40 हीरे, 3 महीने की तलाश और 131 कारीगर, जानिए गौरी को आमिर खान की दी हुई बेशकीमती रिंग की पूरी कहानी
Aamir Khan Gauri 40 Diamond Ring: आमिर खान इन दिनों अपनी तीसरी शादी को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं. एक्टर ने 5 जुलाई को गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से शादी की, जिसमें परिवार और चुनिंदा दोस्त ही शामिल हुए. शादी के बाद दोनों पहली बार पब्लिकली साथ भी नजर आए और तभी गौरी के हाथ में दिखी एक खास अंगूठी ने हर किसी का ध्यान खिंचा. बताया जा रहा है कि ये 40 हीरों से जड़ी एक कस्टम-डिजाइन लग्जरी रिंग है. अब हर और इसकी ही चर्चा हो रही है.
आमिर ने गौरी को दी बेशकीमती रिंग
मालूम हो कि आमिर खान ने बिना किसी ताम-झाम के गौरी स्प्रैट के साथ अपने मुंबई के पाली हिल वाले घर पर शादी की थी. इस खास मौके पर एक्टर ने अपनी पत्नी को खास 40 हीरों से जड़ी रिंग गिफ्ट की थी. जानकारी के मुताबिक, इस रिंग में लगे सभी 40 हीरों का चयन एक साथ नहीं किया गया. ज्वेलरी विशेषज्ञों ने लगभग तीन महीने तक अलग-अलग आकार, चमक, कट और गुणवत्ता वाले डायमंड की जांच की। इसके बाद ऐसे 40 हीरे चुने गए जो एक-दूसरे से पूरी तरह मेल खाते हों.
131 कारीगरों ने 256 घंटे की मेहनत
इस खास रिंग को तैयार करने में कुल 131 कारीगरों ने अलग-अलग चरणों में काम किया. किसी ने डिजाइन तैयार की, किसी ने धातु को आकार दिया, तो किसी ने हीरों की सेटिंग की जिम्मेदारी संभाली. हर स्टेप पर बारीकी से काम किया गया ताकि तैयार होने के बाद रिंग का हर हिस्सा परफेक्ट दिखाई दे।रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरी रिंग को बनाने में करीब 256 घंटे का समय लगा.
क्या है इस रिंग की खासियत?
इस रिंग की सबसे बड़ी खासियत इसका मेडागास्कर से मंगाया गया बेहद दुर्लभ नैचुरल रूबी है. आमतौर पर लग्जरी रिंग्स में सिर्फ महंगे हीरे ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, कट, चमक और सेटिंग भी काफी मायने रखती है. इसी वजह से इस रिंग को तैयार करने में लंबा समय लगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की कस्टम रिंग्स की कीमत सामान्य डायमंड रिंग्स की तुलना में कहीं अधिक होती है. इस रिंग की कीमत तो सामने नहीं आई है, लेकिन इसे बेशकीमती बताया जा रहा है.
ऑस्ट्रेलिया में बढ़ रहीं क्रॉनिक और मानसिक बीमारियां, एआईएचडब्ल्यू रिपोर्ट में चिंताजनक खुलासा
कैनबरा, 9 जूलाई (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया में दीर्घकालिक (क्रॉनिक)और मानसिक बीमारियां तेजी से लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर (एआईएसडब्ल्यू) की ऑस्ट्रेलिया हेल्थ रिपोर्ट 2026 में सामने आई है।
हर दो साल में जारी होने वाली इस रिपोर्ट में बताया गया कि देश में क्रॉनिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में ऑस्ट्रेलिया की 61 प्रतिशत आबादी यानी 1.54 करोड़ लोग कम से कम एक पुरानी बीमारी के साथ जीवन बिता रहे थे। वहीं 38 प्रतिशत लोग दो या उससे अधिक पुरानी बीमारियों से जूझ रहे थे।
एआईएसडब्ल्यू के मुताबिक, 2024 में ऑस्ट्रेलियाई लोगों ने पुरानी बीमारियों के कारण लगभग 49 लाख (4.9 मिलियन) स्वस्थ जीवन वर्ष गंवा दिए। यह देश में कुल डिजीज बर्डन (रोग भार) का 84 प्रतिशत हिस्सा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में बीमारी के बोझ के पांच सबसे बड़े कारण सभी क्रॉनिक बीमारियां थीं। इनमें डिमेंशिया पहली बार ऑस्ट्रेलिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया।
इससे पहले ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के जारी आंकड़ों में बताया गया था कि 2024 में देश में हुई कुल मौतों में 9.4 प्रतिशत मौतें डिमेंशिया के कारण हुईं, जबकि हृदय रोग से 8.7 प्रतिशत मौतें दर्ज की गईं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच डिमेंशिया से होने वाली मौतों में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में हृदय रोग से होने वाली मौतों में 18 प्रतिशत की कमी आई है। एआईएचडब्ल्यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोरान बोलेविच ने इसका प्रमुख कारण ऑस्ट्रेलिया की बुजुर्ग होती आबादी को बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में 16 से 85 वर्ष आयु वर्ग के 22 प्रतिशत लोगों ने बताया कि पिछले 12 महीनों में उन्हें किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा। वहीं, 16 से 24 वर्ष के युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की दर 2007 के 26 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 39 प्रतिशत हो गई।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन चुनौतियों के बावजूद ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य सेवाओं के कारण लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार जारी है। 2022-24 के दौरान महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा 85.1 वर्ष और पुरुषों की 81.1 वर्ष दर्ज की गई।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में कैंसर मरीजों की पांच साल तक जीवित रहने की दर भी लगातार बेहतर हुई है। यह 1987-1991 में 50 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2017-2021 के दौरान 72 प्रतिशत हो गई।
--आईएएनएस
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