भारत-जापान के बीच हुई पहली रक्षा सह-विकास डील, अब भारत में बनेंगे यूनिकॉर्न नौसैनिक कम्युनिकेशन मास्ट
नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में संयुक्त रूप से उपकरण विकसित करने के लिए अपना पहला द्विपक्षीय समझौता किया है, जिसे दोनों देशों के बीच तेजी से मजबूत हो रही रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के तहत पहला संयुक्त प्रोजेक्ट यूनिकॉर्न (यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना) शिपबोर्न कम्युनिकेशन मास्ट के विकास और लाइसेंस प्राप्त उत्पादन पर केंद्रित होगा। यह एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड मास्ट सिस्टम है, जिसे जापान की एनईसी कॉर्पोरेशन ने विकसित किया है।
इस समझौते के तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) जापानी साझेदारों के सहयोग से इस सिस्टम का निर्माण भारत में करेगी। जापान इस परियोजना के लिए डिजाइन और मुख्य तकनीक उपलब्ध कराएगा, जबकि केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया पहल के तहत भारत सिस्टम इंटीग्रेशन, स्थानीयकरण और उत्पादन का कार्य करेगा।
हालांकि यूनिकॉर्न सिस्टम मूल रूप से एनईसी ने विकसित किया है, लेकिन भारत इसमें अपने स्वदेशी सेंसर और एंटीना भी जोड़ेगा, ताकि इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात किया जा सके। भविष्य में यह इंटीग्रेटेड मास्ट भारतीय नौसेना के मौजूदा संचार और सेंसर मास्ट सिस्टम की जगह लेगा।
भारत पिछले कई वर्षों से इस तकनीक को हासिल करने में रुचि दिखा रहा था। नवंबर 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत भारत को यूनिकॉर्न मल्टी-फंक्शनल मास्ट के निर्यात का समझौता हुआ था। उसी समझौते ने अब इस संयुक्त विकास परियोजना का रास्ता तैयार किया है।
यूनिकॉर्न, जिसे नोरा-50 के नाम से भी जाना जाता है, को एनईसी कॉर्पोरेशन, साम्पा कोग्यो के.के. और द योकोहामा रबर कंपनी लिमिटेड ने मिलकर जापान के मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स के लिए विकसित किया था।
यह एक इंटीग्रेटेड मास्ट सिस्टम है, जिसमें जहाज पर अलग-अलग लगे कई संचार, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़े एंटीना को एक ही संरचना में समाहित किया गया है, जिससे जहाज के ऊपरी हिस्से पर लगे बाहरी एंटीना की संख्या कम हो जाती है।
इस मास्ट में ओम्नीडायरेक्शनल सर्विलांस रडार एंटीना, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ईएसएम) एंटीना, वाई-फाई और लिंक-16 एंटीना, यूएचएफ ट्रांसमिट और रिसीव एंटीना, आईडेंटिफिकेशन फ्रेंड-ऑर-फो (आईएफएफ) सिस्टम, वीएचएफ/यूएचएफ कम्युनिकेशन एंटीना, टैक्टिकल नेविगेशन सिस्टम और लाइटनिंग कंडक्टर जैसी कई आधुनिक प्रणालियां शामिल हैं।
इस इंटीग्रेटेड डिजाइन से जहाज पर जगह का बेहतर उपयोग होता है, रखरखाव (मेंटेनेंस) आसान हो जाता है और जहाज का रडार क्रॉस सेक्शन भी कम होता है। इससे युद्धपोत की स्टील्थ क्षमता बढ़ती है और दुश्मन के लिए उसे रडार पर पहचानना अधिक कठिन हो जाता है।
यूनिकॉर्न सिस्टम का विकास 2015-16 के दौरान किया गया था, जबकि इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन 2018 में शुरू हुआ। इसे पहली बार 2019 में जापान के मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स पर लगाया गया था।
--आईएएनएस
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'शीशमहल' का बदलेगा स्वरूप: अब नहीं रहेगा मुख्यमंत्री आवास, बनेगा भव्य स्टेट गेस्ट हाउस और सांस्कृतिक केंद्र
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के 6-फ्लैगस्टाफ रोड स्थित आधिकारिक आवास, जिसे राजनीतिक गलियारों में अक्सर 'शीशमहल' के नाम से भी संबोधित किया जाता है, अब एक नए रूप में दिखाई देगा. दिल्ली सरकार ने इस परिसर को मुख्यमंत्री आवास के बजाय एक आधुनिक स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है.
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य राजधानी में आने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशिष्ट मेहमानों के लिए एक विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही यह परिसर सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा.
अब वीवीआईपी मेहमानों की होगी मेजबानी
दिल्ली देश की राजधानी होने के बावजूद लंबे समय से एक समर्पित और अत्याधुनिक स्टेट गेस्ट हाउस की कमी महसूस कर रही थी. अब सरकार इसी कमी को दूर करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है.
योजना के अनुसार, इस परिसर में देश-विदेश से आने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडलों, राजनयिकों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों को ठहराया जाएगा. इससे अलग-अलग स्थानों पर आवास की व्यवस्था करने की आवश्यकता कम होगी और सरकारी कार्यक्रमों का संचालन भी अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगा.
सांस्कृतिक गतिविधियों का बनेगा नया केंद्र
सरकार केवल इसे अतिथि गृह तक सीमित नहीं रखना चाहती. प्रस्तावित योजना के तहत परिसर में एक आधुनिक बहुउद्देशीय सभागार (मल्टीपर्पज ऑडिटोरियम) और अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
यहां कला प्रदर्शनियां, संगीत और नृत्य कार्यक्रम, साहित्यिक गोष्ठियां, सांस्कृतिक संवाद, सरकारी समारोह और विभिन्न सार्वजनिक आयोजन आयोजित किए जा सकेंगे. सरकार का मानना है कि इससे दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी और राजधानी में उच्च स्तरीय सांस्कृतिक आयोजनों के लिए एक नया मंच तैयार होगा.
भवन की मूल संरचना रहेगी सुरक्षित
इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि भवन में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ या संरचनात्मक बदलाव नहीं किए जाएंगे. सरकार का उद्देश्य मौजूदा भवन की मूल वास्तुकला और स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उसे नई जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है.
यानी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी, लेकिन इमारत की मूल संरचना को यथासंभव उसी रूप में बनाए रखा जाएगा. इससे परियोजना को कम समय में पूरा करने और भवन की मौजूदा विशेषताओं को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी.
क्या आम लोग भी जा सकेंगे?
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम नागरिक इस परिसर को अंदर से देख पाएंगे?
सरकार की योजना के अनुसार, चूंकि यह एक हाई-सिक्योरिटी स्टेट गेस्ट हाउस होगा, इसलिए इसके आवासीय और वीवीआईपी हिस्सों में आम लोगों की एंट्री नहीं होगी. सुरक्षा कारणों से इन क्षेत्रों में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश मिलेगा.
हालांकि, परिसर के जिस हिस्से को सांस्कृतिक केंद्र और ऑडिटोरियम के रूप में विकसित किया जाएगा, वहां आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों, कला प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक उत्सवों और साहित्यिक आयोजनों के दौरान आम नागरिकों को प्रवेश दिया जा सकेगा. यानी विशेष आयोजनों के अवसर पर लोग इस परिसर का एक हिस्सा देख सकेंगे.
राजधानी को मिलेगी नई पहचान
सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल एक भवन के उपयोग में बदलाव नहीं है, बल्कि दिल्ली को प्रशासनिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के स्वागत के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, वहीं दूसरी ओर राजधानी को एक नया सांस्कृतिक मंच भी मिलेगा.
6-फ्लैगस्टाफ रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री आवास का स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर में रूपांतरण दिल्ली सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है. इससे राजधानी को पहली बार एक समर्पित और आधुनिक अतिथि गृह मिलने की संभावना है.
साथ ही, सांस्कृतिक आयोजनों के लिए विकसित होने वाला नया केंद्र कला, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभा सकता है. हालांकि, परिसर का वीवीआईपी हिस्सा आम लोगों के लिए बंद रहेगा, लेकिन सार्वजनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान नागरिकों को इसमें प्रवेश का अवसर मिल सकेगा.
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