भारत निर्वाचन आयोग द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में चलाई गई विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के अंतिम आंकड़े सामने आने के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मच गई है। आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विधिक शुद्धीकरण के लिए चलाए गए इस व्यापक अभियान के कारण ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम की अंतिम मतदाता सूची से एक झटके में कुल 22 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं।
हटाए गए नामों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता शामिल हैं जो या तो मृत हो चुके हैं, लंबे समय से स्थानांतरित हैं या फिर उनके नाम फर्जी तरीके से दोहरे दर्ज थे। इस विधिक छंटनी के बाद चारों राज्यों के चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदलने की संभावना है।
ओडिशा में गिरी सबसे बड़ी विधिक गाज, मतदाता सूची से साफ हुए रिकॉर्ड 21 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची में की गई इस बड़ी प्रशासनिक सफाई का सबसे व्यापक असर ओडिशा में देखने को मिला है। निर्वाचन विभाग द्वारा जारी विधिक आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा की मतदाता सूची से कुल 21 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं। इस अभूतपूर्व कटौती के बाद राज्य में अब कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 3.25 करोड़ रह गई है, जिसमें 1.65 करोड़ पुरुष और 1.60 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं।
चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर नामों के विधिक विलोपन के बावजूद राज्य के मतदाता लिंगानुपातमें सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है, जो अब बढ़कर प्रति 1000 पुरुषों पर 970 महिला मतदाताओं के स्तर पर पहुंच गया है।
पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में भी चला आयोग का हंटर; मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम से साफ हुए हजारों अवैध वोटर ओडिशा के अलावा पूर्वोत्तर भारत के तीन रणनीतिक राज्यों में भी एसआईआर का कड़ा असर देखने को मिला है। जातीय हिंसा और विस्थापन के दौर से गुजर रहे मणिपुर में गहन जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची से 42,917 मतदाताओं के नाम विलोपित कर दिए गए हैं, जिसके बाद राज्य में अब कुल 20.24 लाख सक्रिय मतदाता बचे हैं।
हालांकि, नाम कटने के बाद मणिपुर में महिला मतदाताओं का दबदबा बढ़ा है और लिंगानुपात 1,068 हो गया है। उधर, मिजोरम में भी विधिक पुनरीक्षण के बाद 30,323 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे वहां कुल वोटर्स की संख्या 8.6 लाख बची है, जिसमें 18-19 आयु वर्ग के 24,089 नए युवा मतदाता शामिल हैं। वहीं, देश के सबसे कम आबादी वाले राज्य सिक्किम में भी शुद्धीकरण अभियान के तहत 11,262 वोटर्स के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं।
राजनीतिक दलों के रणनीतिक गणित में मची उथल-पुथल, चुनाव आयोग ने बताया विधिक और आवश्यक कदम एक ही झटके में चार राज्यों से कुल 22 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटने के कारण सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बूथ-स्तरीय गणित और भावी चुनावी रणनीतियों में भारी उथल-पुथल मच गई है। विपक्षी दलों ने इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर विधिक सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं, जबकि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से पारदर्शी और विधिक नियमों के तहत की गई है।
आयोग के अनुसार, फर्जी और डुप्लिकेट वोटों को हटाए बिना निष्पक्ष चुनाव कराना संभव नहीं था, और इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद अब केवल वास्तविक और विधिक रूप से योग्य नागरिक ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे, जिससे लोकतंत्र की शुचिता और मजबूत होगी।
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