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Power Stocks: केंद्र सरकार के एक फैसले से पावर कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट, चीन की कंपनियों से अब मिलेगी चुनौती
Power Stocks: शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को पावर सेक्टर के कई बड़े शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। केंद्र सरकार के एक फैसले के बाद निवेशकों ने इन कंपनियों में बिकवाली शुरू कर दी। सरकार ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट रखने वाली 4 चीनी कंपनियों को अहम बिजली परियोजनाओं से जुड़े सरकारी टेंडर में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी। इसके बाद बाजार को लगा कि घरेलू कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती।
इस खबर का सबसे ज्यादा असर सीजी पावर, हिताची एनर्जी, जीई वर्नोवा टीएंडडी, थर्मेस और भेल जैसे शेयरों पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान हिताची एनर्जी का शेयर करीब 7.7% गिरकर 31180 रुपये पर पहुंच गया, जबकि सीजी पावर में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई और इसका शेयर 900.75 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा।
वहीं, जीई वर्नोवा टीएंडडी मिडकैप शेयरों में सबसे ज्यादा टूटने वाला शेयर रहा और इसमें करीब 7.8% की गिरावट आई। थर्मेस में करीब 4 और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड में 2.4% की कमजोरी दर्ज की गई। स्मॉलकैप कंपनियों में जीई पावर इंडिया करीब 5 फीसदी और टीडी पावर सिस्टम्स के शेयर भी करीब 4 फीसदी फिसल गए। इस दौरान निफ्टी एनर्जी इंडेक्स भी करीब 1 फीसदी कमजोर रहा।
वित्त मंत्रालय के 24 जून के आदेश के मुताबिक टीबीईए एनर्जी, नैनजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और तकाई इलेक्ट्रिक इंडिया को सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में हिस्सा लेने की छूट दी गई है। यह छूट दो साल के लिए होगी और इसे भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक बिजली मंत्रालय ने जनवरी में इस छूट की सिफारिश की थी। सरकार का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ रही बिजली की मांग और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना जरूरी है। ऐसे में ज्यादा कंपनियों की भागीदारी से परियोजनाओं को गति मिल सकती है।
हालांकि बाजार का मानना है कि इस फैसले से भारतीय ग्रिड उपकरण बनाने वाली कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। टीबीईए एनर्जी अतिरिक्त हाई-वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर बनाती है, जबकि नैनजिंग इलेक्ट्रिक हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) परियोजनाओं के लिए इंसुलेटर और अन्य उपकरण तैयार करती है। वहीं तकाई इलेक्ट्रिक के पास 400/765 केवी जीआईएस उपकरणों के निर्माण की सुविधा है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा पर हुए संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों के सरकारी ठेकों में भाग लेने पर सख्त नियम लागू किए थे। इसके तहत चीन की किसी भी कंपनी को सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में हिस्सा लेने से पहले सुरक्षा और राजनीतिक मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया था। अब सरकार की इस सीमित छूट को बाजार ने घरेलू पावर उपकरण कंपनियों के लिए नई चुनौती के रूप में देखा है।
(प्रियंका कुमारी)
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