Mahua Moitra attack: टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर हमला, रेस्टोरेंट के बाहर फेंके गए अंडे
Mahua Moitra attack: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने बुधवार को एक बड़ी घटना का आरोप लगाया है। मोइत्रा ने दावा किया है कि कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र में एक रेस्टोरेंट के बाहर मौजूद भीड़ ने उन पर अंडे फेंके।
मोइत्रा ने शेयर किया वीडियो
महुआ मोइत्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इस घटना का वीडियो साझा किया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रेस्टोरेंट की खिड़कियों पर लगातार अंडे फेंके जा रहे हैं। सांसद उस वक्त रेस्टोरेंट के अंदर स्थानीय टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मौजूद थीं।
Currently being attacked by @bjp4india goons with @wbpolice watching on.@MamataOfficial @RahulGandhi @akhliesh @supriya_sule @mkstalin @ArvindKejriwal pic.twitter.com/eD2gYU0NPx
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) July 1, 2026
बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप
घटना के दौरान मोइत्रा ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड करते हुए बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा कृत्य बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया है। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस घटना के समय मूकदर्शक बनी सब कुछ देखती रही।
Hello @DGPWestBengal @WBPolice past 2 hours & your police is watching the fun & not dispersing the mob. They want me to flee & they will pelt eggs /stones while I enter my car. Please do your job. Disperse the mob. Am in NH Dhaba Plassey. pic.twitter.com/PWmjuJEnaH
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) July 1, 2026
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। टीएमसी ने बीजेपी समर्थकों पर हमला करने का आरोप मढ़ा है। हालांकि, इस मामले पर बीजेपी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बंगाल की सियासत में हलचल
यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद की है, जिसमें बीजेपी ने ममता बनर्जी की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। चुनाव के बाद से ही टीएमसी नेताओं पर होने वाले हमलों की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ SC पहुंची तमिलनाडु सरकार; गोवध पर पूरी तरह रोक को दी चुनौती
Tamil Nadu cow slaughter ban: तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस हालिया आदेश को चुनौती दी है, जिसमें पूरे राज्य में गायों और बछड़ों के वध पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। राज्य सरकार की अपील में कहा गया है कि हाई कोर्ट का यह आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 (Tamil Nadu Animal Preservation Act, 1958) के प्रावधानों के विपरीत है।
कानून का तर्क और सरकारी दलील
अपील में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कानून 10 साल से अधिक उम्र की उन गायों के वध की अनुमति देता है, जो काम करने या प्रजनन के लिए अनुपयुक्त है। इसके लिए सक्षम अधिकारी से प्रमाण पत्र लेना आवश्यक होता है। सरकार का तर्क है कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और अन्य स्थानीय निकायों के नियम पशु वध की शर्तों को नियंत्रित करते है, लेकिन वे पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाते। सरकार के अनुसार, हाई कोर्ट ने कानून के दायरे से बाहर जाकर पूर्ण प्रतिबंध का निर्देश दिया है, जो विधायी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
क्या है हाई कोर्ट का आदेश?
यह पूरा मामला 27 मई को मद्रास हाई कोर्ट की खंडपीठ द्वारा दिए गए एक आदेश से शुरू हुआ। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की बेंच ने निर्देश दिया था कि राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी यह सुनिश्चित करे कि बकरीद या किसी भी अन्य दिन गाय या बछड़े का वध न हो।
हाई कोर्ट ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 48 का उल्लेख किया था, जो राज्य को दुधारू और कामकाजी पशुओ के वध पर रोक लगाने के कदम उठाने का निर्देश देता है।
कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष
मद्रास हाई कोर्ट में यह याचिका हिंदू मक्कल काची के युवा विंग के सचिव के. सूर्या ने दायर की थी। उनका आरोप था कि सार्वजनिक स्थानों पर गायों का अवैध वध हो रहा है और प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि वध केवल निर्धारित वधशालाओ (Slaughterhouses) में ही हो सकता है और वह भी आवश्यक प्रमाण पत्र के बाद। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई है।
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