दिल्ली सरकार मेडिकल स्नातक और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाएगी: स्वास्थ्य मंत्री
नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने सोमवार को बताया कि दिल्ली सरकार चरणबद्ध तरीके से स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) और सुपर-स्पेशलिटी (एसएस) मेडिकल सीटों का विस्तार करके राष्ट्रीय राजधानी में चिकित्सा शिक्षा क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही है।
ग्रीनफील्ड योजना के तहत, इंदिरा गांधी अस्पताल (आईजीएच), द्वारका और गुरु गोविंद सिंह अस्पताल से संबद्ध निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों में 150-150 एमबीबीएस सीटें प्रस्तावित हैं, जिससे कुल 300 नई यूजी सीटें जुड़ेंगी।
ब्राउनफील्ड योजना के तहत, डॉ. बीएसए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एमबीबीएस की क्षमता 125 से बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव है, जबकि मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (एमएआईडीएस) में बीडीएस की सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 70 करने का प्रस्ताव है।
स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए एमएएमसी में स्नातकोत्तर सीटों की संख्या 260 से बढ़ाकर 295 करने का प्रस्ताव है, यानी 35 सीटों की वृद्धि। वहीं, एमएआईडीएस में स्नातकोत्तर सीटों की संख्या 22 से बढ़ाकर 42 करने का प्रस्ताव है। बीएसए मेडिकल कॉलेज में भी 24 सीटों वाले स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रस्तावित हैं।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में योग्य चिकित्सा और दंत चिकित्सकों की कमी को दूर करना और दिल्ली के स्वास्थ्य सेवा कार्यबल और सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि रोडमैप के तहत सरकार ने तीन-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें ग्रीनफील्ड परियोजनाएं, मौजूदा संस्थानों का ब्राउनफील्ड विस्तार और स्नातकोत्तर एवं उन्नत चिकित्सा कार्यक्रमों का विस्तार शामिल है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह विस्तार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत पर्याप्त और उच्च प्रशिक्षित मानव संसाधनों द्वारा समर्थित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का निर्माण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का विस्तार केवल सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षित डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सुपर-विशेषज्ञों का एक स्थायी समूह तैयार करना है जो दिल्ली के नागरिकों की सेवा कर सकें।
पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार चिकित्सा शिक्षा क्षमता के योजनाबद्ध और चरणबद्ध विस्तार पर काम कर रही है, साथ ही यह सुनिश्चित कर रही है कि बुनियादी ढांचा, संकाय और रोगी देखभाल संबंधी आवश्यकताएं भी इसके साथ-साथ बढ़ें।
--आईएएनएस
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प्रेग्नेंसी, 20 लाख के शेयर और पुराने रिश्तों के ताने...; ट्विशा शर्मा केस की 636 पन्नों की चार्जशीट में क्या-क्या?
Twisha Sharma Death Case: भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने अपनी 636 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट पेश कर दी है. इस चार्जशीट के सामने आने के बाद मामले में कई चौंकाने वाले और दिल दहला देने वाले तथ्य उजागर हुए हैं. जांच एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि ट्विशा अपनी ससुराल में भयंकर मानसिक पीड़ा और लगातार अपमान के दौर से गुजर रही थी. चार्जशीट में सीधे तौर पर ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. जांच के अनुसार शादी के बाद से ही ट्विशा को उसके पुराने रिश्तों को लेकर ताने दिए जाते थे, गालियां दी जाती थीं और उसके आत्मसम्मान को लगातार चोट पहुंचाई जाती थी.
अतीत को लेकर लगातार मानसिक उत्पीड़न
CBI की चार्जशीट में दर्ज बयानों के मुताबिक जब ट्विशा ने शादी के बाद ईमानदारी से अपने पति समर्थ सिंह को अपने पुराने रिश्तों के बारे में बताया, तभी से उसके जीवन में कलह शुरू हो गई. समर्थ ने इस बात को हथियार बना लिया और वह आए दिन ट्विशा के अतीत को लेकर ताने कसने लगा. बात यहीं तक सीमित नहीं रही, सास गिरिबाला सिंह भी ट्विशा के चरित्र पर लगातार सवाल उठाती थीं. मार्च 2026 में जब ट्विशा के पिता को दिल का दौरा पड़ा, तब भी वह ससुराल में भारी तनाव और मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी. इसके बाद वह कुछ समय के लिए अपने पिता के घर नोएडा चली गई थी, लेकिन 24 मार्च को जब वह वापस भोपाल लौटी, तो हालात में कोई सुधार नहीं हुआ.
निजी जिंदगी में दखल और प्रेग्नेंसी को लेकर तनाव
चार्जशीट में यह भी सामने आया है कि सास गिरिबाला सिंह ट्विशा की बेहद निजी जिंदगी में दखल देती थीं और उससे लगातार उसके पीरियड्स को लेकर सवाल पूछती थीं. अप्रैल 2026 के मध्य में जब ट्विशा को अपनी प्रेग्नेंसी का पता चला, तो वह मानसिक रूप से बेहद असमंजस में पड़ गई. वह यह तय नहीं कर पा रही थी कि इस तनावपूर्ण माहौल में बच्चे को जन्म देना सही होगा या नहीं. जब यह बात समर्थ के जरिए सास तक पहुंची, तो घर में भारी विवाद खड़ा हो गया. 17 अप्रैल को ट्विशा के साथ अभद्रता की गई, गालियां दी गईं और उसे घर से निकाल दिया गया. इसके बाद ट्विशा ने अपने मायके जाकर अपनी मां को रोते हुए पूरी आपबीती सुनाई और समर्थ की नशा करने की लत के बारे में भी बताया.
शेयर के पैसे और नौकरी पर तानेबाजी
CBI जांच के अनुसार ट्विशा और समर्थ के नाम पर करीब बीस लाख रुपए के शेयर थे. जब ससुराल वालों को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने ट्विशा पर उन पैसों को अपने नाम करने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया. उसे बैंक की शाखा में भी ले जाया गया, लेकिन ट्विशा ने साफ कह दिया कि यह उसके पिता की मेहनत की कमाई है और वह इसे ट्रांसफर नहीं करेगी. इसके अलावा जब ट्विशा ने अपनी नौकरी छोड़ी, तो उसका पति समर्थ यह कहकर उसका मजाक उड़ाता था कि उसे अंग्रेजी तक बोलनी नहीं आती, इसलिए उसे नौकरी से निकाल दिया गया है. ससुराल का यह माहौल ट्विशा को अंदर ही अंदर पूरी तरह तोड़ रहा था.
गर्भपात का फैसला और गंभीर आरोप
अप्रैल के आखिर और मई की शुरुआत में मामला और बिगड़ गया. दोनों भोपाल के अस्पताल पहुंचे, जहां बच्चे को ना रखने की दिशा में कदम उठाया गया. 6 मई को जब दोनों दोबारा अस्पताल गए, तो समर्थ ने डॉक्टर से साफ कहा कि वे बच्चा नहीं चाहते. उसी दिन ट्विशा को एक नई नौकरी का ऑफर भी मिला था, जिससे उसके जीवन में कुछ उम्मीद जगी थी. लेकिन उसी रात हालात इतने बिगड़ गए कि ट्विशा ने अपनी मां को मैसेज भेजकर कहा कि वे उसे यहां से आकर ले जाएं. समर्थ ने उससे कह दिया था कि वह अब उसे और नहीं झेल सकता. 8 मई को गर्भपात के बाद समर्थ ने ट्विशा पर बच्चे के पिता को लेकर बेहद घिनौने सवाल खड़े कर दिए, जिससे ट्विशा पूरी तरह टूट गई.
12 मई की खौफनाक घटना और आगे की कानूनी प्रक्रिया
12 मई 2026 को घर में एक बार फिर जोरदार झगड़ा और गाली-गलौज हुई. ट्विशा ने रोते हुए अपनी मां से बात की. इसके कुछ ही देर बाद संदिग्ध हालात में उसकी मौत हो गई. CBI की चार्जशीट में घर के सीसीटीवी फुटेज का भी हवाला दिया गया है, जिसमें समर्थ सिंह ट्विशा के शव को सीढ़ियों से नीचे लाता दिखाई दे रहा है. ट्विशा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण आत्महत्या बताया गया है. हालांकि CBI ने अपनी चार्जशीट में पति और सास के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और प्रताड़ित करने के मजबूत आधार दर्ज किए हैं, जिस पर अंतिम निर्णय अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगा.
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