दुनिया इस वक्त तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी महसूस कर रही है। सोमवार (6 जुलाई, 2026) को दक्षिण प्रशांत महासागर (South Pacific Ocean) के अशांत पानी को चीरते हुए चीन की नौसेना ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों और महाशक्तियों के होश उड़ा दिए हैं। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपनी अत्याधुनिक परमाणु संचालित पनडुब्बी (Nuclear-Powered Submarine) से लंबी दूरी तक प्रहार करने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का एक सीक्रेट और बेहद खतरनाक परीक्षण किया है। सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ (Xinhua) के हवाले से आई इस खबर ने अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक, पूरे ग्लोबल डिफेंस कॉरिडोर में खलबली मचा दी है।
दोपहर 12:01 बजे का वो मिनट, जब दहल उठा समंदर
चिनियाँ मीडिया के मुताबिक, यह सनसनीखेज प्रक्षेपण सोमवार दोपहर ठीक 12 बजकर 01 मिनट पर किया गया।
डमी वॉरहेड से लैस: हालांकि राहत की बात यह रही कि यह मिसाइल एक 'डमी' (नकली/प्रायोगिक) हथियार से लैस थी, लेकिन इसके जरिए चीन ने अपनी न्यूक्लियर सबमरीन की मारक क्षमता और 'सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी' (परमाणु हमले के बाद जवाबी हमला करने की क्षमता) का जो प्रदर्शन किया है, वह सीधा वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों को खुली चुनौती है।
रणनीतिक टाइमिंग: यह परीक्षण ऐसे समय में किया गया है जब इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में पहले से ही भारी सैन्य तनाव बना हुआ है। समंदर के नीचे से दागी गई इस मिसाइल ने यह साबित कर दिया है कि ड्रैगन अब सीधे अमेरिकी मुख्य भूमि या उसके किसी भी सहयोगी देश को अपनी पनडुब्बियों के जरिए निशाना बना सकता है।
"बस कुछ घंटे पहले बताया और दाग दी मिसाइल" – भड़का न्यूज़ीलैंड
इस परीक्षण के बाद दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में स्थित देशों में भारी गुस्सा और डर का माहौल है। सबसे तीखी प्रतिक्रिया न्यूज़ीलैंड की तरफ से आई है। न्यूज़ीलैंड सरकार ने पुष्टि की है कि उसे इस नियोजित प्रक्षेपण की जानकारी मिसाइल दागे जाने से महज कुछ घंटे पहले दी गई थी।
न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने समाचार एजेंसी 'द एसोसिएटेड प्रेस' (AP) से बेहद तल्ख लहजे में कहा:
"ऐसा प्रतीत होता है कि इस तरह की आक्रामक सैन्य गतिविधियों को लेकर लंबे समय से हमारी ओर से जताई जा रही गंभीर चिंताओं के बावजूद, चीन ने हमें आधिकारिक सूचना देने के कुछ ही घंटों के भीतर इस घातक परीक्षण को अंजाम दे दिया। यह क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा है।"
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूज़ीलैंड जैसे देश को महज औपचारिकता के लिए कुछ घंटे पहले सूचना देना चीन की हेकड़ी और उसकी दादागिरी को दर्शाता है।
क्यों हिला देने वाला है पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का यह टेस्ट?
सैन्य विज्ञान की भाषा में, जमीन से मिसाइल दागने की तुलना में समंदर के नीचे छिपी परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) दागना कई गुना ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
पकड़े जाना नामुमकिन: सैटेलाइट जमीन पर मौजूद मिसाइल साइलो (Silos) पर नजर रख सकते हैं, लेकिन गहरे समंदर में तैरती न्यूक्लियर सबमरीन का पता लगाना लगभग नामुमकिन होता है।
नो-वार्निंग अटैक: चीन की पनडुब्बियां चुपचाप दुश्मन देश के तट के करीब पहुंचकर मिसाइल दाग सकती हैं, जिससे शिकार देश को संभलने या अपनी एयर डिफेंस प्रणाली (जैसे अमेरिका का थाड या पैट्रियट) को एक्टिव करने का मौका ही नहीं मिलता।
महाशक्तियों के बीच छिड़ेगा नया शीत युद्ध?
इस परीक्षण के बाद पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) और ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बलों में आपातकालीन बैठकें शुरू हो गई हैं। दक्षिण प्रशांत महासागर को अब तक चीन के सीधे सैन्य प्रभाव से दूर माना जाता था, लेकिन इस टेस्ट ने यह साफ कर दिया है कि ड्रैगन अब अमेरिका के बैकयार्ड (पिछले हिस्से) में घुसकर अपनी परमाणु ताकत की नुमाइश कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया का सैन्य गुट 'ऑकस' (AUKUS) प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती को और ज्यादा आक्रामक कर देगा, जिससे आने वाले दिनों में समंदर के भीतर एक भयानक और अंतहीन 'न्यूक्लियर आर्म्स रेस' (परमाणु हथियारों की होड़) शुरू होना तय है।
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ईरान के दिव्यांगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई के अंतिम संस्कार में पहुंचे पूर्व रूसी राष्ट्रपति मेदवदेव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने होर्मुज स्टेट को ईरान का थर्मोन्यूक्लियर हथियार करार दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने इस युद्ध में होर्मुज स्टेट का जिस तरीके से उपयोग किया वह एक तरह से रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन था। उन्होंने कहा कि ईरान ने इस युद्ध में एक ऐसा हथियार खोज लिया है जो किसी भी तरह से परमाणु हथियार से कम नहीं है। खाममेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद अपने व्यक्तित्वमें मेदवेदेव ने ईरान के लड़ने की क्षमता की तारीफ भी की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने हॉर्मोस पर अपना नियंत्रण दिखाकर साबित किया है कि वह इस क्षेत्र की कितनी बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा, युद्ध के दौरान ईरान ने जहाजों की आवाजाही को रोक कर निश्चित रूप से अपनी रणनीतिक शक्ति दिखाई है।
अब दुनिया में चर्चा है और समझौते इस बात पर हो रहे हैं कि ईरान भविष्य में यहां पर क्या करेगा और होर्मुज कैसे संचालित होगा। होर्मुज स्टेट पर नियंत्रण परमाणु हथियार जैसा। पूर्व रूसिया राष्ट्रपति ने होर्मुज स्टेट पर ईरान के कब्जे की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा इस जल क्षेत्र पर ईरान के कब्जे से उसे एक परमाणु हथियार से भी बड़ी शक्ति मिल गई है। उन्होंने कहा मेरा मानना है कि ईरान के पास अब केवल परमाणु हथियार ही नहीं बल्कि थर्मोनक्लियर हथियार भी है। वह हथियार है हॉर्मोनस स्टेट। किसी भी वैश्विक संघर्ष की स्थिति में इसका उपयोग किया जा सकता है। वहीं आपको बता दें कि अमेरिका दशकों से ईरान को लगातार इस बात की चेतावनी देता रहा है कि वह परमाणु हथियार ना बनाएं। ईरान भी इस मुद्दे पर अपनी राय साफ रखता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ संधि करके कुछ हद तक तेहरान को रोक लिया था। लेकिन अब अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने इस संधि से अमेरिका को बाहर निकाल दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके बाद ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम तेजी के साथ आगे बढ़ाया। दूसरे कार्यकाल में आए ट्रंप ने लगातार ईरान को धमकियां देना चालू रखा।
28 अप्रैल को शांति वार्ता के बीच ही अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया। पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर और उनके सुरक्षा बल मारे गए। इसके बाद कई दिनों तक यह युद्ध जारी रहा। इसके बाद ईरान ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। लगातार होते युद्ध के बाद ईरान ने हॉर्मोस पर रोक लगा दी और पूरा विश्व ऊर्जा संकट से जूझने लगा। कुछ दिनों का सोचकर युद्ध में उतरे अमेरिका के लिए अब बड़ा संकट था। एक महीने के युद्ध के बाद ट्रंप प्रशासन शांति वार्ता की तरफ आगे बढ़ने लगा। बाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों के बीच शांति हुई, लेकिन अभी भी समझौता काफी दूर नज़र आ रहा है।
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