ROE निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी, जानिए शेयर बाजार में इसका क्या है महत्व?
Stock Market में निवेश करते समय कई नए निवेशक केवल कंपनी के शेयर की कीमत देखकर ही निवेश कर देते हैं. ऐसे में भारी नुकसान होने की संभावना रहती है. एक समझदार निवेशक सिर्फ कीमत देखकर नहीं बल्कि कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का विश्लेषण करने के बाद ही निवेश करता है. ऐसे में अगर आपको भी शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले जानकारी चाहिए तो इसके लिए कई फाइनेंशियल रेश्यो का इस्तेमाल किया जाता है जिनमें से ROE (रिटर्न ऑन इक्विटी) को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.
ROE (Return on Equity) क्या होता है?
ROE (Return on Equity) एक फाइनेंशियल रेश्यो है जो यह पता लगाने में मदद करता है कि कोई कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स की इक्विटी पर कितना प्रॉफिट कमा रही है. आसान शब्दों में कहें तो ROE से आप आसानी से समझ सकते हैं कि कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स द्वारा लगाई गई पूंजी का इस्तेमाल करके कितना प्रॉफिट कमा रही है. इसलिए ज्यादा ROE का मतलब आम तौर पर यह होता है कि कंपनी अपनी पूंजी का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर रही है. हालांकि अलग-अलग सेक्टर में ROE अलग-अलग हो सकता है लेकिन 15% या उससे ज्यादा ROE को अच्छा माना जाता है.
ROE कैसे निकाला जाता है?
ROE कैलकुलेट करने का फॉर्मूला है: ROE = (Net Profit ÷ शेयरहोल्डर्स की इक्विटी) × 100.
इसे एक उदाहरण से समझते हैं मान लीजिए कि किसी कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹50 करोड़ है और शेयरहोल्डर्स की इक्विटी ₹250 करोड़ है तो उसका ROE होगा (50 ÷ 250) × 100 = 20%. इसका मतलब है कि शेयरहोल्डर्स द्वारा निवेश किए गए हर ₹100 पर कंपनी ने ₹20 का प्रॉफिट कमाया.
ROE क्यों महत्वपूर्ण है?
ROE से आपको किसी कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता का पता चलता है. यह साफ तौर पर दिखाता है कि कंपनी निवेशकों की पूंजी का कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल कर रही है और इससे अलग-अलग कंपनियों की तुलना करना आसान हो जाता है. जो कंपनियां लगातार मजबूत ROE बनाए रखती हैं उनका मैनेजमेंट आम तौर पर बहुत अच्छा होता है और वे बेहतर परफॉर्मेंस देती हैं. हालांकि, ROE के साथ-साथ आपको P/E रेश्यो, EPS, डेट-टू-इक्विटी रेश्यो, रेवेन्यू ग्रोथ और कैश फ्लो जैसे मेट्रिक्स के साथ-साथ कंपनी के बिजनेस मॉडल की भी जांच करनी चाहिए.
कितना ROE अच्छा माना जाता है?
ROE के कई फायदे हैं जैसे कि कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता को समझना और यह देखना कि शेयरहोल्डर्स की पूंजी का कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल हो रहा है. इससे मजबूत कंपनियों की पहचान करने और फंडामेंटल एनालिसिस को आसान बनाने में मदद मिलती है. हालांकि ROE का आकलन करते समय केवल एक साल के आंकड़े को नहीं देखना चाहिए, बल्कि कई सालों के ट्रैक रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए, कंपनी की तुलना उसी इंडस्ट्री की दूसरी कंपनियों से भी की जानी चाहिए, अगर ROE बहुत ज्यादा है तो यह देखना जरूरी है कि कहीं ऐसा बहुत ज्यादा कर्ज की वजह से तो नहीं हो रहा है. आखिर में यह एनालिसिस दूसरे फाइनेंशियल रेश्यो के साथ मिलकर किया जाना चाहिए.
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
ईसीएलजीएस 5.0 के तहत 4.11 लाख से अधिक गारंटी जारी, 1.55 लाख करोड़ रुपए का ऋण हुआ स्वीकृत: सरकार
नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) 5.0 के तहत लॉन्च होने के बाद से अब तक 4,11,497 गारंटी जारी की जा चुकी हैं, और इसके तहत कुल 1,55,229 करोड़ रुपए की गारंटी दी गई है, जो यह दर्शाता है कि बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली ने इस योजना को तेजी से अपनाया है।
सरकार के अनुसार, 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई यह योजना पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित कारोबारों को तेजी से और बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
यह योजना बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए जोखिम को कम करने का काम करती है, ताकि वे पात्र उधारकर्ताओं को अतिरिक्त ऋण उपलब्ध करा सकें। इससे कंपनियों को नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) से जुड़ी समस्याओं से उबरने और अपने कारोबार को सुचारू रूप से जारी रखने में मदद मिलती है।
वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि योजना के तहत एमएसएमई को दिए जाने वाले अतिरिक्त ऋण पर 100 प्रतिशत गारंटी और अन्य कारोबारी वर्गों के लिए 90 प्रतिशत गारंटी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वित्तीय संस्थानों का भरोसा बढ़ा है और जरूरतमंद क्षेत्रों तक तेजी से ऋण पहुंचाना संभव हुआ है।
मंत्रालय ने कहा कि ईसीएलजीएस 5.0 के शुरुआती नतीजे यह साबित करते हैं कि सरकार एक मजबूत, त्वरित और भरोसेमंद ऋण व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे इस योजना का दायरा बढ़ेगा और अधिक लोगों तक इसकी पहुंच बनेगी, यह विशेष रूप से एमएसएमई और उद्यमियों को बाहरी चुनौतियों के दौरान आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार के मुताबिक, इस योजना का सबसे बड़ा लाभ छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को मिला है। जारी की गई कुल गारंटियों में से करीब 98 प्रतिशत संख्या के हिसाब से एमएसएमई को दी गई हैं, जबकि कुल गारंटी राशि का 82 प्रतिशत भी इसी क्षेत्र के हिस्से में आया है।
योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र कारोबारियों तक पहुंचाने के लिए वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने देश भर में व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है।
पहला चरण नौ स्थानों पर पूरा किया जा चुका है। यह अभियान स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) के माध्यम से चलाया गया, जिसमें नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी), पीएसबी अलायंस, विभिन्न बैंक, उद्योग संगठनों और उद्यमियों ने भाग लिया।
वर्तमान में अभियान का दूसरा चरण चल रहा है, जिसके तहत 10 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें से चार स्थानों पर कार्यक्रम पूरे हो चुके हैं।
सरकार का कहना है कि इन जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य पात्र उधारकर्ताओं को योजना की जानकारी देना और सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयार करना है, ताकि जरूरतमंद कारोबारियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।
--आईएएनएस
डीबीपी
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