भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पूरा होने के करीब, भविष्य की हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए बनेगा मॉडल
नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि यह परियोजना देश में बनने वाले भविष्य के सभी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए एक मानकीकृत मॉडल (स्टैंडर्ड टेम्पलेट) का काम करेगी।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना के पूरा होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर करीब 1 घंटा 58 मिनट रह जाएगा। इस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि ट्रेनों की संचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसके लिए अत्याधुनिक रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
करीब 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना के तहत पहली बुलेट ट्रेन सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआती चरण में ट्रेन सूरत और वापी के बीच संचालित की जाएगी।
सरकार का कहना है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट केवल एक परिवहन परियोजना नहीं है, बल्कि यह भविष्य में देश भर में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान, कौशल और औद्योगिक इकोसिस्टम भी तैयार कर रही है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना भविष्य में बनने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एक स्केलेबल मॉडल स्थापित कर रही है, जिससे आने वाली परियोजनाओं में बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, यात्रा का समय कम होगा और देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को भी गति मिलेगी।
सरकार ने भविष्य के लिए लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की पहचान की है। इन परियोजनाओं में लगभग 16 लाख करोड़ रुपए के निवेश की संभावना जताई गई है।
मुंबई-अहमदाबाद परियोजना के अनुभव के आधार पर भविष्य की परियोजनाओं में एक समान इंजीनियरिंग डिजाइन, निर्माण तकनीक और संचालन प्रणाली अपनाई जाएगी, जिससे परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी और निर्माण की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
सरकार ने कहा कि एक समान डिजाइन, उपकरण और रख-रखाव प्रक्रियाओं के चलते स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और खरीद प्रक्रिया को भी आसान बनाया जा सकेगा। हालांकि, प्रत्येक स्थान की मिट्टी की प्रकृति के अनुसार नींव तैयार की जाएगी, जबकि अन्य सभी प्रमुख ढांचे समान इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप होंगे।
इन मानकों में पिलर, वायाडक्ट, ट्रैक, स्टेशन संरचना, ओवरहेड विद्युतीकरण और सिग्नलिंग सिस्टम शामिल होंगे। सरकार का मानना है कि इस मानकीकृत व्यवस्था से भविष्य के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण तेज होगा, गुणवत्ता में सुधार आएगा और परियोजनाओं की लागत भी कम होगी।
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Explainer: खामेनेई के साथ 14 माह की पोती का भी ताबूत, विजय जुलूस में दो करोड़ लोग जुटाकर अमेरिका को दिया संदेश
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो चुकी हैं. 9 जुलाई को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. ईरान ने जिस पैमाने पर अपने सुप्रीम नेता को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहा है, वैसा हालिया सालों में कभी नहीं देखने को मिला. जनाजे को पूरी दुनिया के सामने इस तरह से पेश किया जा रहा है ताकि इसका असर कई देशों पर पड़े. जनाजे को दो देशों के पांच शहरों से से गुजारा जाएगा. ईरान के साथ इराक से भी इस जनाजे को ले जाने की तैयारी हो रही है. इसका समय ऐसे वक्त पर रखा गया है, जब अमेरिका स्वतंत्रता दिवस की 250 वीं वर्षगांठ के जश्न के साथ है.
तेहरान को झुकाया नहीं जा सकता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अली खामेनेई की अंतिम यात्रा को इस किस्म की भव्यता देकर ईरान ने इजरायल और अमेरिका को सख्त संदेश देने का प्रयास किया है. इसके जरिए ईरान की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को यह बताने का प्रयास है कि राजनीतिक नेतृत्व को मारने से तेहरान को झुकाया नहीं जा सकता है.
#WATCH | Tehran, Iran: Visuals from the funeral ceremony of Iran's late Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei, who was killed on February 28 during Israeli and US airstrikes on Iran
— ANI (@ANI) July 3, 2026
(Source: IRIB Pool via Reuters) pic.twitter.com/QWmZtyRAUB
इन लोगों को श्रद्धांजलि
इस जनाजे में खामेनेई की 14 माह की पोती का भी ताबूत शामिल किया गया है. इस ताबूत को देखकर ईरानियों का दिल पसीज गया है. ईरान में अली खामेनेई के साथ जिन लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है. उनमें उनके एक दामाद, उनकी सबसे बड़ी बेटी, 14 माह पोती और ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की पत्नी शामिल थीं.
ये बेहद भावुक तस्वीर है?
14 महीने की बच्ची का छोटा सा ताबूत अली खामेनेई के ताबूत के बगल में रखा गया है. ताबूत के बगल में ही बच्ची की तस्वीर रखी है. सभी की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी और इजरायली हमले में हुई थी.
लाखों लोग तैयारियों में जुटे
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक के इतिहास के सबसे बड़े लॉजिस्टिकल प्रयासों में से एक शुरू किया है. इसके तहत अंतिम संस्कार के आयोजन और ईरान-इराक के शहरों के पवित्र स्थलों की यात्रा की व्यवस्था के लिए इंतजाम किए गए हैं. सरकारी कर्मचारियों, विश्वविद्यालयों, मजदूर संघों, अग्निशमन कर्मियों, सैनिकों, सहायता कर्मियों और दूसरे लोग जुट गए हैं.
ईरानी मीडिया में अली खामेनेई की खबरें छाई हैं. उनके जीवन पर आधारित गीतों और डॉक्यूमेंट्रीज ने अमेरिका के संग बातचीत वाली खबरों का स्थान लिया है. इस भव्य आयोजन का लक्ष्य दुनिया और ईरान के विरोधियों को संदेश देना है कि तेहरान पर हमले के बाद भी झुका नहीं है. मारे गए नेता को मजबूती के प्रतीक के तौर पर अमर बनाने जा रहा है.
दुनिया को ताकत दिखाएंगे: गालिबाफ
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि हमें उठना ही होगा. देश के खून का बदला लेने की आवाज विश्व तक पहुंचानी होगी. इससे विश्व को पता चलेगा कि ईरान जुल्म के आगे चुप नहीं रहेगा. अपने इमाम के खून का बदला लिए बिना नहीं रहने वाला है.
मुहर्रम का महीना और शहादत
अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का पूरा आयोजन इस्लामिक महीने मुहर्रम के दौरान किया जा रहा है. शिया इस्लाम में यह महीना शोक, धोखे और शहादत से जुड़ा है. सातवीं सदी में इमाम हुसैन की शहादत इस माह में हुई थी. ये शिया धर्म में बेहद ऊंचा स्थान रखते हैं. खामेनेई का वंश उनसे संबंधित माना जाता है.
अली खामेनेई 37 साल तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे. वे पश्चिम के विरोध का चेहरा बने रहे.अमेरिका ने 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन उनकी हत्या कर दी थी. अब उनके जनाजे को ईरान के तीन अहम शहरों और पड़ोसी इराक के शिया धर्म के पवित्र स्थलों में 'विजय जुलूस' की राह पर ले जाना लक्ष्य है.
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