कैसे बीएटी-बीएमएस और इसके जैसे ऐप के माध्यम से दूर से ही स्विच ऑफ हो रहे थे ई-रिक्शा, सरकार ने किया बैन
नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। सोशल मीडिया पर ऐप के माध्यम से दूर से ही ई-रिक्शा स्विच ऑफ करने के कई वीडियो वायरल होने के बाद चीनी ऐप बीएटी-बीएमएस को मिलाकर कई ऐप जांच के दायरे में आ गए हैं। इसकी वजह सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और ऐप के दुरुपयोग की संभावनाएं हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से बीएटी-बीएमएस समेत लॉसिगी और एपोच आई-आयन ऐप हटाने का आदेश दिया है।
बीएटी-बीएमएस को चीन की शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी ने ब्लूटूथ-आधारित लिथियम-आयन बैटरी के लिए बनाया था।
ऐप को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि बैटरी मालिक वोल्टेज, करंट, तापमान, चार्जिंग साइकिल और बैटरी की कुल सेहत जैसे जरूरी पैरामीटर्स को रियल-टाइम में मॉनिटर कर सकें।
इसके अलावा, यह ऐप यूजर्स को बैटरी के कुछ फीचर्स को मैनेज करने की सुविधा भी देता है, जिसमें रखरखाव और सुरक्षा के लिए बैटरी के डिस्चार्ज फीचर्स को चालू या बंद करना शामिल है।
भारत में कई ई-रिक्शा बनाने वाली कंपनियां ब्लूटूथ-आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) वाली लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल करती हैं। कई ई-रिक्शा में ये सिस्टम बिना पासवर्ड सुरक्षा के लगाए जाते हैं या फैक्टरी-डिफॉल्ट सेटिंग्स के साथ ही काम करते रहते हैं।
इससे 10 से 20 मीटर की रेंज के साथ ब्लूटूथ ऑन रहता है। कोई भी व्यक्ति बीएटी-बीएमएस या इसके जैसे किसी अन्य ऐप का उपयोग करके ई-रिक्शा को स्विच ऑफ कर सकता है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए, एक ई-रिक्शा ड्राइवर ने बताया कि यह समस्या कुछ दिन पहले ही सामने आई, जब उसकी गाड़ी अचानक बंद हो गई।
ड्राइवर ने कहा, शुरू में हमें लगा कि गाड़ी में कोई खराबी है और हम उसे मैकेनिक के पास ले गए। जांच करने के बाद, उसने बताया कि कोई मैकेनिकल समस्या नहीं है। उसने कहा कि किसी ने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके बैटरी बंद कर दी थी।
उसके मुताबिक, मैकेनिक ने मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए बैटरी को फिर से कनेक्ट करने और फिर से शुरू करने के लिए लगभग 300 रुपए लिए।
उन्होंने कहा, उन्होंने अपने फोन पर ऐप खोला, बैटरी को फिर से चालू किया और गाड़ी दोबारा चलने लगी।
ड्राइवर ने दावा किया कि जब वह यात्रियों को ले जा रहे थे, तब यह समस्या फिर से हुई। जब मैं सड़क पर था, तो किसी ने इसे फिर से बंद कर दिया। हमें नहीं पता कि ऐसा कौन कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर बैटरी लॉक हो जाती है, तो इसे सिर्फ उसी ऐप से अनलॉक किया जा सकता है। हम ड्राइवर हैं, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नहीं, इसलिए हमें नहीं पता कि ऐसी समस्याओं से कैसे निपटा जाए।
हालांकि, यह खतरा सिर्फ उन गाड़ियों तक सीमित है जो दो शर्तें पूरी करती हैं। उनमें ब्लूटूथ-आधारित लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है, और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में पासवर्ड प्रोटेक्शन या सही ऑथेंटिकेशन की कमी होती है।
भारत में कई ई-रिक्शा अभी भी लेड-एसिड बैटरी पर चलते हैं, जिनमें ब्लूटूथ-इनेबल्ड बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होते और इसलिए उन पर इस समस्या का असर नहीं होता।
इसी तरह, नए लिथियम-आयन बैटरी सिस्टम जो मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन या प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें आम बैटरी मैनेजमेंट एप्लीकेशन के जरिए एक्सेस नहीं किया जा सकता।
वहीं, पैसेंजर कारों और अधिकतर ब्रांडेड इलेक्ट्रिक गाड़ियों में साइबर-सिक्योरिटी की कई परतें और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम व गाड़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन की सुविधा होती है, जिससे इस तरह का अनऑथराइज्ड एक्सेस काफी मुश्किल हो जाता है।
--आईएएनएस
एबीएस
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14 अरब डॉलर की मेगा डील से चमके HCLTech के शेयर, आई 5.6% की जोरदार तेजी
HCLTech Share Price: HCL टेक्नोलॉजीज के शेयरों में शुक्रवार 3 जुलाई को जबरदस्त उछाल देखा गया. शुरुआती कारोबार में शेयर में लगभग 5.6% की तेजी आई और यह NSE पर ₹1,139 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया. यह तेजी कंपनी को मिली एक बड़ी डील की खबर के कारण आई, जिससे निवेशकों में उत्साह बढ़ गया. खासतौर पर IT क्षेत्र की दिग्गज कंपनी HCLTech ने यूरोप में मुख्यालय वाली 'फॉर्च्यून ग्लोबल 50' कंपनी के साथ लगभग 1.14 बिलियन डॉलर की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की.
इस डील में क्या खास है?
कंपनी के अनुसार इस समझौते के तहत HCLTech क्लाइंट के ग्लोबल डिजिटल वर्कप्लेस एंटरप्राइज नेटवर्क ऑपरेशन्स को बदलने और उन्हें मैनेज करने के लिए AI-बेस्ड ऑपरेटिंग मॉडल तैयार करेगी. आसान शब्दों में कहें तो, HCLTech अब नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और मल्टीनेशनल कंपनी के कर्मचारियों के काम करने के तरीके को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी संभालेगी और इस पूरी पहल को AI फर्स्ट अप्रोच के साथ पूरा करेगी.
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कब तक कॉन्ट्रैक्ट चलेगा?
यह कॉन्ट्रैक्ट जुलाई 2026 से शुरू होकर दिसंबर 2031 तक चलेगा. यानी करीब साढ़े पांच साल की अवधि के लिए. इसके अलावा इसमें आगे 5 साल और बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है. सबसे अहम बात यह है कि रेगुलेटरी फाइलिंग में कंपनी ने साफ तौर पर बताया कि यह पूरी तरह से नया बिजनेस है. यानी यह किसी पुराने कॉन्ट्रैक्ट का रिन्यूअल या विस्तार नहीं बल्कि बिल्कुल नई डील है.
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह डील?
इसीलिए निवेशकों ने इसे बेहद पॉजिटिव तरीके से लिया. क्योंकि कंपनी लंबे समय से बड़ी डील्स की तलाश में थी ताकि ग्रोथ को लेकर भरोसा और मजबूत हो सके. बाजार की प्रतिक्रिया देखकर समझा जा सकता है कि यह डील कितनी बड़ी है. 1.14 अरब डॉलर की डील एचसीएलटेक जैसी बड़ी कंपनी के लिए भी छोटी बात नहीं है, और वह भी तब जब यह डील एक फॉर्च्यून ग्लोबल 50 कंपनी के साथ हुई हो. इससे यह भी संकेत मिलता है कि ग्लोबल आईटी खर्च में सतर्कता के बावजूद बड़ी कंपनियां एआई-आधारित ट्रांसफॉर्मेशन पार्टनरशिप में भारी निवेश करने को तैयार हैं.
जैस्परसॉफ्ट अधिग्रहण भी हुआ पूरा
इस बीच, एक अलग रेगुलेटरी फाइलिंग में HCLTech ने घोषणा की कि उसने क्लाउड सॉफ्टवेयर ग्रुप की बिजनेस यूनिट, जैस्परसॉफ्ट (Jaspersoft) का अधिग्रहण पूरा कर लिया है. फाइलिंग के अनुसार, यह डील 2 जुलाई, 2026 को शाम 7:25 बजे पूरा हुआ, और इसे 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी माना गया.
डील की टाइमलाइन
ध्यान देने वाली बात है कि इस अधिग्रहण की घोषणा सबसे पहले 22 दिसंबर, 2025 को की गई थी. दूसरे शब्दों में, घोषणा से लेकर डील पूरी होने तक लगभग 6 महीने का समय लगा. आपको बता दें कि दिसंबर में, HCLTech के सॉफ्टवेयर डिवीजन HCLSoftware ने जैस्परसॉफ्ट को खरीदने की अपनी इच्छा जताई थी. जैस्परसॉफ्ट इंडस्ट्री में एम्बेडेड एनालिटिक्स और पिक्सल-परफेक्ट रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती है. आसान भाषा में कहें तो यह ऐसे रिपोर्ट और डैशबोर्ड तैयार करने की सुविधा देता है जो बिल्कुल सटीक फॉर्मेट में हों. जो बैंकिंग और सरकारी जैसे रेगुलेटेड सेक्टर्स के लिए बेहद जरूरी होता है, जहां कंप्लायंस से जुड़ी रिपोर्टिंग में जरा भी चूक की गुंजाइश नहीं होती.
कंपनी की बड़ी रणनीति में जैस्परसॉफ्ट की भूमिका
कंपनी ने इस अधिग्रहण की वजह भी बताई है. HCLTech के अनुसार, उसके 'डेटा एंड AI' डिवीन (जो Actian ब्रांड के तहत काम करता है) में मेटाडेटा मैनेजमेंट, डेटा कैटलॉग और डेटा गवर्नेंस सॉल्यूशंस की मांग लगातार बढ़ रही है. पिछले 5 सालों में, इस डिवीन ने अपने एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट सॉल्यूशंस की बदौलत जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है.
एंड-टू-एंड डेटा मैनेजमेंट का लक्ष्य
जैस्परसॉफ्ट को शामिल करने के पीछे मकसद यह है कि ग्राहकों को एंड-टू-एंड और इमर्सिव डेटा मैनेजमेंट अनुभव दिया जा सके. साथ ही, कंपनी को जैस्परसॉफ्ट के मौजूदा डेवलपर इकोसिस्टम का भी फायदा मिलेगा, जिसमें दुनियाभर के डेटा इंजीनियर्स और आर्किटेक्ट्स शामिल हैं जो पहले से ही डेटा प्लेटफॉर्म बनाने और विस्तार देने के काम में जुटे हैं. यानी यह अधिग्रहण सिर्फ एक प्रोडक्ट खरीदने भर का नहीं है, बल्कि एक पूरी कम्युनिटी और डिस्ट्रिब्यूशन चैनल हासिल करने जैसा भी है.
जैस्परसॉफ्ट की खासियत
प्रोडक्ट की बात करें तो, जैस्परसॉफ्ट (Jaspersoft) एक मजबूत बिजनेस इंटेलिजेंस और रिपोर्टिंग टूलकिट देता है, जिससे कंपनियां इंटरैक्टिव डैशबोर्ड, बेहतरीन विजुअलाइजेशन और एकदम सटीक पिक्सेल-परफेक्ट रिपोर्ट बना सकती हैं. HCLTech ने अपने बयान में यह भी कहा कि जैस्परसॉफ्ट खासतौर पर रेगुलेटेड इंडस्ट्रीज में मजबूत पकड़ रखता है, और सरकारी BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस) सेक्टर में इसे पहली पसंद के तौर पर देखा जाता है, जहां रिपोर्टिंग की सटीकता और कंप्लायंस सिर्फ एक अच्छी बात नहीं बल्कि सख्त जरूरत होती है.
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के मकसद से है और इसे न्यूज नेशन की तरफ से निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश फैसले से पहले कृपया अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें.
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