Satvik Solar Odisha के गोपालपुर में स्थापित करेगा 3.6 GW का सौर सेल संयंत्र
सात्विक सोलर इंडस्ट्रीज ने ओडिशा के गोपालपुर में 3.6 गीगावाट क्षमता की सौर सेल विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए औद्योगिक प्रोत्साहन एवं निवेश निगम ओडिशा लिमिटेड (आईपीआईसीओएल) के साथ प्रारंभिक समझौता किया है। कंपनी ने सोमवार को बयान में कहा कि इस परियोजना से रोजगार के अवसर उत्पन्न होने और क्षेत्र में व्यापक औद्योगिक परिवेश के विकास को समर्थन मिलने की भी उम्मीद है। सात्विक ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रशांत माथुर ने कहा, ‘‘ ओडिशा सात्विक के लिए केवल विनिर्माण क्षेत्र में एक पड़ाव नहीं है, बल्कि यह हमारी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
हमारी 2.4 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1000 मेगावाट) की सेल एवं चार गीगावाट की मॉड्यूल विनिर्माण लाइनें उत्पादन की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में हम बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता विकसित करने, एकीकरण मजबूत करने और वृद्धि के अगले चरण के लिए मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहे हैं।’’ नई इकाई गोपालपुर में सात्विक सोलर के व्यापक विनिर्माण विस्तार का हिस्सा होगी। कंपनी वहां पहले से ही प्रथम चरण की एकीकृत विनिर्माण इकाई स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
विकसित भारत के लिए बैंकिंग क्षेत्र का कायाकल्प, Finance Minister Nirmala Sitharaman जल्द गठित करेंगी High-Level Committee
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार जल्द ही ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी। वित्त मंत्री ने 2026-27 के बजट में ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करना और इसे भारत की वृद्धि के अगले चरण के अनुरूप बनाना है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित दो दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्क्लेव’ को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, ‘‘ हमें उम्मीद है कि बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन की घोषणा जल्द होगी... समिति की घोषणा जल्द की जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि समिति सरकार को अपने विचार और सिफारिशें देगी। सीतारमण ने एक फरवरी, 2026 को अपने बजट भाषण में कहा था, ‘‘मैं ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव करती हूं, ताकि क्षेत्र की व्यापक समीक्षा की जा सके और इसे भारत की वृद्धि के अगले चरण के अनुरूप बनाया जा सके। साथ ही वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेश और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
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