अक्सर महिलाएं तब गुस्सा होती हैं, या चिढ़ती हैं या इमोशनल होती हैं, तो उनके पार्टनर या आसपास के लोग सवाल करते हैं कि पीरियड्स की वजह से चिढ़ रही हो। या तुमको पीरियड्स आए हैं क्या। हालांकि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को मूड स्विंग्स होते हैं। कई बार उनका छोटी-छोटी बातों पर रोना आता है या तेज गुस्सा आता है। लेकिन महिलाओं के इमोशंस को पीरियड्स से जोड़ देना सही नहीं है।
इसका महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर भी असर होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा हैं कि इस तरह के कमेंट्स किस तरह से महिलाओं की मेंटल हेल्थ को प्रभावित करते हैं।
महिलाएं व्यक्त नहीं कर पातीं अपनी फीलिंग्स
पीरियड्स होने से पहले भावनात्मक बदलावों को यह कहकर टाल देना कि 'तुमको तो पीरियड हो रहा है' या फिर उनके इमोशनल होने को पीरियड से जोड़ देना गलत होता है। भले ही पीरियडस में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर मूड पर पड़ता है। लेकिन सभी भावनात्मक प्रतिक्रियाएं बायोलॉजिकल नहीं होती हैं। वहीं सभी महिलाओं में एक तरह के लक्षण भी नहीं दिखते हैं।
जब महिलाओं द्वारा अपनी फीलिंग्स शेयर करने पर उसको पीरियड्स से जोड़ दिया जाए, तो कई बार महिलाएं मदद लेने से हिचकिचा जाती हैं। इस तरह से वह अपने इमोशंस को अपने मन में रखती हैं। जिसका उनकी मेंटल हेल्थ पर भी असर होता है।
हर बात को हार्मोन से जोड़ना
महिलाओं की हर बात, नाराजगी या गुस्से को सिर्फ हार्मोन्स से जोड़ देना बात की गंभीरता को खत्म करता है। इससे वह खुद में बुरा महसूस करने लगती हैं।
कम होने लगता है आत्मविश्वास
जब कई बार आप महिलाओं की असल परेशानी को इस तरह से नकार देते हैं, तो महिलाओं का सेल्फ कॉन्फिडेंस भी कम होने लगता है। उनको ऐसा महसूस होता है कि शायद उनका गुस्सा या इमोशंस सही नहीं है। जिस कारण वह खुद को कम आंकने लगती हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
साथ ही एक बात का और भी ध्यान रखना चाहिए कि पीरियड्स के दिनों में ज्यादा मूड स्विंग्स होना सही नहीं है। भले ही पीएमएस नॉर्मल है। लेकिन प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर या मूड डिसऑर्डर जैसी स्थितियां नॉर्मल नहीं हैं अगर इमोशंस पर काबू करना मुश्किल हो जाता है और रोजाना के कामों में भी मुश्किल होने लगे, तो इस चीज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए।
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ठंड के मौसम में अक्सर लोगों को एड़ियों के फटने और रूखेपन की समस्या होती है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनको हर मौसम में फटी एड़ियों की शिकायत बनी रहती है। इसकी वजह न सिर्फ मौसम बल्कि कुछ सामान्य लापरवाहियां भी एड़ियों को तंग करती है। हवा में खुश्की होने की वजह स्किन से नमी कम होना लाजमी है। अधिकतर एसी में रहने या ठंड के मौसम में ऐसा होना एक सामान्य प्रोसेस है। लेकिन अगर मॉइश्चराइज न किया जाए, तो एड़ियां खुरदरी और फटने लगती हैं।
मौसम की मार के अलावा जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं या फिर एड़ियों की देखरेख में लापरवाही बरतते हैं। तब भी एड़ियों के फटने की समस्या होती है, जोकि किसी भी मौसम में हो सकती है। शुरूआत में एड़ियां रूखी बनी रहती है। वहीं समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो एड़ियों में गहरी दरारें आना शुरू हो जाती हैं और इनमें दर्द भी होता है। कई बार गंभीर स्थितियों में एड़ियों से खून आने लगता है।
क्यों होती है क्रैक्ड हील की समस्या
ज्यादा नहाने, खुश्क मौसम या हार्श सॉप की वजह से एड़ियों की नमी खोने लगती है।
सख्त फर्श पर लंबे समय तक खड़े रहने से।
नंगे पैर ज्यादा देर तक चलने से।
सही फिटिंग का फुटवियर न होने पर या पीछे से फुटवियर खुला होने पर।
मोटापा, इससे भी एड़ियों पर अधिक भार पड़ता है।
बढ़ती उम्र में भी नेचुरल रूप से स्किन की इलास्टिसिटी कम होने लगती है।
साइरोसिस, फंगल इंफेक्शन या एग्जिमा होना पर।
हाइपोथायरॉएडिज्म या डायबिटीज जैसी बीमारियां होने पर।
ये आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार
एड़ियों को मेटल के स्क्रबर से घिसना।
एड़ियों पर ज्यादा स्क्रबर करना।
रोजाना ज्यादा गर्म पानी से नहाना।
ऐसे फुटवियर पहनना जो सख्त हों और तलवों के लिए कुशन नहीं होता है।
शुरूआत में एड़ियों के रूखेपन को नजरअंदाज करना।
लंबे समय तक नंगे पैर चलना या पैर घिसकर चलना।
नहाने के बाद मॉइश्चराइजर या फुट केयर न करना।
किसे होती है क्रैक हील की सबसे ज्यादा समस्या
अक्सर ज्यादा वेट वाले या मोटे लोगों में क्रैक हील की समस्या होती है। क्योंकि शरीर का भार एड़ियों पर आता है और इससे उन पर दबाव पड़ता है। जिन लोगों को लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है और उनको भी फटी एड़ियों की समस्या होती है। इनमें फैक्ट्री कर्मचारी, सेल्स मैन, टीचर और महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा डायबिटीज जैसी समस्याएं या एग्जिमा जैसी स्किन की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को क्रैक हील की समस्या हो सकती है।
लाइफस्टाइल संबंधी समस्याएं
ज्यादातर महिलाएं पीछे से खुली चप्पलें पहनती हैं, जिनमें एड़ियां ढकी नहीं रहती हैं।
लगातार पानी में रहकर काम करने से।
जेनेटिक्स की वजह
रोजाना मॉश्चराइजर लगाए बगैर बार-बार पेडिक्योर कराना।
हार्मोन या मेनोपॉज में बदलाव की वजह से।
ऐसे रखें एड़ियों का ख्याल
आप हर मौसम में फटी एड़ियों से बचने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं और बदलाव करेंगे। इससे रूखी और फटी एड़ियां ठीक होंगी और हील्स भी क्रैक होने से बचेंगी।
दिन में दो बार एड़ियों पर मॉश्चराइजर लगाएं। मॉश्चराइजर में ग्लिसरीन, यूरिया, सेरामाइड और लैक्टिक एसिड जैसी चीजें होती हैं।
पैर धोने या फिर नहाने के बाद पैरों को पोंछने के बाद मॉश्चराइजर लगाना चाहिए।
सप्ताह में एक या दो बार प्यूमिक स्टोन से एड़ियों को स्क्रब करें, इससे डेड स्किन हट जाएगी।
वहीं नंगे पैर रहने से बचना चाहिए।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
रात को सोने से पहले फुट क्रीम लगाना न भूलें।
बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहाने से बचना चाहिए।
अगर नियमित देखरेख की जाए, तो एड़ियों को फटने से बचाया जा सकता है। नियमित देखरेख और रूखेपन की शुरूआत में ही अगर आप एहतियात बरतती हैं, तो क्रैक हील की शिकायत नहीं होगी। लेकिन अगर एड़ियों में ज्यादा समस्या है और दरारें गहरी हो गई हैं और उनमें खून आता है या तेज दर्द होता है। तब आपको डर्मेटोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ती है।
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