दुनिया की सुपर पावर समझने वाला अमेरिका अपने हथियारों पर किस तरह से गुरूर करता है यह पूरी दुनिया कई मौकों पर देख चुकी है और इन हथियारों के दम पर ट्रंप तो कई देशों पर कब्जा करने की प्लानिंग भी करते रहते हैं। हाल ही में हथियारों से घेर कर अमेरिका ने कैसे वेनेजुएला को अपने कब्जे में ले लिया था। लेकिन अब यही हथियार अमेरिका की इज्जत मिट्टी में मिलाते हुए धुआधुआ हो रहे हैं। दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना में गिनी जाने वाली अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत को लेकर ऐसी खबर सामने आई है जिसने ट्रंप को बेचैन कर दिया है। खबर है कि अमेरिका के युद्धपोतों में लगातार आग लग रही है। दरअसल युद्धप समुद्र में देश की रक्षा करने वाले बाहुबली होते हैं। इनका काम दुश्मन की पनडुब्बियों और जहाजों को खोजना, मिसाइलें दागना और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा करना होता है। यानी कि युद्ध के दौरान इनकी भूमिका बहुत ही अहम होती है।
इन्हीं युद्धपोतों में आग लग जाए तो सोचिए उस देश की सैन्य ताकत को कितना बड़ा नुकसान पहुंचेगा। हाल ही में अमेरिका के भी कई जंग युद्धपोतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। एक मिलिट्री मैगजीन नेवल एंड मर्चेंट शिप्स ने दावा किया है कि हाल ही के महीनों में अमेरिका के सबसे आधुनिक युद्धपोतों पर आग लगने बिजली की दिक्कत का मामले सामने आए हैं। इनमें यूएसएस गैराल्ट आर फोर्ट एयरक्राफ्ट करियर यूएसएस जवाल्ट डेस्ट्रो और ओले वर्क क्लास डेस्ट्रॉय यूएसएस इंगेज जैसे युद्धफो शामिल है। न्यूक्लियर पावर बैलेस्टिक मिसाइल सबमरीन यूएसएस नेवर पर एक जनरेटर में खराबी के कारण डीजल के धुएं के संपर्क में आने से 64 नाविकों के बीमा पड़ने की भी खबर आई है। इससे पहले मार्च में यूएसएस फोर्ड के ल्ड्री रूम में आग लगी थी। अप्रैल में भी यूएसएस आयजन हावर पर मेंटेनेंस के दौरान और यूएसएस जुबा पर शिपयार्ड में अपग्रेडेशन के दौरान आग लग गई थी।
युद्धपथों में आग लगने की बड़ी वजह क्या है
दरअसल अमेरिकी के युद्धपथों पर आग लगने के कारण शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल सिस्टम, इंजन रूम में ईंधन या तेल का रिसाव, मेंटेनेंस के दौरान मानवीय गलतियां जैसी वजह सामने आई है। लगातार ऑपरेशन का दबाव, रखरखाव और मेंटेनेंस में देरी, आग लगने के कारण रहे हैं। अमेरिकी नौसेना गेंद पोत दुनिया के लगभग हर रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में तैनात रहते हैं। लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहने से इंजन, बिजली और अन्य सिस्टम पर ज्यादा दबाव पड़ता है। कई बार समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के चलते आग लग जाती है। मरम्मत और सर्विसिंग में देरी से छोटी-छोटी खराबियां भी बड़ी बन जाती है। अमेरिकी नौसेना लंबे समय से शिपयार्ड क्षमता और मेंटेनेंस, बैक लॉक से परेशान भी है। आधुनिक उदोतों की लगभग हर क्षमता बिजली पर निर्भर होती है। इलेक्ट्रिकल फेल होने पर कई सिस्टम एक साथ प्रभावी हो सकते हैं और आग लगने जैसी स्थिति आ सकती है। एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल और ऑटोमेटेड सिस्टम पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने पर युद्धपोतों के लिए खतरा बताया गया है। यानी कि अमेरिकी नौसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब ज्यादा एडवांस युद्धपोतें बनाना नहीं बल्कि उनकी सही तरीके से मेंटेनेंस करना है।
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'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' और 'मैं वापस आऊंगा' जैसी हालिया फिल्मों में अपनी बेमिसाल अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाले दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकने के लिए तैयार हैं। नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्ममेकर गुरविंदर सिंह की आगामी पंजाबी फिल्म 'रहमत' को प्रतिष्ठित लोकार्न फिल्म फेस्टिवल (Locarno Film Festival) 2026 के मुख्य इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन सेक्शन में चुन लिया गया है। स्विट्ज़रलैंड में इस फिल्म का भव्य वर्ल्ड प्रीमियर होगा, जहां यह फेस्टिवल के सबसे सर्वोच्च सम्मान 'गोल्डन लेपर्ड' (Golden Leopard) के लिए दुनिया भर की चुनिंदा फिल्मों से मुकाबला करेगी।
'मैं वापस आऊंगा' फ़िल्म के एक्टर की इस फ़िल्म के चुने जाने से चार साल बाद लोकार्न के मुख्य कॉम्पिटिशन में भारत की वापसी भी हुई है। इस सेक्शन में शामिल होने वाली पिछली भारतीय फ़िल्म महेश नारायणन की 'अरियिप्पु' (2022) थी। इस साल, 'रहमत' का मुकाबला होंग सांग-सू, डेनिस कोटे, मारिया बैक, नेल्सन येओ और बेसिल दा कुन्हा जैसे फ़िल्ममेकर्स की नई फ़िल्मों के साथ होगा।
'रहमत' किस बारे में है?
आज के पंजाब पर आधारित, 'रहमत' तीन आपस में जुड़ी कहानियाँ सुनाती है जो उम्मीद, नुकसान और अपनापन जैसे विषयों को दिखाती हैं। एक कहानी एक युवा महिला की है जो पुलिस से छिपाते हुए चुपके से एक घायल अजनबी को पनाह देती है। दूसरी कहानी एक ऐसे परिवार के बारे में है जो परिवार के मुखिया के गायब होने के बाद फिर से संभलने की कोशिश कर रहा है। तीसरी कहानी एक बुजुर्ग व्यक्ति के बारे में है जो एक गाँव में आता है और खुद को भगवान बताता है।
नसीरुद्दीन शाह ने रशीद अली का किरदार निभाया है, जिनका परिवार 1947 में बंटवारे से पहले पंजाब छोड़कर चला गया था। दशकों बाद, इंग्लैंड में अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर समय बिताने के बाद, वह उस गाँव में लौटते हैं जहाँ उनका जन्म हुआ था।
'रहमत' अजीत कौर की कहानियों पर आधारित है
इस फ़िल्म की पटकथा मशहूर पंजाबी लेखिका अजीत कौर की चार लघु कथाओं - 'ना मारो' (डेड एंड), 'अक्खां' (आँखें), 'छुट्टी' (ऑन वेकेशन) और 'इक पैर घट टुरना' (एक कदम कम चलूँगा) - पर आधारित है।
फ़िल्म की कास्ट में सुविंदर विक्की, मीता वशिष्ठ, दिया कंबोज और नवजोत रंधावा भी शामिल हैं। पंजाबी कवि जसवंत ज़फ़र इस फ़िल्म से एक्टिंग की दुनिया में कदम रख रहे हैं। 'रहमत' पेरिस स्थित पावो फ़िल्म्स का पहला प्रोजेक्ट भी है। यह प्रोडक्शन कंपनी इस साल की शुरुआत में कॉस्मिन इलेस और नेमेसिस स्रोर ने शुरू की थी।
नसीरुद्दीन शाह का वर्क फ्रंट
यह ध्यान देने वाली बात है कि नसीरुद्दीन शाह ने मिनी-सीरीज़ 'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' और इम्तियाज़ अली की फ़िल्म 'मैं वापस आऊंगा' में लगातार बेहतरीन परफ़ॉर्मेंस देकर सबका दिल जीत लिया। अब यह अनुभवी एक्टर अपनी कामयाबी की लिस्ट में एक और उपलब्धि जोड़ने जा रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि 2026 का लोकारनो फ़िल्म फ़ेस्टिवल 5 से 15 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें 'रहमत' फ़िल्म 'गोल्डन लेपर्ड' के लिए मुक़ाबला करेगी।
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