महबूबा मुफ्ती बोली- मैं भी दिमागी नक्सल:आर्टिकल 370 को सपोर्ट करती हूं; रिजिजू ने कहा था- दिमागी नक्सली वही जो संविधान को नहीं मानते
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी प्रधानमंत्री मोदी की 'दिमागी नक्सल' वाली टिप्पणी पर जवाब दिया। उन्होंने रविवार को कहा कि वह संविधान के आर्टिकल 370 का समर्थन करती हैं, इसलिए वह भी दिमागी नक्सल हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को कहा कि पीएम मोदी ने विपक्षी नेताओं को दिमागी नक्सल नहीं कहा था। रिजिजू ने पोस्ट में लिखा कि दिमागी नक्सल उन लोगों को कहा गया है, जो माओवादियों के समर्थक है, भारतीय संविधान को नहीं मानते, और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं। 15 अगस्त को लाल किले से संबोधन के दौरान पीएम ने कहा था कि देश को दिमागी नक्सलियों से बचना चाहिए और ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग कर देना चाहिए। पीएम बोले थे- देश को सतर्क रहने की जरूरत, 5 बातें… कांग्रेस ने दिमागी नक्सल को खोखला बताया कांग्रेस ने मोदी के बयान पर कहा कि दिमागी नक्सल खोखला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पहले जाति जनगणना की मांग को अर्बन नक्सल सोच बताकर खारिज किया गया था, लेकिन एक साल पहले जाति आधारित जनगणना की घोषणा कर दी गई। उन्होंने कहा कि पहले विरोधियों की मांगों को अपमानजनक नाम दिए जाते हैं, फिर बाद में उन्हीं मांगों को मान लिया जाता है। 12 साल बाद भी उनके राजनीतिक भाषण में कुछ नया नहीं था। इससे पहले कांग्रेस के सीनियर लीडर पी. चिदंबरम ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ बयान पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि “मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।” ------------ ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- दिमागी नक्सलियों को पहचानें, उन्हें अलग करें: ये समाज को भटका रहे 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले पर 75 मिनट की स्पीच दी। पीएम ने कहा- ‘हथियारी नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। समाज को गलत राह पर ले जाने के लिए तरह-तरह के काम कर रहे हैं।’ पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट में आज कावेरी जल विवाद याचिका पर सुनवाई:तमिलनाडु ने 3 अगस्त को याचिका दायर की थी; कर्नाटक से पानी छोड़ने की मांग की
सुप्रीम कोर्ट आज तमिलनाडु सरकार की कावेरी जल विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी पानी तुरंत छोड़ने की मांग की गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को कहा कि मामले में तमिलनाडु सरकार और अन्य पक्षों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई की जाएगी। तमिलनाडु को राज्य को पानी का तय हिस्सा नहीं मिल रहा तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की ओर से राज्य के लिए तय पानी की मात्रा और कर्नाटक की ओर से छोड़ा गया पानी, दोनों ही काफी कम हैं। 28 जुलाई को हुई कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, तमिलनाडु सरकार के मुताबिक, 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडुलु में पानी का प्रवाह 158 से 550 क्यूसेक के बीच ही रहा। कर्नाटक के डैम में 77.537 TMC पानी जमा था तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया कि 3 अगस्त तक कर्नाटक के काबिनी, हरंगी और हेमावती डैम में कुल मिलाकर 77.537 थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) पानी जमा था। सरकार ने कहा कि कर्नाटक को तमिलनाडु का तय हिस्सा अनुपात के मुताबिक जारी करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। ------------ ये खबर भी पढ़ें… तेलंगाना CM बोले-BRS ने सरकार गिराने के लिए तंत्र-मंत्र कराया:नेता कर्नाटक-तमिलनाडु के मंदिरों में जाकर पूजा कर रहे; कांग्रेस ने पहले भी आरोप लगाया तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने शनिवार को भारतीय राष्ट्र समिति (BRS) नेताओं पर कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के लिए तंत्र-मंत्र कराने का आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें…
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