राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: इलाहाबाद HC को आय से अधिक संपत्ति मामले में सुनवाई टालने का निर्देश, जानें पूरा मामला
Rahul Gandhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह फिलहाल इस मामले में आगे की सुनवाई न करे। इसके साथ ही, अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी हाईकोर्ट के पिछले निर्देशों के तहत किसी भी तरह की रिपोर्ट दाखिल करने से रोक दिया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में कर्नाटक के निवासी एस. विग्नेश शिशिर (जिन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था) के अलावा सीबीआई और ईडी को भी नोटिस जारी किया है।
कपिल सिब्बल ने बताया 'विंच-हंट', उठाए सवाल
राहुल गांधी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इन कानूनी कार्रवाइयों का कड़ा विरोध करते हुए इसे पूरी तरह से निराधार बताया। सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि "यह कानून के बिल्कुल खिलाफ है और यह एक ऐसी बदले की कार्रवाई (विंच-हंट) है जिसे कानून मान्यता नहीं देता।"
उन्होंने याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर के लोकस स्टैंडी (अधिकार) पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी साख का खुलासा नहीं किया है। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि सीबीआई ने अब तक केवल शिकायत का सत्यापन किया था और यदि आरोप गंभीर थे, तो जांच एजेंसियों ने खुद स्वतंत्र कार्रवाई क्यों नहीं की।
जांच एजेंसियों और कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसियों की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि इस मामले में अब तक सीबीआई और ईडी की कोई भूमिका नहीं रही है। वहीं, पीठ ने भी जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने पूछा कि यदि आरोप इतने गंभीर थे तो एजेंसी अब तक निष्क्रिय क्यों रही, और क्या किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत मिलने पर सीबीआई को कार्रवाई के लिए किसी अदालत के निर्देश की जरूरत होती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई अदालत आदेश जारी करने का फैसला करती है, तो यह उम्मीद की जाती है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाए।
याचिकाकर्ता और हाईकोर्ट का पूर्व आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने वाले याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान ऑनलाइन पेश होकर राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि यह मामला अभी एफआईआर से पहले के चरण (प्री-एफआईआर स्टेज) में है और ऐसे चरण में आरोपी को सुने जाने का अधिकार नहीं होता है।
इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 20 जुलाई को सीबीआई के जवाब पर असंतोष जताया था और एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सीबीआई का हलफनामा उसके पिछले आदेश के अनुरूप नहीं है। साथ ही, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पूरी कार्यवाही को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे और अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब हाईकोर्ट की कार्यवाही फिलहाल स्थगित रहेगी, जबकि शीर्ष अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी।
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