देश की सुरक्षा से खिलवाड़, बीआरओ में फर्जी मजदूरों के नाम पर करोड़ों का घपला, सीबीआई ने कसा शिकंजा
CBI Action: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने देश में भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करते हुए दो बड़े मामलों में बेहद कड़ा रुख अपनाया है. पहली कार्रवाई देश की सीमाओं को सुरक्षित और सुगम बनाने वाले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में हुए बड़े घपले को लेकर है, जहां सीबीआई ने तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. वहीं दूसरी कार्रवाई आम नागरिकों और घर खरीदारों के सपनों के साथ खिलवाड़ करने वाले बिल्डरों तथा बैंक अफसरों के खिलाफ है, जिसमें बेंगलुरु में दो महत्वपूर्ण आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किए गए हैं. इन दोनों मामलों से स्पष्ट होता है कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों पर अब कानून का शिकंजा पूरी तरह कस चुका है.
सीमा सड़क संगठन में फर्जीवाड़े का खेल
लद्दाख जैसे संवेदनशील इलाके में बुनियादी ढांचे का निर्माण करने वाले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में फंड के गबन का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. सीबीआई ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए तीन लोगों को हिरासत में लिया है. पकड़े गए आरोपियों में लद्दाख में तैनात बीआरओ का एक सहायक अभियंता (सिविल) और कारगिल के दो श्रमिक आपूर्ति (लेबर सप्लाई) एजेंट शामिल हैं. जांच में यह बात सामने आई है कि यह सहायक अभियंता खाटसे-बटालिक सेक्टर का प्रभारी अधिकारी था और उसने पद का दुरुपयोग किया.
आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची. इन्होंने कागजों पर ऐसे मजदूरों के नाम दर्ज किए जो असल में थे ही नहीं. इन अस्तित्वहीन या फर्जी मजदूरों के नाम पर बकायदा सरकारी खजाने से वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान करवाया गया. इसके बाद लेबर एजेंटों ने इस फर्जी भुगतान की पूरी राशि को वापस घुमाकर सहायक अभियंता के निजी बैंक खाते में जमा करा दिया. इस तरह देश की सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के पैसे को निजी स्वार्थ के लिए हड़प लिया गया.
कई राज्यों में छापेमारी और कानूनी धाराएं
इस बड़े घोटाले की परतें खोलने के लिए सीबीआई ने पहले ही लद्दाख में बीआरओ की विभिन्न परियोजनाओं में फंड के दुरुपयोग से जुड़े चार अलग-अलग मामले दर्ज किए थे. जांच की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय एजेंसी ने 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 26 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया था. इस कार्रवाई को और मजबूत करते हुए हिमाचल प्रदेश में भी एक अतिरिक्त ठिकाने पर छापेमारी की गई, जहां से कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं. गिरफ्तार आरोपियों को जल्द ही लद्दाख की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा.
रक्षा मंत्रालय की शिकायतों पर दर्ज इन मामलों में आरोपियों के खिलाफ बेहद सख्त धाराएं लगाई गई हैं. इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोक सेवकों द्वारा आपराधिक कदाचार और रिश्वतखोरी के संगीन आरोप शामिल हैं. इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और फर्जी दस्तावेज तैयार करने यानी जालसाजी के तहत मामला चलाया जा रहा है.
होमबायर्स फ्रॉड केस में बिल्डरों पर गाज
वहीं एक अन्य मामले में भी सीबीआई को बड़ी सफलता मिली है. बेंगलुरु में घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी करने वाली बिल्डर कंपनियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की है. एजेंसी ने उनके निदेशकों और उनके साथ मिले हुए निजी बैंकों तथा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ 14वीं और 15वीं चार्जशीट दाखिल की है. यह पूरी कार्रवाई बेंगलुरु स्थित सीबीआई की विशेष अदालतों में की गई है.
जिन कंपनियों के खिलाफ यह आरोपपत्र दाखिल हुआ है, उनमें मैसर्स इथाका एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स एलजीसीएल अर्बन होम्स (इंडिया) एलएलपी शामिल हैं. इसके साथ ही एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के कुछ तत्कालीन अधिकारियों को भी नामजद किया गया है. इन सभी पर घर खरीदारों को गुमराह करने और धोखाधड़ी से आर्थिक लाभ कमाने का आरोप है.
निवेशकों के साथ धोखा और सीबीआई का संकल्प
सीबीआई की जांच में यह साफ हुआ है कि आरोपी बिल्डर कंपनियों के निदेशकों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर एक बड़ा जाल बुना था. इन्होंने घर खरीदारों और निवेशकों को झूठे वादे और भ्रामक दावे करके अपनी परियोजनाओं में पैसा लगाने के लिए उकसाया. इसके बाद बैंकों से मिलकर नियमों को ताक पर रखकर लोन मंजूर कराए गए और उस रकम का अवैध रूप से गबन कर लिया गया.
उच्चतम न्यायालय के सख्त निर्देशों के बाद सीबीआई इस तरह के कुल 34 मामलों की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसी अब तक देश की कई बड़ी नामी बिल्डर कंपनियों जैसे जेपी इन्फ्राटेक, रुद्र बिल्डवेल, ड्रीम प्रोकॉन और एवीजे डेवलपर्स के खिलाफ 13 चार्जशीट पहले ही दाखिल कर चुकी है. सीबीआई ने साफ किया है कि आम नागरिकों, विशेषकर अपना घर खरीदने की चाह रखने वाले मध्यमवर्ग के हितों की रक्षा के लिए वह पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी.
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