Mathura: बांके बिहारी मंदिर की जमीन पर बनी अवैध मजार, हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद पूजा-पाठ नहीं कर पा रहे हिंदू
मथुरा जिले के शाहपुर गांव में लगभग 2 एकड़ जमीन, जो बांके बिहारी मंदिर की है, मंदिर का प्राचीन वहां चबूतरा आज भी मौजूद है. मंदिर औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ दी गई थी लेकिन उसका चबूतरा आज भी है. हिंदू समाज 6 वर्ष पहले तक यहां पूजा पाठ करता आ रहा था. साधु संत भी रहते थे. गौशाला भी थी मंदिर के इस भूभाग में एक अखाड़ा भी था और कुआं भी. लेकिन 2004 में तत्कालीन राज्य सरकार की पार्टी के ही एक नेता भोला कहां पठान ने गुपचुप तरीके से मंदिर के फर्जी कागज तैयार कर लिए. कागजों के आधार पर मंदिर परिसर के पूरे जमीन को कब्रिस्तान घोषित कर दिया गया.
ऐसे सामने आया पूरा मामला
मामला सामने तब आया, जब 2019 में मुस्लिम समाज ने इसकी घेराबंदी करने की कोशिश की. उन्होंने मंदिर के सबूत को जेसीबी से मिटाने की भी कोशिश की. बांके बिहारी के गर्भ गृह के चबूतरे पर जबरदस्ती मजार बना दिया. उस वक्त से ही दोनों समुदायों के बीच टेंशन शुरू हो गई थी. हालांकि, मुस्लिम समाज पूरी तरीके से जमीन पर कब्जा नहीं कर पाया क्योंकि कानूनी लड़ाई शुरू हो गई थी. वहीं, पुराने वक्त से लेकर अब तक सभी कागजों में जमीन ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के नाम पर ही दर्ज है फिर चाहे वह जमीन की खतौनी हो या फिर दूसरे रेवेन्यू रजिस्टर सब में मंदिर ही दर्ज है.
2019 से यहां पूजा पाठ नहीं कर पाया हिंदू समाज
मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तो 2023 में मंदिर के पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला आया. पुलिस रिपोर्ट में भी मंदिर और चबूतरे का जिक्र है किसी भी तरह के कब्रिस्तान या मजार का नहीं. आज पूरा परिसर जंगल में तब्दील हो चुका है और पीएसी रखवाली में तैनात है. हिंदू पक्ष के पास सभी कागजी सबूत है. 2019 के बाद से हिंदू समाज यहां पूजा पाठ नहीं कर पाया. तहसीलदार से लेकर कलेक्टर और कोर्ट सबके फैसला मंदिर के पक्ष में है लेकिन अब तक हिंदुओं को कब्जा नहीं मिल सका है. अवैध मजार को भी अब तक हटाया नहीं गया है.
वक्त बोर्ड ने भी नकारा मुस्लिम पक्ष का दावा
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यहां पहले साधु संत रहते थे. हर रोज पूजा पाठ होता था. यहां बाजार लगता था लेकिन अब कुछ भी नहीं है. यहां तक की वक्त बोर्ड ने भी लिखित में साफ-साफ कह दिया है कि उनके यहां कब्रिस्तान के तौर पर यह जमीन दर्ज नहीं है. तमाम सबूतों, गवाहों और फैसलों के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.
भारत-इंडोनेशिया का रिश्ता सभ्यताओं का है किसी एग्रीमेंट का नहीं, जकार्ता में बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में अपनापन और प्रेम मिला. पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति प्रोबोवो भारत के सच्चे दोस्त हैं. उन्होंने एयरपोर्ट पर कैबिनेट का आना यादगार रहा. भारतीय संगीत की यहां काफी लोकप्रियता है. लोगों को भारतीय संगीत बहुत पसंद आता है औऱ यहां के लोग इसे सुनते भी हैं.
भारत-इंडोनेशिया का रिश्ता सभ्यताओं का है
पीएम मोदी ने कहा कि दो देशों के बीच जब संबंध बनते हैं या साझेदारी होती है तो ये एग्रीमेंट या फिर एमओयू के जरिए बनती है. लेकिन भारत और इंडोनेशिया के बीच ये संबंध सभ्यता के जरिए बने हैं. समुद्र के जरिए बने हैं. हमारे पूर्वजों ने इस कनेक्टिविटी को जिया है. आज दुनिया की सप्लाई चेन भरोसे के अभाव में टूट रही है लेकिन भारत और इंडोनेशिया उस समय सप्लाई चेन का भरोसा जीता जब इस तरह की चर्चा भी नहीं होती थी.
The warmth and affection of the Indian diaspora in Indonesia are truly heartwarming. Speaking at a community programme in Jakarta.
— Narendra Modi (@narendramodi) July 7, 2026
https://t.co/HKnd0RPuEb
मुझे खुशी है कि आज भारत और इंडोनेशिया उसी भरोसे की पूंजी के साथ मिलकर एक नया फ्यूचर लिख रहा है. शानदार फ्यूचर के बहुत बड़े लाभार्थी यहां मौजूद लोग है. इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय है. सोशल मीडिया का जमाना है और इस जमाने में कॉलेब की चर्चा होती है. लेकिन भारत-इंडोनेशिया सदियों से कोलेब करता आया है.
पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच कोलेब जितना पुराना है उतना समृद्ध भी है. अतीत की ट्रेडिशन को हम रिवाइव कर रहे हैं. नालंदा यूनिवर्सिटी नए अवतर में सामने आई है. वहां इंडोनेशिया के भी अनेक स्टूडेंट्स एडमिशन लिया है. जो बताता है 21वीं सदी में अतीत की प्रेरणा से हम दोनों देश एक नए भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं.
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ट्रेड, ट्रेडिशन और टूरिज्म के जरिए एक दूसरे के साथ जुड़ रहे
भारत और इंडोनेशिया दिल से भी करीब है. भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप से इंडोनेशिया के आर्चे की दूरी करीब 150 किलोमीटर है. सोचिए भारत के एक द्वीप इंडोनेशिया भारतीय राज्यों से भी ज्यादा करीब है. इंडोनेशिया में आने वाले हर भारतीय को यहां अपनापन महसूस होता है. यही वजह है कि वर्षों से हमारे दोनों देश ट्रेड, ट्रेडिशन और टूरिज्म के जरिए एक दूसरे के साथ जुड़कर हमारे रिश्तों की लिगेसी को आगे बढ़ा रहे हैं.
भारत का फेवरिट फ्रेंड बना इंडोनेशिया
जब भारत नए ब्रह्ममोस बना रहा है, नए शिप बना रहा है, नए रूट्स तैयार कर रहा है. ऐसे समय में इंडोनेशिया हमारे लिए फेवरिट फ्रेंड बनकर हमारे साथ उपस्थित है. इंडोनेशिया हो या फिर भारत दोनों ही देश विकास के लिए अधीर हैं. हमारे पास न रुकने का मौका है न थमने का. इंडोनेशिया की प्रगती के बारे में कुछ भारतीयों ने जानकारी दी है. हिंदुस्तान से मैं भी आपके लिए भारत की प्रगति की अनेक गाथाएं लेकर आया हूं.
यहां मौजूद लोगों को भी भारत की उलब्धियां सुनने को मिलती हैं. भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया को ड्राइव करने में बड़ी भूमिका निभा रही है. जब दुनिया पर कोरोना का संकट आया तो भी भारत की अर्थव्यवस्था ठप नहीं पड़ी. वेस्ट एशिया का संकट चल रहा था तब भी भारत की इकोनॉमी थमी नहीं बल्कि पिछले वर्ष का लास्ट क्वाटर मार्च में खत्म होता है जब हमारी ग्रोथ रेट 7.7 फीसदी रही. ये गति और प्रगति ऐसे ही नहीं आई है. भारत ने एक के बाद एक रिफॉर्म किए. लगातार परफॉर्म किया. जिसका नतीजा सामने आया है और देश ट्रांसफॉर्म हो रहा है. भारत ने जो ग्रोथ हासिल की है वो 140 करोड़ लोगों के सपनों की ग्रोथ है.
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