मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूती से देश की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने में मिल रही मदद: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी से देश की आर्थिक रफ्तार को अप्रैल-मई के दौरान कम होने से रोकने में मदद मिली है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग का जीडीपी में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है और निर्यात और इन्वेंट्री बढ़ाने की वजह से इसने मुश्किल हालात में भी अच्छा प्रदर्शन किया है।
रिपोर्ट में कहा गया कि एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता के कारण एहतियात के तौर पर इन्वेंट्री बढ़ाई गई। इससे देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा हुआ। यह ट्रेंड खासकर कंज्यूमर गुड्स में देखा गया। वहीं, यूएस में कम टैरिफ की वजह से संभावित सेक्शन 301 टैरिफ से पहले गैर-तेल निर्यात को बढ़ाने का मौका मिला।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि 100 ग्रोथ इंडिकेटर्स का डेटाबेस अप्रैल-मई में सुस्त पड़ती रफ्तार की ओर इशारा करता है। साथ ही, बहुत मजबूत अल-नीनो और कमजोर मानसून की आशंका से खेती और ग्रामीण मांग पर जोखिम मंडरा रहा है।
बैंक ने बताया कि भारतीय कंपनियों को कम टैरिफ के चलते अमेरिका में सेक्शन 301 के संभावित उपायों से पहले गैर-तेल निर्यात बढ़ाने का मौका मिला, जिससे फैक्ट्री की गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
हालांकि, रिपोर्ट में खेती के अलावा ग्रोथ के लिए दो सकारात्मक कारकों पर जोर दिया गया, खासकर सर्विस सेक्टर में, जो जीडीपी का 55 प्रतिशत हिस्सा है।
तेल की कीमतों का युद्ध से पहले के स्तर पर वापस आना व्यापार और परिवहन क्षेत्र को बढ़ावा दे सकता है, जो जीडीपी का लगभग 15 प्रतिशत है। साथ ही, एफएक्स पैकेज की वजह से आसान फाइनेंशियल स्थितियों से फाइनेंशियल सेक्टर को गति मिल सकती है, जो जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में बताया गया कि जीडीपी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला कृषि क्षेत्र मुश्किलों का सामना कर रहा है, क्योंकि तापमान सामान्य से अधिक है, बारिश सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम हुई है और जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल के मुकाबले कम है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ग्रामीण मांग में पहले ही दबाव के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में युवाओं की बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। ग्रामीण इलाकों में दो-पहिया वाहनों की बिक्री और बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी धीमी हुई है, और जून में घरेलू जीएसटी कलेक्शन में भी कमी आई है।
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भारत का 'क्रिटिकल मिनरल मिशन' तेज: 2 साल में 35 देशों से साझेदारी और 11 देशों से बातचीत जारी, रेयर अर्थ और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन मजबूत करने पर फोकस
नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। भारत ने बीते 24 महीनों में रेयर अर्थ, क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के 35 देशों को एक व्यापक रणनीतिक नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया है। इनमें 24 देशों के साथ विभिन्न समझौते और साझेदारियां हो चुकी हैं, जबकि 11 देशों के साथ बातचीत जारी है। इसका उद्देश्य देश की औद्योगिक जरूरतों, ऊर्जा सुरक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), बैटरी, रक्षा, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी खनिजों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सरकार द्वारा शेयर किए गए एक ग्राफिक मैप के अनुसार, भारत ने उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक अपनी साझेदारी नेटवर्क विकसित किया है। इस रणनीति का उद्देश्य केवल खनिज आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि खोज, खनन, प्रोसेसिंग, तकनीक, निवेश और सप्लाई चेन को भी मजबूत बनाना है।
भारत ने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, अर्जेंटीना, डीआर कांगो, घाना, नामीबिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल, वियतनाम, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे, मलावी, जापान और रूस के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग स्थापित किया है।
इन साझेदारियों में क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ, सेमीकंडक्टर सहयोग, लिथियम, कोबाल्ट, कॉपर, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, तकनीकी सहयोग और खनिज संसाधनों के विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
ग्राफिक मैप के मुताबिक, भारत अभी चिली, पेरू, जाम्बिया, बोलीविया, कजाकिस्तान, मंगोलिया, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान, म्यांमार और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ भी विभिन्न समझौतों पर बातचीत कर रहा है, जिनमें खास तौर पर लिथियम, कॉपर, रेयर अर्थ और अन्य रणनीतिक खनिजों पर सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
भारत की यह रणनीति केवल खनिज संसाधनों तक सीमित नहीं है। ग्राफिक में स्पष्ट रूप से सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण को भी प्राथमिकता दी गई है। जापान, नीदरलैंड, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों के साथ सहयोग भारत की चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी भूमिका मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, कॉपर और रेयर अर्थ एलिमेंट्स इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी स्टोरेज, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, रक्षा उपकरण और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में विभिन्न देशों के साथ भारत की साझेदारी भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती दे सकती है।
ग्राफिक मैप से यह भी संकेत मिलता है कि भारत की रणनीति केवल खनिज खरीदने तक सीमित नहीं है। सरकार संयुक्त निवेश, खनिज खोज, प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सेमीकंडक्टर सहयोग और दीर्घकालिक सप्लाई चेन तैयार करने पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है, जिससे भविष्य में वैश्विक आपूर्ति संकट का असर कम किया जा सके।
--आईएएनएस
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