Explainer: अमेरिका-ईरान के बीच जून में हुए MoU के बाद होर्मुज से कितने गुजरे जहाज, कैसे रहे इलाके के हालात
Explainer: अमेरिका और ईरान ने पिछले महीने जंग खत्म करने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे. दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के बाद होर्मुज समेत पूरे मिडिल ईस्ट में शांति लौट आई थी. उम्मीद थी कि ये शांति लंबे समय तक चलेगी, हालांकि ऐसा नहीं हुआ. सिर्फ तीन हफ्ते के भीतर ही ये समझौता खत्म हो गया और दोनों देश एक बार फिर से जंग के मैदान में कूद पड़े. इस जंग ने एक बार फिर से होर्मुज के भविष्य को अनिश्चित कर दिया है.
तीन जहाजों पर ईरानी हमले के बाद हुई जंग की शुरुआत
- इस जंग की शुरुआत हाल ही में होर्मुज में तीन जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों के बाद हुई. ईरान ने आरोप लगाया था कि ये जहाज उसकी मंजूरी के बिना वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे थे. ईरान द्वारा जहाजों पर किए गए हमलों के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान की जमीन पर हमले तेज कर दिए.
- अमेरिका ने पहले तटीय शहरों को निशाना बनाया और उसके बाद गुरुवार सुबह राजधानी तेहरान पर भी हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने कई खाड़ी देशों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे. ये सबकुछ ऐसे वक्त में हुआ जब ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चल रहा था.
ट्रंप ने युद्धविराम खत्म करने का किया एलान
- इन हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें लगता है कि युद्धविराम "खत्म" हो गया है, जिससे ईरान के साथ फिर से पूर्ण युद्ध छिड़ने का डर पैदा हो गया है. वहीं, तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की धमकी दी है.
- इन सब बातों का असर उस वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है जो दशकों से होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर रही है, जिसे हाल के महीनों में अमेरिका-इजरायल गठबंधन द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने से नुकसान उठाना पड़ा है, जो अब फिर से अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है.
जंग से पहले होर्मुज से कितना गुजरता था तेल?
- बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री 'चोकपॉइंट' (संकरे समुद्री रास्ते) में से एक है. यह संकरा जलमार्ग, जो अपने सबसे संकरे बिंदु पर लगभग 33 किमी (21 मील) चौड़ा है. ये समुद्री मार्ग ही तेल और गैस से समृद्ध खाड़ी क्षेत्र को बाकी दुनिया से जोड़ता है.
- जंग शुरू होने से पहले हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस जलडमरूमध्य से गुजरते थे. जो वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है. जिससे शिपिंग में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन जाती है.
सीजफायर के बाद होर्मुज में कितने जहाजों पर हुआ हमला?
- अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आस-पास कम से कम पांच कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए हैं. पहला हमला 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाले कंटेनर शिप 'एवर लवली' पर ओमान के डाहित बंदरगाह से लगभग 14 किमी (7.5 नॉटिकल मील) दक्षिण-पूर्व में हुआ. इस प्रोजेक्टाइल हमले में कोई घायल नहीं हुआ. उसके बाद जहाज ने अपनी यात्रा जारी रखी.
- इसके बाद 27 जून को पनामा के झंडे वाले टैंकर 'किकू' पर भी हमला किया गया. इस जहाज पर 20 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल भरा हुआ था. इस हमले में भी कोई घायल नहीं हुआ. इस हमले के लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया और 26 व 27 जून को उसके दक्षिणी तट के शहरों पर हमले कर दिए. इसके बाद ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों पक्ष बातचीत करने पर सहमत हो गए.
6-7 जुलाई को ईरान ने तीन जहाजों को बनाया निशाना
- उसके बाद 6-7 जुलाई की रात ईरान ने कतर के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर 'अल रेकायत' पर ओमान के तट के पास एक प्रोजेक्टाइल से हमला किया. जिससे इंजन-रूम में आग लग गई. चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन जहाज को काफी नुकसान पहुंचा.
- इसके अलावा सऊदी अरब के झंडे वाले सुपरटैंकर 'वेद्यान' जो कच्चा तेल ले जा रहा था उस पर भी होर्मुज से गुजरते वक्त हमला किया गया. हालांकि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई. इसके अलावा लाइबेरिया के झंडे वाले 'M/T साइप्रस प्रॉस्पेरिटी' पर भी हमला किया गया.
17 जून के बाद होर्मुज से कितने जहाज गुजरे?
- बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इसके बाद होर्मुज को खोल दिया गया. युद्ध से पहले, हर दिन लगभग 100 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते थे; इनमें से लगभग आधे तेल टैंकर होते थे जो कुल मिलाकर 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल ले जाते थे. 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल की बमबारी शुरू होने के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, जबकि कुछ हफ्ते बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लगा दी थी.
- 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती समझौते की घोषणा के बाद यह जलमार्ग फिर से खुल गया. हालांकि, जहाजों की आवाजाही सामान्य से काफी कम रही. PortWatch के डेटा के अनुसार, 18 जून से 5 जुलाई के बीच दोबारा खुलने के शुरुआती 18 दिनों में केवल 513 जहाज ही इस जलडमरूमध्य से गुजरे. यानी हर दिन औसतन 28 जहाजों ने होर्मुज पार किया. जो जंग से पहले के औसत से बहुत कम है.
- अब जब अमेरिका और ईरान फिर से एक-दूसरे के इलाके या ठिकानों पर हमला कर रहे हैं, तो इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाली आवाजाही एक बार फिर ठप हो सकती है. MoU पर साइन होने के बाद से, कई जहाजों ने अपने पब्लिक AIS ट्रैकिंग ट्रांसपोंडर चालू कर दिए हैं, लेकिन कुछ ने ऐसा नहीं किया है. जिससे इस जलडमरूमध्य से होने वाले शिपमेंट की कुल मात्रा का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है.
होर्मुज में अभी भी फंसे हैं सैकड़ों नाविक
- इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में लगभग 6,000 नाविक फंसे हुए हैं. कई नाविक ऐसे जहाजों पर हैं जो महीनों के संघर्ष और कमर्शियल जहाजों पर बार-बार हुए हमलों के कारण समुद्री ट्रैफिक में रुकावट आने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर नहीं पा रहे हैं.
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रास्ते को लेकर क्या विवाद है?
- बता दें कि खाड़ी से निकलने वाले कई जहाज नेवल माइन्स (समुद्री बारूदी सुरंगों) के डर से युद्ध से पहले इस्तेमाल होने वाले शिपिंग रास्तों से नहीं गुजर रहे हैं. इसके बजाय, वे दो रास्तों से खाड़ी से बाहर निकल रहे हैं. इनमें ईरान का समुद्री इलाका और ओमान के समुद्री इलाका शामिल है. इन रास्तों पर अमेरिका की निगरानी है. होर्मुज के बीच का हिस्सा- जहां समुद्र की तलहटी में सबसे ज्यादा माइन्स होने की आशंका है. इसलिए इसका अधिक इस्तेमाल नहीं किया जा रहा.
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