PF New Rules: अब मर्जी से नहीं निकाल पाएंगे पूरा पैसा, सरकार ने लागू की नई EPF स्कीम 2026
PF New Rules: देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए भविष्य निधि यानी पीएफ से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने दशकों पुराने नियमों में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था को हरी झंडी दे दी है. सरकार की तरफ से इस सप्ताह 'सोशल सिक्योरिटी कोड 2020' को अमलीजामा पहनाते हुए नई एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड यानी ईपीएफ स्कीम 2026 को पूरे देश में लागू कर दिया गया है.
इस नए बदलाव ने करीब 74 साल पुरानी ईपीएफ स्कीम 1952 की जगह ले ली है. इतने लंबे समय बाद नियमों में हुए इस बड़े बदलाव का सीधा असर हर पीएफ खाताधारक की सैलरी, उसमें होने वाली कटौती और जरूरत के समय पैसे निकालने की प्रक्रिया पर पड़ने वाला है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस नई स्कीम के आने से आपके पीएफ खाते पर क्या असर पड़ेगा और कौन से नियम पूरी तरह बदल गए हैं.
पीएफ खाते में पैसे जमा होने का क्या है नया गणित?
नए नियमों के आने के बाद भी बुनियादी तौर पर पीएफ कटौती के ढांचे में कुछ चीजों को पहले जैसा ही रखा गया है, लेकिन उच्च आय वर्ग के लिए स्थिति स्पष्ट कर दी गई है. ईपीएफओ के नए नियम के मुताबिक, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15000 रुपये तक है, उनकी सैलरी से 12 फीसदी यानी अधिकतम 1800 रुपये हर महीने पीएफ के रूप में कटना जारी रहेगा. इसके साथ ही एक बड़ा नियम यह तय किया गया है कि अगर किसी कर्मचारी की सैलरी 15000 रुपये से अधिक है, तो भी कंपनी उसकी सैलरी से अधिकतम 1800 रुपये ही पीएफ के रूप में काट सकती है. कंपनियां अपनी मर्जी से इससे ज्यादा रकम नहीं काट पाएंगी. हालांकि, अगर कोई अधिक सैलरी पाने वाला कर्मचारी खुद चाहता है कि उसका पीएफ ज्यादा कटे, तो वह अपनी इच्छा से अपनी सैलरी से 1800 रुपये से अधिक की रकम पीएफ खाते में कटवा सकता है.
अब खाते से नहीं निकाल पाएंगे पूरा पैसा
भविष्य सुरक्षित रखने के लिहाज से सरकार ने पैसे निकालने के नियमों को थोड़ा कड़ा कर दिया है. अब तक लोग जरूरत पड़ने पर अपने पीएफ खाते का एक बड़ा हिस्सा या कई बार पूरा पैसा निकाल लेते थे, लेकिन नए नियम के मुताबिक आंशिक निकासी की सीमा तय कर दी गई है. अब कोई भी पीएफ खाताधारक अपने खाते से अधिकतम 75 फीसदी रकम ही निकाल सकता है. नए कानून के तहत अब हर खाताधारक को अपने पीएफ खाते में कम से कम 25 प्रतिशत पैसे छोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है. इसका मतलब यह है कि आप चाहकर भी आपातकाल में अपने खाते को पूरी तरह खाली नहीं कर पाएंगे और एक निश्चित हिस्सा आपके बुढ़ापे के लिए हमेशा सुरक्षित रहेगा.
दावा करने की कैटेगरी हुई कम
पहले पीएफ खाते से पैसे निकालने के लिए बहुत सारी जटिल प्रक्रियाएं थीं और लोगों को अलग-अलग वजहों के हिसाब से आवेदन करना पड़ता था. पुराने नियमों के तहत पीएफ विड्रॉल करने यानी पैसे निकालने के लिए कर्मचारी करीब 13 अलग-अलग कैटेगरी में आवेदन कर सकते थे, जिससे कई बार भ्रम की स्थिति पैदा होती थी.
सरकार ने अब इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और सीमित कर दिया है. अब इन सभी 13 श्रेणियों को समेटकर सिर्फ 3 मुख्य कैटेगरी में बदल दिया गया है. अब आप केवल तीन वजहों से ही पीएफ निकाल पाएंगे. इसमें पहली कैटेगरी 'आवश्यक जरूरतें' है, जिसके तहत बच्चों की पढ़ाई, शादी और बीमारी के लिए पैसा निकाला जा सकता है. दूसरी कैटेगरी 'आवास की जरूरतें' रखी गई है और तीसरी कैटेगरी में 'विशेष परिस्थितियां' शामिल की गई हैं.
नौकरी छोड़ने वालों और क्लेम में देरी पर बड़ा फैसला
अक्सर देखा जाता था कि नौकरी बदलने या छोड़ने के बाद पीएफ का पैसा निकालने के लिए कर्मचारियों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे और कई तरह की समय सीमा की बंदिशें होती थीं. नए नियमों के अंतर्गत अब इस व्यवस्था को बेहद लचीला बना दिया गया है. अगर कोई कर्मचारी अपनी नौकरी छोड़ देता है, तो उस पर पूरा पीएफ पैसा निकालने के लिए किसी भी तरह की न्यूनतम सदस्य अवधि की शर्तें लागू नहीं होंगी. वह आसानी से अपना सेटलमेंट कर सकेगा.
इसके अलावा, कर्मचारियों के हक में एक और बड़ा फैसला लिया गया है. अगर बिना किसी ठोस और वाजिब वजह के ईपीएफओ किसी कर्मचारी का क्लेम सेटल करने में देरी करता है, तो ऐसी स्थिति में विभाग को जुर्माना भरना होगा. ईपीएफओ को पीएफ खाताधारक को देरी की अवधि के लिए 12 फीसदी की दर से ब्याज जोड़कर देना होगा, जिससे अब क्लेम समय पर पास होने की उम्मीद बढ़ गई है.
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महाराष्ट्र : तीन कॉस्मेटिक उत्पाद असुरक्षित, एफडीए ने जारी किया अलर्ट
मुंबई, 4 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने तीन कॉस्मेटिक उत्पादों को मानक गुणवत्ता के नहीं (एनएसक्यू) घोषित करते हुए उपयोग और बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की सलाह जारी की है। प्रयोगशाला जांच में इन उत्पादों में पारा (मरकरी) और सीसा (लेड) जैसी जहरीली भारी धातुओं की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई, जिसके चलते इन्हें उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित माना गया है।
एफडीए की ओर से शनिवार को जारी जनसूचना के अनुसार, सरकारी विश्लेषक द्वारा परीक्षण के बाद गोरी ब्यूटी क्रीम, फेस फ्रेश गोल्ड (ब्यूटी क्रीम + ब्यूटी सीरम) और गोल्डन स्टार ब्यूटी क्रीम को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि इन उत्पादों पर निर्माता का नाम और पता, बैच नंबर, निर्माण तिथि तथा एक्सपायरी डेट जैसी अनिवार्य जानकारियां भी अंकित नहीं थीं, जो उपभोक्ता सुरक्षा मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है।
जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आम नागरिकों से इन उत्पादों की खरीद, उपयोग और वितरण तुरंत बंद करने की अपील की है। विभाग ने कहा कि ऐसे कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल त्वचा और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
एफडीए ने खुदरा विक्रेताओं, थोक व्यापारियों, वितरकों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी निर्देश दिया है कि वे इन उत्पादों की बिक्री, भंडारण, प्रदर्शन और वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दें। जिन स्टॉकिस्टों और वितरकों के पास इन उत्पादों का स्टॉक मौजूद है, उन्हें उपलब्ध मात्रा की जानकारी संबंधित एफडीए कार्यालय को देने और बाजार में भेजे गए सभी उत्पादों को वापस मंगाने (रिकॉल) की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध स्टॉक और रिकॉल किए गए उत्पादों का पूरा विवरण बिना किसी देरी के संबंधित खाद्य एवं औषधि प्रशासन कार्यालय को उपलब्ध कराना होगा। इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी इन उत्पादों की बिक्री या उपलब्धता दिखाई दे तो इसकी सूचना विभाग को तत्काल दें। इसके लिए विभाग ने टोल-फ्री नंबर 1800-222-365 और आधिकारिक ईमेल जारी किया है।
एफडीए ने लोगों को केवल अधिकृत और विश्वसनीय स्रोतों से ही कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदने की सलाह दी है। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी उत्पाद पर निर्माता का नाम-पता, बैच नंबर, निर्माण तिथि और समाप्ति तिथि जैसी सभी आवश्यक जानकारियां स्पष्ट रूप से अंकित हों। विभाग का कहना है कि सतर्कता और जागरूकता ही ऐसे असुरक्षित उत्पादों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
--आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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