए टेस्ट मैच में 10 विकेट लेने वाले भारत के सातवें स्पिनर (अनिल कुंबले, आर. अश्विन, बिशन सिंह बेदी आदि के क्लब में) बन गए हैं।

सिर्फ स्पिन नहीं, ड्रिफ्ट, बाउंस और गति का अद्भुत तालमेल

सुथार का स्पेल केवल पिच से मिलने वाली टर्न पर निर्भर नहीं था, बल्कि उन्होंने हवा के बहाव का इस्तेमाल कर ड्रिफ्ट पैदा की और बिना एक्शन बदले गेंद की रफ्तार में छोटे-छोटे बदलाव किए।

उनकी इस गेंदबाजी विविधता की झलक दूसरी पारी में साफ देखने को मिली, जब उन्होंने 5 अलग-अलग तरीकों से 5 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा:

पथुम सूरियाबंदारा – LBW आउट

सोनल दिनुशा – लेग स्लिप पर कैच आउट

प्रभात जयसूर्या – विकेट के पीछे कैच

लाहिरू कुमारा – ऋषभ पंत द्वारा कैच आउट

केशरा नुवान्था – क्लीन बोल्ड 

आंकड़े कहानी का एक हिस्सा बताते हैं, जबकि सुथार का तरीका दूसरा हिस्सा। उन्होंने कंट्रोल के साथ गेंदबाजी की, हवा का इस्तेमाल करके ड्रिफ्ट पैदा किया, अपने एक्शन में बदलाव किए बिना गति बदली और लगातार एक ही जगह पर गेंद डालते रहे। खेल को जबरदस्ती आगे बढ़ाने की कोई जल्दबाजी नहीं थी। सुथार ने दबाव बनाए रखा, बल्लेबाजों के गलती करने का इंतजार किया और विकेट लेने के अलग-अलग तरीके अपनाए। गाले में, पुराने जमाने का यह तरीका बहुत कारगर साबित हुआ।

एक क्लासिकल स्पिनर

भारत ने अक्षर पटेल के जरिए बाएं हाथ की स्पिन को आजमाया है, लेकिन वे टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए हैं। सुथार एक अलग तरह की संभावना पेश करते हैं। उनका राउंड-आर्म एक्शन और ओवरस्पिन पर जोर उन्हें गेंद को टर्न कराने की क्षमता के साथ-साथ डिप और बाउंस हासिल करने में मदद करता है। आर्म बॉल पर निर्भर रहने के बजाय, सुथार की मुख्य गेंद (स्टॉक डिलीवरी) ही अनिश्चितता पैदा करती है। यह पारंपरिक आधार पर बनी स्पिन है, जहां शॉर्टकट के बजाय बुनियादी बातों को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाता है।

यह बात गाले में पहली ही गेंद से साफ हो गई थी। सुथार की गेंद ड्रिफ्ट हुई, टर्न हुई और तेजी से उछली, जिस पर दिनेश चांदीमल ने बल्ला लगाया और गेंद विकेटकीपर के पास चली गई।

दूसरी पारी में उनके स्पेल ने उनकी गेंदबाजी की पूरी रेंज दिखा दी। पथुम सूरियाबंदारा LBW आउट हुए। सोनल दिनुशा लेग स्लिप पर कैच आउट हुए। प्रभात जयसूर्या विकेट के पीछे कैच आउट हुए। लाहिरू कुमारा का कैच ऋषभ पंत ने पकड़ा। केशरा नुवान्था बोल्ड हो गए।

पांच विकेट, पांच अलग-अलग तरह से आउट हुए बल्लेबाज

यह विविधता कोई इत्तेफाक नहीं है। यह सोच-समझकर दिखाई गई स्किल और कलाकारी है।

KL राहुल की सुथार पर राय

KL राहुल का मानना ​​है कि मानव सुथार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे अपने बॉलिंग एक्शन को बदले बिना अपनी गति (पेस) में बदलाव कर सकते हैं, जिससे बल्लेबाजों के लिए उन्हें समझना मुश्किल हो जाता है। राहुल ने कहा, "यह एक ही एक्शन और एक ही एंगल से किए जाने वाले छोटे-छोटे बदलाव हैं। वे अपने हाथ की गति (आर्म स्पीड) बदले बिना ही गेंद को धीमा या तेज़ फेंक सकते हैं।"

सुथार ने गाले की परिस्थितियों का भी समझदारी से इस्तेमाल किया। राहुल ने बताया कि वे हवा का फायदा उठाकर गेंद को ड्रिफ्ट कराते थे और फिर उसे सीधा या अंदर की ओर लाते थे। राहुल ने कहा, "जब एक तरफ से हवा चल रही थी, तो उन्होंने उस ड्रिफ्ट का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया और वहां से गेंद सीधी हो जाती थी या अंदर आती थी। ऐसा वे भारत में भी हमेशा करते रहे हैं।"

उनकी निरंतरता (कंसिस्टेंसी) ही उन्हें खास बनाती है। सुथार गति में छोटे-छोटे बदलाव करते हुए भी एक ही जगह पर गेंद डालते रहते हैं, जिससे बल्लेबाजों को यह अंदाजा नहीं लग पाता कि अगली गेंद कैसी होगी।

राहुल ने कहा, "वे एक ही जगह से लगातार गेंदबाजी करते हैं और बस छोटे-छोटे बदलावों का इस्तेमाल करके पूरे दिन ऐसा कर पाते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "उनकी सबसे बड़ी खूबी उनकी गति और निरंतरता है, जिससे वे हमेशा बल्लेबाज को आउट करने के अलग-अलग तरीके आजमाते रहते हैं।"

सुथार का दूसरी पारी का स्पेल उनके स्वभाव और काबिलियत का सबसे बड़ा सबूत था। श्रीलंका का स्कोर 175/6 से 199/6 हो गया था और वे भारत के लिए परेशानी खड़ी कर रहे थे। सुथार की वापसी ने खेल बदल दिया। उन्होंने छह गेंदों के भीतर दिनुशा, जयसूर्या और कुमारा को आउट किया, और फिर नुवान्था को आउट करके अपने 10 विकेट पूरे किए।

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यह सिर्फ अचानक मिली टर्न नहीं थी। यह कंट्रोल, गति, उछाल और ड्रिफ्ट पर आधारित स्पेल था। उन्हें इस बात की समझ थी कि बल्लेबाज क्या करने की कोशिश करेंगे और उसे कैसे रोका जाए।

खोज पूरी हो गई है, यह कहने के लिए दो टेस्ट मैच काफी नहीं हैं। लेकिन सैंपल साइज़ से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है बुनियादी हुनर। सुथार ने दिखाया है कि वे लंबे स्पेल तक गेंदबाजी कर सकते हैं, दबाव बनाए रख सकते हैं और विकेट लेने के अलग-अलग तरीके ढूंढ सकते हैं।

खूबियों को बनाए रखें

चेतेश्वर पुजारा ने सुथार से उन खूबियों को बनाए रखने का आग्रह किया है जो उन्हें टेस्ट क्रिकेट में असरदार बनाती हैं, खासकर इसलिए क्योंकि IPL की मांगें बहुत अलग होती हैं। गाले में सुथार की ओवरस्पिन, पेस, ड्रिफ्ट और बाउंस सभी देखने को मिलीं, साथ ही बल्लेबाजों को बिना कोई साफ संकेत दिए छोटे-छोटे बदलाव करने की उनकी काबिलियत भी दिखी। ये वे हुनर ​​हैं जिन्हें उनके खेल का मुख्य हिस्सा बने रहना चाहिए।

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सिर्फ़ एक प्रदर्शन से भारत की लंबे समय की स्पिन योजनाओं के बारे में कोई पक्का फ़ैसला नहीं किया जा सकता। लेकिन सुथार के 10 विकेट लेने के कारनामे ने यह दिखा दिया कि एक युवा स्पिनर मौजूद है जो लंबे स्पेल तक गेंदबाजी कर सकता है, अपनी लाइन बनाए रख सकता है और हालात का अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल कर सकता है। फ़िलहाल, सुथार ने भारत को क्लासिकल स्पिन की अहमियत की याद दिलाई है। 

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Thu, 20 Aug 2026 12:25:00 +0530

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