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Mutual Funds कंपनी बंद हो जाए तो क्या डूब जाएगा आपका पैसा? जानिए पूरा सच

Mutual Funds: अगर सुबह उठते ही आपको खबर मिले कि जिस AMC यानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी में आपने अपनी जिंदगी भर की जमापूंजी लगा रखी है, वो अचानक बंद हो गई है. तो आप क्या करेंगे? आम कारोबारी दुनिया में तो कंपनी दिवालिया होने पर निवेशकों और लेनदारों को अक्सर टका-टका के लिए तरसना पड़ता है. लेकिन क्या यही नियम म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर भी लागू होता है? क्या रातों-रात आपका पूरा निवेश खत्म हो सकता है? इसका सीधा जवाब है नहीं. AMC के ऑपरेशनल फेल होने से आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है. आइए समझते हैं वो मजबूत ढांचा, जो आपके निवेश की हिफाजत करता है.

आपका पैसा AMC का नहीं होता

जब आप म्यूचुअल फंड की यूनिट्स खरीदते हैं, तो न तो आप AMC को कर्ज दे रहे होते हैं और न ही AMC के शेयर खरीद रहे होते हैं. म्यूचुअल फंड कंपनी आपका पैसा अपने कॉरपोरेट बैंक अकाउंट में नहीं रखती. भारत के फाइनेंशियल नियमों के तहत 3 स्तरों पर सख्ती से अधिकारों का बंटवारा किया गया है, ताकि कॉरपोरेट कोलैप्स से आपका पैसा बचा रहे.

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ट्रस्ट स्ट्रक्चर- असली मालिक आप ही हैं

हर म्यूचुअल फंड एक अलग 'ट्रस्ट' के तौर पर बनाया जाता है. AMC सिर्फ एक ऑपरेशनल एजेंसी है, जिसे ट्रस्ट पैसा मैनेज करने के लिए नियुक्त करता है. इसे ऐसे समझिए. AMC एक प्रोफेशनल ड्राइवर है और आपका पैसा गाड़ी. अगर ड्राइवर नौकरी छोड़ दे या निकाल दिया जाए, तो गाड़ी तो फिर भी आपकी ही रहेगी, बस नया ड्राइवर ढूंढना पड़ेगा.

ट्रस्टीज निभाते हैं निगरानी की भूमिका

हर म्यूचुअल फंड ट्रस्ट के पास एक बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज होता है, जिनकी इकलौती जिम्मेदारी निवेशकों की दौलत की रखवाली करना है. ये सुनिश्चित करते हैं कि AMC तय नियमों और गाइडलाइंस के मुताबिक ही फंड मैनेज करे. अगर किसी AMC पर वित्तीय संकट आता है, तो ट्रस्टीज एसेट्स को सुरक्षित रखने के लिए आगे आते हैं.

कस्टोडियन के पास रहती है असली सिक्योरिटीज

आपके फंड ने जिन स्टॉक्स, बॉन्ड्स या गोल्ड में निवेश किया है, उनकी फिजिकल कस्टडी न तो AMC के पास होती है, न ट्रस्टीज के पास. यह जिम्मेदारी होती है एक इंडिपेंडेंट थर्ड-पार्टी 'कस्टोडियन' की, जो आमतौर पर कोई बड़ा बैंक होता है. यही वजह है कि किसी फेल हो रही AMC के लेनदार, कर्ज वसूलने के लिए आपके निवेश को छू भी नहीं सकते. क्योंकि एसेट्स इंडिपेंडेंट कस्टोडियन के पास ट्रस्ट के नाम पर सुरक्षित रहते हैं.

SEBI की सख्त निगरानी बनी रहती है सुरक्षा कवच

भारत में SEBI यानी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया का शिकंजा काफी कड़ा है. सबसे बुरी स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही SEBI का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाया गया है. अगर कोई AMC ऑपरेशन बंद करने का फैसला करती है, डिफॉल्ट करती है या वित्तीय संकट में फंसती है, तो SEBI के पास इससे निपटने का पूरा तैयार प्लान होता है, ताकि निवेशकों की घबराहट का सामना व्यवस्थित तरीके से किया जा सके.

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दूसरी AMC को ट्रांसफर होता है फंड

सबसे आम तरीका यही है. SEBI, फंड के ट्रस्टीज के साथ मिलकर मौजूदा म्यूचुअल फंड स्कीम्स को किसी दूसरी वित्तीय रूप से मजबूत और नियम-अनुपालक AMC को ट्रांसफर करवा देता है. आपकी यूनिट्स जस की तस बनी रहती हैं, बस फंड का नाम थोड़ा बदल सकता है और नई मैनेजमेंट के तहत आपका पोर्टफोलियो बिना किसी झंझट के आगे बढ़ता रहता है.

स्कीम बंद कर भी लौटाया जा सकता है पैसा

अगर कोई नया खरीदार या मैनेजर नहीं मिलता, तो स्कीम को 'वाइंड अप' कर दिया जाता है. इसका मतलब यह नहीं कि आपका पैसा गायब हो जाता है. कस्टोडियन पोर्टफोलियो में मौजूद सभी स्टॉक्स और बॉन्ड्स को मौजूदा बाजार भाव पर बेच देता है, और इससे मिली रकम निवेशकों को उनकी NAV के हिसाब से अनुपात में लौटा दी जाती है.

AMC से सुरक्षा है, लेकिन मार्केट रिस्क से नहीं

यहां एक बात समझनी बेहद जरूरी है. AMC के दिवालिया होने से तो आपका पैसा सुरक्षित है, लेकिन मार्केट रिस्क से कोई सुरक्षा नहीं मिलती. अगर बाजार में गिरावट के दौरान कोई AMC बंद होती है, तो आपके निवेश की वैल्यू भी उसी गिरते बाजार को दिखाएगी. यानी कॉरपोरेट फ्रॉड और ऑपरेशनल कोलैप्स से तो आप सुरक्षित हैं, लेकिन स्टॉक और बॉन्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव से नहीं. अगर बाजार 10% गिरता है, तो आपके फंड की वैल्यू भी 10% गिरेगी, चाहे AMC कितनी भी मजबूत या कमजोर क्यों न हो.

घबराने की जरूरत नहीं, आपका पैसा सुरक्षित है

भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री दुनिया के सबसे सख्ती से रेगुलेटेड फाइनेंशियल ढांचों में से एक है. निवेशकों के पैसे उसे मैनेज करने वाली कंपनी और सिक्योरिटीज रखने वाले बैंक के बीच की यह कानूनी दूरी सुनिश्चित करती है कि कॉरपोरेट कुप्रबंधन या किसी फंड हाउस के दिवालिया होने से आपकी पूंजी खत्म नहीं हो सकती.

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डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.

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क्यों खत्म हुआ 45 फीसदी ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ का लक्ष्य! भारत पर क्या होगा इसका असर?

World Bank Climate Finance: अमेरिका के भारी दबाव में विश्व बैंक झुक गया है. COP-28 में तय 45 प्रतिशत क्लाइमेट फाइनेंस का ऐतिहासिक लक्ष्य लिया वापस. भारत समेत दुनिया भर के विकासशील देशों में ‘क्लाइमेट एडाप्टेशन’ प्रोजेक्ट्स पर संकट. पढ़ें इन-डेप्थ रिपोर्ट.

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  Sports

Bihar के लाल Vaibhav Sooryavanshi का Team India में डेब्यू, सचिन का तोड़ा रिकॉर्ड

भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही सीरीज़ का दूसरा T20I मैच खेला जा रहा है। मैच शुरू होने से पहले ही एक बहुत बड़ा पल सामने आया है, क्योंकि 15 साल के वैभव सूर्यवंशी अपना सीनियर इंटरनेशनल डेब्यू कर रहे हैं और इंग्लैंड के खिलाफ 'मेन इन ब्लू' की प्लेइंग XI का हिस्सा हैं। गौतम गंभीर के प्रेरणादायक भाषण के बाद, इस युवा स्टार को तिलक वर्मा से अपनी पहली इंडिया कैप मिली और फिर टीम के साथियों ने उन्हें गले लगाकर बधाई दी, जो एक बहुत ही भावुक पल था।
 

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बिहार के समस्तीपुर के उस युवा खिलाड़ी को, जिसने इंडियन प्रीमियर लीग में अपनी ज़बरदस्त हिटिंग क्षमता से क्रिकेट की दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था, इंग्लैंड के ख़िलाफ़ भारत के दूसरे T20I मैच में डेब्यू कैप सौंपी गई। कई लोगों का मानना ​​है कि उन्हें डेब्यू करने का मौका तीन मैच देर से मिला; क्योंकि आयरलैंड के खिलाफ़ 2 T20I और फिर डरहम में इंग्लैंड के खिलाफ़ पहले T20I में इस बेहद प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी को बेंच पर ही बैठना पड़ा था। 

15 साल, 3 महीने और 7 दिन की उम्र में, वैभव सूर्यवंशी देश के लिए इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी के तौर पर भारतीय क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में शामिल हो गए हैं। बिहार के इस बल्लेबाज़ ने शेफाली वर्मा को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 2019 में 15 साल और 239 दिन की उम्र में डेब्यू किया था। भारतीय पुरुष क्रिकेट में, उन्होंने सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया, जिनका 16 साल की उम्र में किया गया डेब्यू तीन दशकों से भी ज़्यादा समय तक टीनएज डेब्यू के लिए भारत का बेंचमार्क बना हुआ था।
 

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टॉस पर कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि हम फिर से पहले बैटिंग करेंगे। हमारी टीम में एक बदलाव है। संजू की जगह वैभव आए हैं। बिल्कुल... आपने पिछले कुछ महीनों में देखा होगा कि वह कैसी बैटिंग कर रहे हैं। मुझे लगता है कि वह पूरी तरह से स्क्वाड में शामिल होने के हकदार हैं। वह ऐसे खिलाड़ी हैं जो बिल्कुल भी दबाव नहीं लेते। उनका स्वभाव बहुत शांत और स्थिर है। उन्हें अच्छी तरह पता है कि आने वाले मैचों में क्या होने वाला है। नेट्स में जिस तरह से वह बैटिंग करते हैं और गेंदबाजों का सामना करते हैं, उससे पता चलता है कि वह किस तरह के खिलाड़ी हैं। आप कॉम्पिटिशन देखिए, हर मैच के साथ... भारत में जिस तरह का टैलेंट सामने आ रहा है, उसे देखकर अच्छा लगता है। इससे हम हमेशा सतर्क रहते हैं। मुझे लगता है कि दबाव महसूस करना एक सौभाग्य की बात है।
 
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Sat, 04 Jul 2026 18:43:30 +0530

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