Friday Remedies: शुक्रवार को तिजोरी में रख दें ये 5 चीजें, मां लक्ष्मी की कृपा से खुल सकते हैं धन लाभ के नए रास्ते
Friday Remedies: शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और कुछ विशेष उपाय अपनाने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र में भी शुक्रवार को धन संबंधी उपायों के लिए बेहद शुभ बताया गया है।
मान्यता है कि यदि शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा के बाद कुछ शुभ वस्तुओं को तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखा जाए, तो आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगता है और घर में बरकत बनी रहती है। हालांकि इन उपायों को आस्था और श्रद्धा के साथ करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
नारियल का उपाय
शुक्रवार को मां लक्ष्मी को नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद नारियल को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
कौड़ियों का महत्व
धन की देवी लक्ष्मी से जुड़ी कौड़ियों को भी विशेष शुभ माना गया है। पूजा के दौरान सात कौड़ियां अर्पित कर उन्हें सुरक्षित तिजोरी में रखने से आर्थिक स्थिरता और शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।
तुलसी की मंजरी
हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है। शुक्रवार को लक्ष्मी-नारायण की पूजा में तुलसी की मंजरी अर्पित करने के बाद उसे लाल वस्त्र में बांधकर तिजोरी में रखने का प्रचलन है। इसे धन और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
चांदी का सिक्का
मां लक्ष्मी या भगवान गणेश की आकृति वाला चांदी का सिक्का पूजा के बाद तिजोरी में रखने को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे धन की स्थिरता बनी रहती है और व्यापार तथा नौकरी में लाभ के अवसर बढ़ते हैं।
हल्दी की गांठ
साबुत हल्दी को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। शुक्रवार को हल्दी की गांठ को पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक परेशानियां कम होने की मान्यता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों को पूरी श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक भाव के साथ किया जाए तो व्यक्ति को मानसिक संतोष के साथ-साथ जीवन में शुभ परिणाम मिलने की उम्मीद रहती है। हालांकि सफलता और समृद्धि के लिए परिश्रम, ईमानदारी और सही निर्णय भी उतने ही आवश्यक हैं।
July Ekadashi 2026: जुलाई में कब रखा जाएगा योगिनी और देवशयनी एकादशी व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
July Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है, जिनका धार्मिक महत्व अलग-अलग होता है। मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। आइए जानते हैं कि जुलाई 2026 में कौन-कौन सी एकादशी पड़ रही है और उनके शुभ मुहूर्त, पारण समय एवं धार्मिक महत्व क्या है।
जुलाई 2026 की पहली एकादशी: योगिनी एकादशी
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह एकादशी निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आती है तथा पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति का विशेष अवसर मानी जाती है।
योगिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 10 जुलाई 2026, सुबह 8:16 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 11 जुलाई 2026, सुबह 5:22 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 बजे से 5:24 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 1:10 बजे तक
योगिनी एकादशी व्रत पारण
- योगिनी एकादशी का पारण 11 जुलाई 2026 को किया जाएगा।
- पारण का शुभ समय: दोपहर 2:03 बजे से शाम 4:42 बजे तक
- हरि वासर समाप्त: सुबह 10:32 बजे
योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों में इस व्रत का पुण्य हजारों यज्ञों और असंख्य ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान बताया गया है। यह व्रत सुख-समृद्धि, आरोग्य और मानसिक शांति की कामना से भी किया जाता है।
जुलाई 2026 की दूसरी एकादशी: देवशयनी एकादशी
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसे हरिशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 25 जुलाई, शनिवार को रखा जाएगा।
देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026, सुबह 9:12 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:45 बजे से 5:29 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 1:11 बजे तक
देवशयनी एकादशी व्रत पारण
- देवशयनी एकादशी का पारण 26 जुलाई 2026 को किया जाएगा।
- पारण का समय: सुबह 6:13 बजे से 8:50 बजे तक
- द्वादशी तिथि समाप्त: दोपहर 1:57 बजे
देवशयनी एकादशी का महत्व
देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के योगनिद्रा में प्रवेश करने की मान्यता है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होता है, जो अगले चार महीनों तक चलता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है, जबकि जप, तप, दान, व्रत और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ चातुर्मास का समापन होता है।
जुलाई 2026 में श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु की आराधना के दो महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होंगे। 10 जुलाई को योगिनी एकादशी और 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक इन व्रतों का पालन करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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