जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रही जंग अब केवल मुठभेड़ों और त्वरित अभियानों तक सीमित नहीं रह गई है। यह एक लंबी, थकाऊ और धैर्य की परीक्षा लेने वाली लड़ाई में बदल चुकी है, जहां सुरक्षा बलों को हर कदम सोच समझकर रखना पड़ रहा है। दक्षिण कश्मीर के शोपियां से लेकर कुपवाड़ा और राजौरी पुंछ के घने जंगलों तक फैला मौजूदा सुरक्षा अभियान इस बदलती रणनीति और नए खतरे की साफ तस्वीर पेश कर रहा है।
हम आपको बता दें कि शोपियां जिले के मीमांदर इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के दो स्थानीय आतंकियों की तलाश चौथे दिन भी जारी है। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीमें इलाके में लगातार दबाव बनाए हुए हैं। तीन जुलाई को पहली बार इन आतंकियों की गतिविधियां निगरानी कैमरों में कैद हुई थीं, जिसके बाद पूरे इलाके को घेर लिया गया। घने बागों और पेड़ों से ढके इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने गांव दर गांव तलाशी अभियान चलाया है।
घेराबंदी में फंसे आतंकियों की पहचान लतीफ और जाकिर के रूप में हुई है। दोनों दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जाकिर वर्ष 2024 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है, जबकि लतीफ पिछले वर्ष संगठन में शामिल हुआ था। जब सुरक्षा बल उनके करीब पहुंचे तो आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों ओर से मुठभेड़ हुई।
सेना की विशेष आतंकवाद विरोधी इकाई विक्टर फोर्स ने इलाके में अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं। रात के समय आतंकियों के भागने की आशंका को देखते हुए पूरे क्षेत्र में रोशनी की व्यवस्था भी की गई है। लेकिन गर्मियों के मौसम में घने पेड़, झाड़ियां और पत्तियां आतंकियों को प्राकृतिक सुरक्षा कवच दे रही हैं। यही वजह है कि छोटे आतंकी समूह भी सुरक्षा बलों को कई दिनों तक उलझाए रखने में सफल हो रहे हैं।
दरअसल, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी बड़े आतंकी नेटवर्क और खुली घुसपैठ इस संघर्ष की पहचान हुआ करती थी, लेकिन अब छोटे, बिखरे और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित आतंकी समूह सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। शोपियां अभियान इसी नई रणनीति का हिस्सा दिखता है, जहां स्थानीय आतंकी न केवल सुरक्षा घेरे से बचने की कोशिश कर रहे हैं बल्कि भर्ती और मददगार नेटवर्क को भी जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं।
इसी बीच, उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सेना ने एक बड़े आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़ कर आतंकियों की साजिश को करारा झटका दिया है। केरन सेक्टर में विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए अभियान में सुरक्षा बलों ने एके श्रृंखला की पांच राइफल, नौ मैगजीन, एक हथगोला और भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद किया। यह बरामदगी इस बात का संकेत भी है कि सीमा पार से आतंकी ढांचे को सक्रिय रखने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
लेकिन जम्मू क्षेत्र के राजौरी पुंछ बेल्ट में चल रहा "ऑपरेशन शेरुवाली" इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा और सबसे गंभीर चेहरा बनकर उभरा है। यह अभियान अब चालीस से ज्यादा दिन पार कर चुका है। लेकिन राजौरी जिले के मंजाकोट सेक्टर के गम्भीर मुगलान और दोरीमल के घने जंगलों में सुरक्षा बल अब भी आतंकियों की तलाश में डटे हुए हैं। शुरुआती खुफिया सूचना के बाद शुरू हुआ यह अभियान अब एक लंबे घेरेबंदी युद्ध में बदल चुका है। सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और विशेष अभियान समूह लगातार जंगलों में दबाव बनाए हुए हैं। भारी गोलीबारी, अतिरिक्त तैनाती और चौतरफा घेराबंदी के बावजूद आतंकी अब तक पकड़ से बाहर हैं।
हम आपको बता दें कि राजौरी पुंछ क्षेत्र का भूगोल आतंकियों को सबसे बड़ा सहारा देता है। ऊंचे पहाड़, घने जंगल, संकरे रास्ते और कई संभावित भागने के मार्ग सुरक्षा बलों की तकनीकी बढ़त को सीमित कर देते हैं। यही वजह है कि अब सुरक्षा रणनीति में तेजी से हमले करने की बजाय लंबी घेराबंदी, आवाजाही रोकने, निगरानी मजबूत करने और आतंकी रसद को खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है। यह रणनीति साफ संकेत देती है कि सुरक्षा एजेंसियां अब केवल आतंकियों को मार गिराने की जल्दबाजी में नहीं हैं, बल्कि पूरे नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं। खासतौर पर राजौरी पुंछ बेल्ट में 2021 के बाद जिस तरह छोटे और टिकाऊ आतंकी समूह सक्रिय हुए हैं, उसने सुरक्षा तंत्र को नई सोच अपनाने पर मजबूर किया है।
इसी दौरान अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को लेकर भी बड़े पैमाने पर अभ्यास चल रहे हैं। आतंकी हमले, बंधक संकट, काफिला सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया जैसे हालातों पर लगातार अभ्यास किए जा रहे हैं। यह दिखाता है कि सुरक्षा बल एक साथ कई मोर्चों पर दबाव संभालने की क्षमता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर की मौजूदा तस्वीर यह साफ कर रही है कि आतंकवाद समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि उसने अपना चेहरा बदल लिया है। अब यह कम दिखाई देने वाला, ज्यादा बिखरा हुआ और ज्यादा धैर्य मांगने वाला संघर्ष बन चुका है।
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महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि 1 अगस्त 2026 से ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट (मूल निवासी प्रमाण पत्र) जमा करना होगा। यह कदम राज्य की ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्था को बेहतर और सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से बनाई गई एक नई नीति का हिस्सा है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने मंगलवार को विधानसभा में यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित नियमों को मंज़ूरी के लिए कानून और न्याय विभाग के पास भेज दिया गया है और ज़रूरी मंज़ूरी मिलने के बाद ये नियम लागू हो जाएंगे।
मंत्री ने बाइक टैक्सी सर्विस के लिए योजना बताई
सवाल-जवाब के समय, MLA दिलीप लांडे के एक सवाल का जवाब देते हुए सरनाइक ने बाइक टैक्सी सर्विस के लिए सरकार की योजनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि गैर-कानूनी ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि राज्य इस सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए कानूनी ढांचा तैयार कर रहा है। उनके अनुसार, इस पॉलिसी से यात्रियों की सुरक्षा बेहतर होने, सरकार के लिए रेवेन्यू पैदा होने और युवाओं के लिए रोजगार के मौके बनने की उम्मीद है। प्रस्तावित नियमों के तहत, बाइक टैक्सी ऑपरेटरों को हर दिन 5 रुपये की सरकारी फीस देनी होगी। इसके अलावा, हर ट्रिप से 2 रुपये ड्राइवरों के लिए बने वेलफेयर फंड में जमा किए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि जो लोग ट्रैफिक नियमों को तोड़ते हैं या बिना जरूरी परमिशन के ट्रांसपोर्ट सर्विस चलाते हैं, उनके खिलाफ सख्ती जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र बाइक टैक्सी रूल्स, 2025 में महिलाओं, छात्रों और नाबालिग यात्रियों की सुरक्षा बेहतर करने के उपाय शामिल हैं। प्रस्तावित नियमों के तहत, हर बाइक टैक्सी ड्राइवर के पास मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के तहत वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस और महाराष्ट्र मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 के तहत जारी पब्लिक सर्विस व्हीकल बैज होना जरूरी है। बैज पाने से पहले, ड्राइवरों को पुलिस से कैरेक्टर वेरिफिकेशन भी पूरा करना होगा।
निजी मोटरसाइकिलें यात्रियों को नहीं ले जा सकतीं
सरनाइक ने कहा कि बिना आधिकारिक अनुमति के निजी मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल यात्रियों को ले जाने के लिए नहीं किया जा सकता। हालांकि, राज्य परिवहन प्राधिकरण ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में सेवाओं के लिए एग्रीगेटर कंपनियों - उबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, रैपिडो ऑपरेटर रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और ओला चलाने वाली एएनआई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड - को 30 दिन के अस्थायी लाइसेंस जारी किए हैं। इन कंपनियों को एक महीने के भीतर सभी तय शर्तों को पूरा करना होगा। मंत्री ने अवैध बाइक टैक्सी संचालन के खिलाफ सरकार की कार्रवाई की जानकारी भी दी। अप्रैल 2025 और मार्च 2026 के बीच, परिवहन अधिकारियों ने वैध परमिट के बिना चल रहे 814 वाहनों की पहचान की। इनमें से 151 वाहनों को ज़ब्त किया गया, 14 एफआईआर दर्ज की गईं और 16.25 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।
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