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Sheikh Hasina: दिल्ली से शेख हसीना का पहला लाइव संबोधन, बोलते-बोलते हुईं भावुक, बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर उठाए गंभीर सवाल

Sheikh Hasina live address: नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपना पहला लाइव संबोधन दिया है। भाषण की शुरुआत करते ही शेख हसीना भावुक होकर रो पड़ीं। बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए उन्होंने कहा कि आज वह सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के तौर पर बात कर रही हैं।

अपने परिवार के सदस्यों को याद करते हुए वह काफी भावुक हो गईं, जिनमें से अधिकतर लोगों की हत्या साल 1975 में ढाका में शेख मुजीब के साथ ही कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था।

उन्होंने आगे कहा कि वह अपने देश से दूर हैं, लेकिन कभी भी अपने लोगों से अलग नहीं हुई हैं। उन्होंने और उनके परिवार ने बांग्लादेश के लिए लड़ाई लड़ी थी, और यह वह बांग्लादेश बिल्कुल नहीं है जिसके लिए 30 लाख लोगों ने अपनी जान कुर्बान की थी।

'यह कोटा का मामला नहीं था, सरकार बदलने की थी सोची-समझी साजिश'
जुलाई 2024 की घटनाओं का जिक्र करते हुए शेख हसीना ने कहा कि आइए अब सही बात सामने रखी जाए। यह पूरी तरह से एक झूठा प्रोपेगैंडा था। असली छात्रों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें बहकाया गया, लेकिन ऐसा उन समूहों ने किया जिनका अपना स्वार्थ था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला कभी कोटा का था ही नहीं, बल्कि इसकी असली योजना लोगों को सरकार बदलने के लिए उकसाने की थी। मोहम्मद यूनुस के अपने शब्दों ने ही सच को उजागर कर दिया है। उन्होंने यह मान लिया है कि यह बहुत सोच-समझकर और योजनाबद्ध तरीके से किया गया ऑपरेशन था, जिसका मुख्य मकसद बैलेट बॉक्स से चुनी गई व्यवस्था से सत्ता को छीनना था।

साजीब वाजेद जॉय का बड़ा आरोप: बांग्लादेश बन गया है 'दूसरा पाकिस्तान'
इस कार्यक्रम में शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय ने भी संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भी देश में हिंसा का दौर खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अगस्त 2024 के विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी हत्याओं का सिलसिला लगातार जारी रहा।

साजीब वाजेद जॉय ने संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा बताई गई मौतों की संख्या और सरकारी आंकड़ों के बीच के अंतर पर भी बड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक 'इंडेम्निटी' उपाय के तहत प्रदर्शनकारियों को छूट दी गई। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से अपील की कि वे सत्ता से हटने के बाद हुई हिंसा की बारीकी से जांच करें।

जॉय ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बांग्लादेश अब "एक और पाकिस्तान" बन चुका है, और यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिए भी चिंता का बड़ा विषय होना चाहिए।

पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी के बयान और वापसी की उम्मीद
नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में बांग्लादेश के पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार को हिंसक रूप से हटाए हुए 2 साल पूरे हो चुके हैं और बीते दो साल देश के लिए बेहद संकट भरे रहे हैं। इस दौरान एक विशेष विचारधारा के लोगों पर यातनाएं बढ़ी हैं।

उन्होंने कहा कि आज पूरे बांग्लादेश में लाखों आम नागरिक बढ़ती महंगाई से बुरी तरह पीड़ित हैं, युवाओं के लिए अवसरों में कमी आई है और धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा अन्य समूहों के लिए पब्लिक स्पेस काफी कम हो गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि देश इस स्थिति से बाहर निकले और इसी उम्मीद के साथ उनकी नेता (शेख हसीना) वापस लौटना चाहती हैं। उन्होंने साफ किया कि उनकी नेता किसी प्रकार का बदला नहीं चाहती हैं, बल्कि वे पुराने जख्मों को भरना और सिर्फ और सिर्फ इंसाफ चाहती हैं।

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Meta Controversy: PM मोदी का पोस्ट हटाने पर मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, 'Safe Harbour' पर सख्त संदेश

नई दिल्ली: Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में भारत सरकार से माफी मांगी है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने बैठक के दौरान अपने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM), Deepfake कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कमियों पर भी खेद जताया।

बुधवार को Meta की ग्लोबल टीम ने कंपनी के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान के नेतृत्व में केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव और IT सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। यह बैठक पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के बाद सरकार की ओर से जारी समन के बाद हुई।

'Safe Harbour' पर सरकार ने जताई सख्त आपत्ति
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक में अधिकारियों ने Meta को स्पष्ट किया कि कंपनी केवल एक 'इंटरमीडियरी' (Intermediary) की तरह काम नहीं करती, क्योंकि उसके एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचे और किसे अधिक प्रमोट किया जाए।

सूत्रों का कहना है कि इसी आधार पर सरकार ने Meta को बताया कि IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली 'Safe Harbour' सुरक्षा पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस सुरक्षा को समाप्त करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।

PM मोदी का पोस्ट हटाने पर क्या हुआ था?
23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर एक वीडियो फेसबुक पर साझा किया था। Meta ने बाद में स्वीकार किया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह वीडियो करीब पांच घंटे तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहा। कंपनी ने 28 जुलाई को बयान जारी कर कहा था कि कंटेंट गलती से हटाया गया था और बाद में बहाल कर दिया गया।

बैठक से पहले संसदीय समिति ने उठाए थे सवाल
Meta और केंद्र सरकार के बीच हुई बैठक से पहले सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कंपनी की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यदि कोई प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के जरिए यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किसे दिखाया जाएगा, तो उसे सिर्फ 'इंटरमीडियरी' नहीं माना जा सकता।

दुबे ने मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की थी। उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो IT Act की धारा 79 के तहत Meta को मिलने वाली 'Safe Harbour' सुरक्षा की समीक्षा की जानी चाहिए। यह संस्करण क्रोनोलॉजी के हिसाब से भी सही है और न्यूज़ फ्लो भी अधिक स्वाभाविक बनाता है।

CSAM और Deepfake पर भी उठे सवाल
बैठक में सरकार ने Meta के प्लेटफॉर्म पर CSAM, महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री और Deepfake कंटेंट को प्रभावी ढंग से रोकने में कथित कमियों पर भी चिंता जताई।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने कंपनी को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत में काम करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा और यूजर्स, विशेषकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है।

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  Sports

पाकिस्तान को पीटना अब आसान है, पूर्व गोल-कीपर का बड़ा बयान, वर्ल्ड कप के मैच में फिर जीतेगा हिंदुस्तान

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