प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जोधपुर एयरपोर्ट पर नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन किया और संशोधित UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना लॉन्च की। इसके साथ ही उन्होंने ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स से रिफाइनरी प्रोडक्शन टैंकरों को हरी झंडी दिखाई। इस कॉम्प्लेक्स को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के तौर पर विकसित किया गया है और प्रधानमंत्री मोदी ने इसी कार्यक्रम में इसे राष्ट्र को समर्पित किया था।
नरेंद्र मोदी ने राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में भर्ती हुए लगभग 54,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे। वहीं, अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि गर्मी के इस मौसम में स्थान-स्थान पर इतनी बड़ी मात्रा में लोगों का एकत्र होना, हम सबको आशीर्वाद देना। ये दिखाता है कि भाजपा सरकार के प्रयासों पर आपका विश्वास कितना बुलंद है। मैं इस समर्थन और स्नेह के लिए राजस्थान की माटी का ऋणी हूं। उन्होंने कहा कि ये धरती अनगिनत वीरों के शौर्य की साक्षी रही है। इस रण के कण-कण ने हमें स्वाभिमान को सर्वोपरि रखने की सीख दी है। और व्यक्ति एवं देश का स्वाभिमान तभी ऊंचा रह सकता है, जब वो आत्मनिर्भर हो, दूसरों पर कम से कम निर्भर हो। आज राजस्थान की इस धरती से भारत ने विकसित और आत्मनिर्भर होने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज इस रिफाइनरी को देश को समर्पित किया गया है। ये रिफाइनरी यहां हजारों लोगों के रोजगार का माध्यम बनेगी। मैं राजस्थान के युवाओं को इस रिफाइनरी की विशेष तौर पर बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि आज का दिन साक्षी है कि भाजपा सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ शिलान्यास करके नहीं छोड़ती। बल्कि हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी दिन-रात एक कर देते हैं। दो महीने पहले यहां जो हादसा हुआ, उसके बाद इतनी तेजी से काम पूरा कर लेना भी परिश्रम की पराकाष्ठा का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आप सबने दिखा दिया है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी और अप्रत्याशित क्यों न हो, नया भारत अपने संकल्पों से न तो पीछे हटता है और न ही अपनी रफ्तार कम करता है।
मोदी ने कहा कि आज ही, जोधपुर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया गया है। ये मारवाड़ में पर्यटन, व्यापार और रोजगार को नई गति देगा। इस कार्यक्रम में जो लोग जोधपुर से जुड़े हैं, मैं उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। जोधपुर से ही आज उड़ान योजना के नए चरण की भी शुरुआत हुई है। इसके तहत छोटे-छोटे शहरों और दूर-दराज के क्षेत्रों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। साथ ही अब जयपुर में मेट्रो का विस्तार भी होने जा रहा है। शेखावाटी क्षेत्र के जल संकट को दूर करने का इंतजार भी अब खत्म होने जा रहा है। मैं इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए राजस्थान के मेरे भाई-बहनों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज राजस्थान की इस धरती से मैं देश के एक और सामर्थ्य की चर्चा करूंगा। आप भी देख रहे हैं कि पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है, हर देश त्रस्त है। इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया। बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं। लेकिन, 21वीं सदी के इस सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए... संकट का समय रहते सटीक आंकलन किया... प्रभावी रणनीति बनाई... भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया। भारत की diplomatic power का सकारात्मक इस्तेमाल किया। और तब जाकर भारत सकंट से उबर पाया है।
मोदी ने कहा कि जब सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी, तब किस scale पर दिनरात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था। वो मेहनत, वो प्रयास, वो धैर्य, नीतिगत और कूटनीतिक स्तर पर उठाया गया एक-एक संवेदनशील कदम कभी न कभी इतिहास लिखेगा। ये सब अभूतपूर्व है। बहुत अफवाएं फैलाई गई, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए। लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वो सफल नहीं हो पाए। दूर-सुदूर इलाकों में भी छोटी मोटी अड़चनों के अलावा ईंधन सप्लाई में कोई बड़ी चुनौती नहीं आई। अप्रैल से जून के बीच ही अकेले डीजल-पेट्रोल में 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा कंपनियों को सहना पड़ा। और इस घाटे को पूरा करने की जिम्मेदारी सरकारी खजाने से उठाई गई। हमने प्रति लीटर 10 रुपये की excise duty भी कम की और बहुत ज्यादा बोझ जनता पर नहीं पड़ने दिया।
उन्होंने कहा कि युद्ध के इसी समय में भारत की दूसरे देशों के साथ दोस्ती बहुत काम आई। जब ये संकट शुरू हुआ था, उससे पहले भारत 25-26 देशों से ईंधन का आयात करता था। लेकिन संकट के समय भारत की diplomacy का जलवा दिख गया। दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध इस संकट की घड़ी में बहुत काम आए। युद्ध के दौरान ही भारत 40 से ज्यादा देशों से ईंधन मंगाने लगा। भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्रहित और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है। नागरिक देवो भवः हमारा मंत्र है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो लोग भारत को असफल होते देखना चाह रहे हैं, इसके लिए भविष्यवाणी भी करने लग गए थे। वो आज निराशा की गर्त में पड़े होंगे।
उन्होंने कहा कि आज, मैं 140 करोड़ देशवासियों का आभार प्रकट करता हूं... उन्हें धन्यवाद कहता हूं। जिस तरह, वो इस मुश्किल समय में देश के साथ मजबूती से खड़े रहे। जिस तरह, देशवासियों ने अफवाह, डर और भ्रम फैलाने वालों का सामना किया। देश में अस्थिरता फैलाने की साज़िशों को नाकाम किया... देश उसी विश्वास के भरोसे आगे बढ़ पाया है।
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तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने शनिवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया। पार्टी से नेताओं के लगातार बाहर जाने के बीच यह कदम उठाया गया है। ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी चंद्रिमा को मई में विधानसभा चुनावों में TMC को भारी नुकसान होने के बाद पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। हार के बाद, ममता ने पार्टी की सभी मौजूदा कमेटियों को भंग कर दिया और संगठन का पुनर्गठन किया।
TMC दो गुटों में बंट गई - एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही थीं और दूसरे का राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी। इस बीच, TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद 'नेशनल सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' (जो बहुत कम जानी-पहचानी पार्टी है) में शामिल हो गए और केंद्र में BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकार को समर्थन देने का वादा किया।
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