विदेश मंत्री जयशंकर ने ओमानी समकक्ष से मुलाकात कर क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की
विदेश मंत्री जयशंकर ने ओमानी समकक्ष से मुलाकात कर क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा कीFirozabad Aarav Murder Case: 40 दिन में इंसाफ, डेढ़ साल के मासूम के हत्यारे को फांसी; कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
Firozabad Aarav Murder Case: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से न्याय व्यवस्था की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में डेढ़ साल के मासूम बच्चे आरव की बेरहमी से हत्या करने वाले दोषी विराज पाठक को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात यह रही कि पुलिस और न्यायपालिका ने इतनी तेजी से काम किया कि वारदात के महज 40 दिनों के भीतर ही दोषी को उसके अंजाम तक पहुंचा दिया गया. इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है और इलाके के लोगों ने कोर्ट के इस कदम की सराहना की है.
सीसीटीवी में कैद हुई थी हैवानियत की वारदात
यह पूरी घटना इसी साल 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई थी. बदायूं के रहने वाले आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने डेढ़ साल के आरव को अगवा किया और फिर उसे सड़क पर ले आया. इसके बाद आरोपी ने जो किया, उसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए. आरोपी विराज ने महज 30 सेकंड के भीतर मासूम बच्चे को एक के बाद एक आठ बार सड़क पर पटका. यह पूरी दर्दनाक घटना वहां लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी. बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में भारी गुस्सा फैल गया था.
पुलिस और कोर्ट ने दिखाई रिकॉर्ड तोड़ तेजी
मासूम आरव की हत्या के बाद पुलिस तुरंत एक्शन में आई और आरोपी विराज पाठक को गिरफ्तार कर लिया. मामले की गंभीरता और लोगों के गुस्से को देखते हुए पुलिस ने दिन-रात एक करके महज 6 दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी. इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायालय में मामले की रोजाना सुनवाई हुई. जिला जज ने गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपी विराज को दोषी माना और उसे मौत की सजा सुना दी. वारदात के 40 दिनों के अंदर फांसी का फैसला आना कानून व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
प्रेम प्रसंग और ब्लैकमेलिंग का दावा
इस खौफनाक हत्याकांड के पीछे प्रेम प्रसंग और आपसी विवाद की कहानी सामने आई है. आरोपी विराज पाठक का दावा था कि उसका बच्चे की मां के साथ प्रेम संबंध था और वह महिला उसे ब्लैकमेल कर रही थी. इसी विवाद के चलते उसने इस खौफनाक कदम को उठाया. दूसरी तरफ, मृतक बच्चे की मां का कहना था कि विराज उस पर शादी करने का दबाव बना रहा था. वह उसके डेढ़ साल के बेटे आरव को अपने रास्ते का कांटा समझता था. घटना के दिन जब बच्चे की मां अपनी एक रिश्तेदार के घर गई थी, तब विराज टॉफी दिलाने के बहाने बच्चे को अपने साथ ले गया और उसे मौत के घाट उतार दिया.
भाई को फोन कर कहा था- मेरे साथ धोखा हुआ
आरोपी विराज पाठक मूल रूप से बदायूं का रहने वाला है. उसके तीन भाइयों सोनू, राजीव और मुनीश ने उसकी जिंदगी को लेकर कई बातें बताई हैं. भाइयों के मुताबिक, साल 2010 में पिता की मौत के बाद उनके घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी. इसके चलते विराज की पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी. उसने पहले मारुति वैन चलाकर टैक्सी का काम शुरू किया और बाद में घर के पास ही एक छोटी परचून की दुकान खोलने लगा. भाइयों ने बताया कि मासूम की हत्या करने के बाद विराज ने अपने बड़े भाई राजीव को फोन किया था. फोन पर वह बुरी तरह रो रहा था और उसने बस इतना कहा था कि मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है.
परिवार ने भी किया विराज की करतूत का विरोध
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि विराज के अपने परिवार ने भी उसका साथ नहीं दिया. उसके भाइयों ने साफ शब्दों में कहा कि विराज ने जो कुछ भी किया है, वह बेहद गलत और खौफनाक है. एक डेढ़ साल के मासूम बच्चे के साथ की गई इस हैवानियत को किसी भी तरीके से सही नहीं ठहराया जा सकता है. परिवार का कहना था कि कानून ने उसे जो सजा दी है, वह उसके कर्मों का ही फल है. इस फैसले से समाज में एक कड़ा संदेश गया है कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों को कानून कभी नहीं बख्शता है.
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