पंजाब कांग्रेस में सब एकजुट, आलाकमान के फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं: भूपेश बघेल
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल ने शनिवार को दावा किया कि राज्य में पार्टी आलाकमान के प्रदेश अध्यक्ष से जुड़े फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है। चंडीगढ़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक राणा गुरजीत के आवास पर करीब 80 मिनट तक चली महत्वपूर्ण बैठक के बाद बघेल ने कहा कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और सभी नेता एकजुट हैं। हालांकि, जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी नेताओं के बयानों से पार्टी के भीतर जारी खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
इस अहम बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेता शामिल हुए, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग इससे दूर रहे। बैठक के तुरंत बाद भूपेश बघेल रायपुर के लिए रवाना हो गए, और हवाई अड्डे जाते समय राजा वडिंग उनके साथ थे और उन्होंने खुद कार चलाई। कांग्रेस ने एक जुलाई को घोषणा की थी कि राजा वडिंग पंजाब इकाई के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि चन्नी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे चन्नी ने इससे पहले बघेल से मुलाकात नहीं की थी।
बैठक के बाद वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि कार्यकर्ताओं की भावनाएं प्रभारी तक पहुंचा दी गई हैं और पार्टी को कभी-कभी अपने फैसले वापस भी लेने पड़ते हैं। रंधावा ने संकेत दिया कि चन्नी खेमे को राजा वडिंग का नेतृत्व मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के शासन में फैले भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को एक ऐसे निडर नेता की जरूरत है जो मजबूती से अपनी बात रख सके। रंधावा ने पंजाबी में कहा कि उन्हें पुरजोर तरीके से अपनी बात कहने वाला नेता चाहिए, समझौता करने वाले नेता की जरूरत नहीं है।
रंधावा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने कहा कि रंधावा और वह लंबे समय से साथ काम कर रहे हैं। वडिंग ने कहा कि पंजाब कांग्रेस में कोई 'स्लीपर सेल' या समझौता करने वाला नेता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई नेताओं पर दूसरी पार्टियों से गुप्त बैठकें करने के आरोप लगते रहे हैं और पंजाब को ऐसे समझौतावादी नेताओं की जरूरत नहीं है। वहीं, भूपेश बघेल ने भी सहमति जताई कि अगर कोई नेता भाजपा, आप या किसी अन्य दल के साथ समझौता करता है तो बात नहीं बनेगी और वह प्रभारी के रूप में ऐसा नहीं होने देंगे।
बैठक में चन्नी के अलावा सुखजिंदर सिंह रंधावा, भारत भूषण आशु, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ.पी. सिंह भी मौजूद रहे। जब चन्नी से पूछा गया कि क्या उन्हें वडिंग का नेतृत्व स्वीकार है, तो उन्होंने कहा कि सभी मुद्दों पर बैठक में चर्चा होगी और आगे 'तेल देखेंगे, तेल की धार देखेंगे'। भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि बैठक में राजा वडिंग को हटाने या आगामी चुनाव के लिए चन्नी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है, उनका एकमात्र लक्ष्य राज्य में कांग्रेस की सरकार बनाना है।
दतिया उपचुनाव: भाजपा से टिकट न मिलने पर शिवसेना (उबाठा) ने नरोत्तम मिश्रा को दिया चुनाव लड़ने का प्रस्ताव
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद, अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने राज्य के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दतिया उपचुनाव लड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है।
शिवसेना (उबाठा) की मध्य प्रदेश इकाई के प्रमुख सुनील शर्मा ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद नरोत्तम मिश्रा को यह प्रस्ताव भेजा है। शर्मा के अनुसार, यदि मिश्रा इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं, तो पार्टी प्रमुख व महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पार्टी नेता आदित्य ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेता मध्य प्रदेश आकर उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे।
सुनील शर्मा ने बताया कि उन्होंने पार्टी की मध्य प्रदेश आईटी सेल के प्रमुख नाहर सिंह गौर को निर्देश दिए हैं कि वे नरोत्तम मिश्रा को भेजे गए इस निमंत्रण का वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर साझा करें। वर्तमान में शिवसेना (उबाठा) के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 20 विधायक और लोकसभा में तीन सांसद हैं, जबकि हाल ही में उसके छह लोकसभा सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल हो गए थे।
शिवसेना (उबाठा) का यह प्रस्ताव भाजपा द्वारा दतिया उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित करने के ठीक एक दिन बाद आया है। आगामी 30 जुलाई को होने वाले इस उपचुनाव के लिए शुक्रवार को भाजपा ने तिवारी के नाम की घोषणा की थी।
टिकट न मिलने से नाराज नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने क्षेत्र में कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया, स्थानीय बाजार बंद कराए और भाजपा के स्थानीय कार्यालय पर ताला लगा दिया। इस दौरान हुई कथित हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा उम्मीदवार को बदले जाने की किसी भी संभावना से साफ इनकार किया है।
गौरतलब है कि दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति तब पैदा हुई, जब यहां से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई गई। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी।
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