चाणक्य नीति में कहा गया है कि शत्रु का शत्रु मित्र होता है और राष्ट्रहित के लिए बनाया गया मार्ग ही विजय का मार्ग होता है। भारत ने इसी नीति पर चलते हुए दुनिया के दो महाशक्तियों और एक नापाक मुल्क पाकिस्तान। यानी अमेरिका, चीन और पाकिस्तान को एक साथ चेकमेट कर दिया है। यह खबर सिर्फ एक रेल लाइन बिछाने की नहीं है बल्कि यह खबर है भारत द्वारा अपनी सीमाओं के बाहर एक नया साम्राज्य खड़ा करने की। दशकों तक जिस पाकिस्तान ने हमें लैंड डॉक देश महसूस कराने की कोशिश की थी। आज भारत ने उसी के सामने जाकर एक ऐसा गलियारा तैयार कर लिया है जो इस्लामाबाद की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। भारत ने 700 कि.मी. लंबे चाबहार जाहिदान रेलवे लिंक को फास्ट ट्रैक करने का आधिकारिक फैसला ले लिया है। यह प्रोजेक्ट साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरानी यात्रा के दौरान शुरू हुआ था। लेकिन फिर अमेरिका में ट्रंप प्रशासन आया। प्रतिबंधों की झड़ी लगी और भारत को कदम पीछे खींचने पड़े। लेकिन साल 2025-26 में जो कूटनीतिक बदलाव हुए उन्होंने भारत को एक सुनहरा मौका दे दिया।
आज जब ईरान और पश्चिम के बीच तनाव चरम पर है तब भी भारत ने अपनी 10 साल की ऑपरेशनल डील यानी चाबार पोर्ट के लिए साइन जो किया है उसे रेलिंग से जोड़ दिया और यह अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है। 1500 मिलियन डॉलर का यह प्रोजेक्ट केवल पटरी बिछाना नहीं बल्कि यह भारत की इंजीनियरिंग ताकत का जोरदार प्रदर्शन है। बात करें पाकिस्तान की, तो पाकिस्तान की पूरी विदेश नीति इस बात पर टिकी थी कि भारत को अगर पश्चिम यानी वेस्ट की तरफ जाना है तो हमारे दर से गुजरना होगा। चाहे वो अफगानिस्तान को मानवीय सहायता भेजना हो या मध्य एशिया से व्यापार करना हो। नापाक देश पाकिस्तान ने हमेशा भारत की गाड़ियों को रोका। टैक्स मांगे और आतंकवाद का सहारा भी लिया। लेकिन अब गेम पूरी तरह से पलट चुका है, बदल चुका है। चाबहार जाहिदान रेलवे लिंक सीधे भारत के मुंद्रा और कांडला पो से कनेक्ट रहेगा। यानी मुंबई से चला जहाज चाबहार उतरेगा और वहां से भारतीय रेल के जरिए सामान सीधा अफगानिस्तान के बॉर्डर जाहिदान तक पहुंचेगा। वहां से भारत जाहिदान जरा लिंग के जरिए अफगानिस्तान के अंदर घुसेगा।
अब पाकिस्तान बस तमाशा देखता रह जाएगा और भारत ने उसकी जियोग्राफिकल लोकेशन की अकड़ को मिट्टी में मिला दिया है और चीन ने पाकिस्तान में जो ग्वादर पोर्ट बनाया है उसका दावा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड हब बन जाएगा लेकिन ग्वादर की असलियत क्या है वो यह है कि वहां ना तो बिजली है और ना ही पानी है और ना ही स्थानीय लोगों का समर्थन। दूसरी तरफ भारत का चाबहार एक नेचुरल पोर्ट है। चीन का सीपेक यानी कि चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर अरबों डॉलर के कर्ज में डूबा हुआ है। भारत ने चाबहार रेल लिंक के जरिए एक वैकल्पिक और अधिक सुरक्षित रास्ता दे दिया है।
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एक तरफ पाकिस्तान है जहां पुलिस चौकियों पर गोलियां बरसाई जा रही है। जहां वर्दी वालों को अगवा किया जा रहा है और जहां की सरकार अपने ही पाले हुए आतंकियों से फंसी हुई है और ठीक उसी वक्त दूसरी तरफ भारत जहां तालिबान का सबसे ताकतवर मंत्री दिल्ली के रेड कारपेट पर कदम रख चुका है। एक तरफ बारूद की बदबू है तो दूसरी तरफ दोस्ती की महक। बलूचिस्तान की जियारत में आतंकियों ने पुलिस पोस्ट को कब्रिस्तान बना दिया है। नौ पुलिस वालों को उड़ा दिया है। अफरातफरी का माहौल है और पाकिस्तान के हुक्मरान डर के साए में जी रहे हैं। लेकिन इसी वक्त दिल्ली से एक ऐसी तस्वीर आती है जो पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करती है। जिस तालिबान को पाकिस्तान अपना प्रॉक्सी समझता था उसी तालिबान का सबसे ताकतवर मंत्री आज हिंदुस्तान की जमीन पर उतर चुका है।
पाकिस्तान में मातम है तो भारत में कूटनीति का उत्सव है। बलूचिस्तान रात के सन्नाटे में दर्जनों भारी हथियारों से लैस हमलावरों ने एक पुलिस पोस्ट को घेर लिया। यह कोई आम हमला नहीं था। यह एक सीधा युद्ध था। घंटों तक गोलियां चलती है। नतीजा नौ पुलिस अधिकारी मारे जाते हैं पाकिस्तान के। हमलावर इतने बेखौफ थे कि उन्होंने आठ जवानों को अगवा तक कर लिया। गौर करने वाली बात यह है कि यह हमला उस इलाके में हुआ जिसे पाकिस्तान सुरक्षित मानता था। बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएले और अन्य उग्रवादी गुटों ने अब सीधे राज्य की सत्ता को चुनौती देना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान की और पाकिस्तान की सेना जो खुद को दुनिया की बेहतरीन सेनाओं में से एक बताती है वो अपने ही पुलिस वालों को सुरक्षा देने में नाकाम रही। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसीन नकवी कैमरे पर आए लेकिन उनके चेहरे पर हार साफ दिख रही थी। मोहसीन नकवी ने तो बिना सबूत के भारत का नाम ले लिया। लेकिन दुनिया जानती है कि जब आप घर में सांप पालते हैं, आतंकी पालते हैं तो वो एक दिन आपको ही डसता है। पाकिस्तान ने दशकों तक आतंकी खेती की आज फसल काटने का वक्त आ गया है और वो घट भी रही है।
अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमारी अपने पूरे काफिले के साथ भारत की सरजमी पर पहुंचे। यह दौरा खास इसलिए है क्योंकि तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह किसी बड़े मंत्री का सबसे महत्वपूर्ण भारत दौरा है। भारत ने कभी बंदूक के दम पर अफगानिस्तान में घुसपैठ नहीं की। भारत ने वहां सड़क बनाई, स्कूल बनाए, अस्पताल बनाए और संसद बनाई। अब अफगानिस्तान में अकाल पड़ा है तो भारत ने हजारों टन गेहूं भेजा। जब वहां दवाइयों की कमी हुई तो भारत ने जीवन रक्षक दवाईएं भेजी।
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