मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि एयरलाइन ग्रुप द्वारा पिछले हफ़्ते 100% टेस्टिंग प्रोग्राम की घोषणा के बाद, लगभग 350 पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग की गई, जिसमें दो एयर इंडिया पायलट साइकोएक्टिव पदार्थों (नशीले पदार्थों) के लिए 'नॉन-नेगेटिव' पाए गए। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने फुकेत से दिल्ली आने वाली एयर इंडिया की एक उड़ान से जुड़ी घटना के बाद अपने सभी पायलटों के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों की अनिवार्य जांच शुरू की थी। उड़ान के कमांडर की शुरुआती जांच और बाद में हुई पुष्टि वाली जांच, दोनों में ही मारिजुआना का टेस्ट पॉजिटिव आया था।
जानकारों के मुताबिक, 'नॉन-पॉजिटिव' (यानी पॉजिटिव नहीं) न आने वाले ये दो नए मामले उस स्क्रीनिंग प्रोग्राम के तहत सामने आए हैं जो पूरे ग्रुप में चल रहा है। स्क्रीनिंग में 'नॉन-पॉजिटिव' नतीजा आने का मतलब यह नहीं है कि टेस्ट पक्का पॉजिटिव ही है; लागू एविएशन नियमों के तहत आगे और जांच और मूल्यांकन की ज़रूरत हो सकती है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास कुल मिलाकर लगभग 5,000 पायलट हैं।
एयर इंडिया ने 13 अगस्त को पूरी स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू की। एयर इंडिया में फ़्लाइट ऑपरेशन्स के हेड मनीष उप्पल ने पायलटों को बताया था कि कंपनी मौजूदा नियमों के तहत मनाही वाली चीज़ों और दवाओं के लिए उनकी जाँच करेगी। एयरलाइन का बढ़ा हुआ टेस्टिंग प्रोग्राम, हर साल फ़्लाइट क्रू के कम से कम 10 प्रतिशत सदस्यों की साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए रैंडम स्क्रीनिंग की मौजूदा कानूनी ज़रूरत से कहीं ज़्यादा है। एयर इंडिया ने कहा कि अपने सभी पायलटों की स्क्रीनिंग का फ़ैसला सुरक्षा मानकों को मज़बूत करने और यात्रियों व अन्य संबंधित लोगों को भरोसा दिलाने के मकसद से लिया गया था।
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