आंध्र प्रदेश में कोरोना से व्यक्ति की मौत:4 दिन इलाज चला, दोनों फेफड़े खराब हो गए थे; दो जिलों में 5 पॉजिटिव केस मिले
आंध्र प्रदेश के कडप्पा में 46 साल के एक व्यक्ति की कोविड-19 से मौत हो गई। व्यक्ति को पिछले महीने 24 जून को वेल्लोर के CMC अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उसे निमोनिया पाया गया। कोविड की आशंका पर 26 जून को टेस्ट किया गया, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जांच में पता चला कि उसके दोनों फेफड़े गंभीर रूप से संक्रमित होकर निमोनिया की चपेट में आ गए थे। इलाज के दौरान 28 जून को उसकी मौत हो गई। जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रवि बाबू ने बताया कि मृतक शराब पीता था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मृतक को सांस फूलने और खांसी की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। मृतक के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनकी ट्रेसिंग भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में सैनिटाइजेशन भी शुरू कर दिया है। कडप्पा और तिरुपति में 5 नए पॉजिटिव केस मिले कोरोना से मौत के बाद राज्यभर में समीक्षा कराई गई। इस दौरान कडप्पा और तिरुपति जिलों में 5 और पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। मेडिकल एजुकेशन डायरेक्टर (DME) ने राज्य के सरकारी अस्पतालों से आइसोलेशन बेड, ICU बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाइयों, रैपिड टेस्ट किट, एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता का ब्यौरा मांगा है। भारत में कोरोना से 47 लाख मौत का अनुमान भारत में कोविड से आधिकारिक तौर पर करीब 5.3 लाख मौतें दर्ज की गईं। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अनुमान लगाया कि महामारी से भारत में लगभग 47 लाख मौतें हुईं। दुनिया भर में कोविड से आधिकारिक मौतों का आंकड़ा 70 लाख से अधिक दर्ज किया गया। कोरोना के अब तक हजारों वैरिएंट आ चुके अब तक कोरोना वायरस के हजारों वैरिएंट सामने आ चुके हैं। इनमें से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कुछ प्रमुख वैरिएंट को विशेष श्रेणी में रखा है, जिनमें अल्फा (Alpha), बीटा (Beta), गामा (Gamma), डेल्टा (Delta) और ओमिक्रॉन (Omicron) शामिल हैं। ओमिक्रॉन के भी समय-समय पर कई सब-वैरिएंट, जैसे JN.1, XFG और NB.1.8.1, सामने आए हैं। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… केरलम में निपाह वायरस लौटा, संक्रमित वेंटिलेटर पर:संपर्क में आए 15 लोग क्वारंटीन; शिगेला इंफेक्शन के भी 55 मरीज एडमिट, इनमें बच्चे ज्यादा केरलम में इस साल निपाह वायरस का पहला केस सामने आया। 43 साल मरीज कोझिकोड का रहने वाला है। मरीज को हल्का बुखार आने पर प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। बाद में कोझिकोड मेडिकल कॉलेज भेजा गया। उसकी हालत गंभीर है और वह वेंटिलेटर पर है। पूरी खबर पढ़ें…
लैंसेट की स्टडी; कुपोषण का दोहरा बोझ:बचपन में दुबले, पर 9 साल की उम्र में मोटे हो रहे कई बच्चे
भारत में बच्चों के कुपोषण की तस्वीर बदल रही है। चुनौती अब सिर्फ भोजन की कमी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह कुपोषण और मोटापे के दोहरे बोझ में बदल रही है। एक ताजा स्टडी के मुताबिक अब एक ही बच्चा बचपन में पहले दुबलापन और कुछ ही वर्षों बाद मोटापे का शिकार हो रहा है। इसे वैज्ञानिक ‘डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन’ यानी कुपोषण के दोहरे बोझ के रूप में देख रहे हैं। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए और द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित एक नए अध्ययन में कुछ बच्चों को जन्म से नौ वर्षों तक ट्रैक किया गया। इस स्टडी में शामिल बच्चों में पाया गया कि अधिकांश का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) उनके पहले पांच वर्षों के दौरान सेहतमंद स्तर पर था। सात साल की उम्र में करीब 26% बच्चे दुबले थे, जबकि 5.2% अधिक वजन या मोटापे का शिकार थे। नौ साल तक पहुंचते-पहुंचते मोटापा और अधिक वजन करीब 3 गुना बढ़कर 14.6% हो गया, जबकि करीब 21.6% बच्चे अब भी कम वजन के या दुबले रहे। 5 साल तक के बच्चों में घट रहा कुपोषण - सरकारी डेटा सरकार द्वारा पोषण ट्रैकर के जरिए 7.7 करोड़ से ज्यादा बच्चों को ट्रैक किया जाता है। इसके मुताबिक बीते 3 वर्षों में कुपोषण की स्थिति में सुधार हुआ है। 0-5 वर्ष की आयु के 63 लाख बच्चों की ट्रैकिंग के आधार पर बौनापन, कम वजन के मामले घटे हैं। स्थिति मई 23 मई 26 बौनापन 38% 30% कम वजन 18% 12% कुपोषण 07% 03% (स्रोत- पोषण ट्रैकर) पोषण - भोजन की कमी नहीं, गुणवत्ता-प्रोसेस्ड फूड चुनौती सीएमसी वेल्लोर की बीना कोशी के मुताबिक, ‘देश में पोषण की चुनौती अब केवल भोजन की कमी नहीं रही। भोजन की गुणवत्ता, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, कम शारीरिक गतिविधि और गर्भावस्था में मां की सेहत भी चुनौती है।’ ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पांच साल से कम उम्र के करीब 30% बच्चे ठिगने हैं और 17.3% बच्चे लंबाई के अनुपात में कम वजन से प्रभावित हैं। ये एशिया के औसत से ज्यादा है।
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