बांग्लादेश में 10-10 घंटे बिजली कट रही:सरकार ने रात 8 बजे बाजार बंद करने का आदेश दिया, भारत से डीजल सप्लाई बढ़ाने की मांग
बांग्लादेश में बिजली संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। देश के कई हिस्सों में रोज 8 से 10 घंटे तक बिजली कट रही है। इसका सबसे ज्यादा असर राजधानी ढाका के बाहर ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है। तेज गर्मी और हीटवेव ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। बिजली की कमी से निपटने के लिए सरकार ने बुधवार से देशभर में शॉपिंग मॉल, बाजार और दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने का आदेश दिया है। बिजली संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने अब भारत से अतिरिक्त डीजल देने की मांग की है। गैस की कमी से 1,500 मेगावाट बिजली कम बनी बांग्लादेश में बिजली संकट की सबसे बड़ी वजह ईंधन की कमी है। खासकर प्राकृतिक गैस की कमी ने बिजली उत्पादन को प्रभावित किया है। बांग्लादेश अपने इस्तेमाल का 90% से ज्यादा तेल और करीब 30% गैस दूसरे देशों से खरीदता है। मौजूदा संकट के पीछे दो बड़ी वजहें… पहली वजह- अमेरिकी कंपनी एक्सेलरेट एनर्जी के LNG टर्मिनल में 21 जुलाई को आग लग गई। इसके बाद टर्मिनल बंद हो गया था। इस हफ्ते की शुरुआत में यहां कुछ काम दोबारा शुरू हुआ, लेकिन तब तक LNG की सप्लाई आधी रह गई थी। दूसरी वजह- समुद्र में खराब मौसम की वजह से कम से कम दो LNG जहाज टर्मिनल तक नहीं पहुंच पाए और अपना माल नहीं उतार सके। दूसरे देशों से आने वाली बिजली की सप्लाई भी कम हुई है। इन वजहों से बांग्लादेश में बिजली उत्पादन करीब 1,500 मेगावाट घट गया है। ग्रामीण इलाकों में ज्यादा कटौती बांग्लादेश में बिजली की सप्लाई छह वितरण कंपनियां करती हैं। राजधानी ढाका को फिलहाल उसकी जरूरत के मुताबिक बिजली मिल रही है। लेकिन ढाका के बाहर ग्रामीण इलाकों में करीब 80 बिजली सहकारी समितियां सप्लाई करती हैं। मयमनसिंह, बरिशाल, रंगपुर, सिलहट, राजशाही और खुलना में बिजली संकट का ज्यादा असर है। ज्यादातर इलाकों में रोज 3 से 5 घंटे बिजली कट रही है। वहीं खुलना में लोगों ने 9 से 10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायत की है। नाराज लोगों ने बिजली घरों पर हमला किया लगातार बिजली कटने से लोगों में गुस्सा भी बढ़ रहा है। कुछ इलाकों में नाराज लोगों ने बिजली से जुड़ी फैसिलिटी पर हमला किया है। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की भी खबरें सामने आई हैं। इसके बाद बिजली विभाग ने सुरक्षा के लिए पुलिस से मदद मांगी है। बिजली कटौती का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। खेती, रेस्टोरेंट और कारखानों का काम भी प्रभावित हो रहा है। किसानों को बिजली की जगह डीजल जनरेटर चलाने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। झींगा पालने वाले किसानों की परेशानी और ज्यादा है। बिजली जाने पर पानी में ऑक्सीजन पहुंचाने वाली मशीनें बंद हो जाती हैं। इससे पानी में ऑक्सीजन कम होने लगती है और झींगों के मरने का खतरा बढ़ जाता है। बांग्लादेश दुनिया में झींगा निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। देश के कपड़ा और गारमेंट उद्योग पर भी बिजली संकट का असर पड़ रहा है। यह सेक्टर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। बिजली बचाने के लिए सरकार ने लगाई पाबंदियां सरकार को फिलहाल बिजली संकट से जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है। इसलिए बिजली की खपत घटाने के लिए कई पाबंदियां लगाई गई हैं। ऐसा कदम बांग्लादेश में पहले भी उठाया जा चुका है। कुछ महीने पहले अप्रैल में ऊर्जा संकट बढ़ने के दौरान सरकार ने दुकानों और शॉपिंग मॉल को शाम 6 बजे तक बंद करने का आदेश दिया था। भारत से और ज्यादा डीजल की मांग बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने पिछले हफ्ते भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात के दौरान ज्यादा डीजल की मांग रखी थी। महमूद ने पत्रकारों से कहा कि भारत के साथ एक पाइपलाइन है, जिससे बांग्लादेश को डीजल मिलता है। उन्होंने भारत से इसकी सप्लाई बढ़ाने का अनुरोध किया है। भारत और बांग्लादेश के बीच इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन 2017 में शुरू हुई थी। दोनों देशों के बीच 15 साल का समझौता है। इसके तहत भारत को हर साल बांग्लादेश को 1.80 लाख मीट्रिक टन डीजल देना है। पश्चिम एशिया में हालिया संकट के दौरान भारत मार्च और अप्रैल में बांग्लादेश को पहले ही 30 हजार टन से ज्यादा डीजल भेज चुका है। ----------------- यह खबर भी पढ़ें… शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी: 2 साल बाद वर्चुअल भाषण दिया, कैमरा ऑफ था; बांग्लादेश सरकार बोली- दिल्ली में बैठकर जहर उगला बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। जब हसीना बोल रही थीं, उस दौरान उनका कैमरा बंद था। पूरी खबर पढ़ें…
मानसून सत्र का आज आखिरी दिन, कई बिल पास तो कुछ अब भी पेंडिंग, आखिरी दिन क्या होगा?
संसद के मानसून सत्र 2026 का आज आखिरी दिन है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच यह सत्र समाप्त होने जा रहा है। 20 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आज यानी 13 अगस्त को खत्म हो रहा है। लोकसभा के आधिकारिक कैलेंडर में इस पूरे सत्र के लिए कुल 19 बैठकें तय की गई थीं। इस पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखे मतभेद देखने को मिले। इसके कारण कई बार सदन की कार्यवाही भी बाधित हुई। विपक्ष ने लगातार अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए जवाब की मांग की, वहीं सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने और चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की। इस सत्र में मुख्य रूप से छात्रों के आंदोलन और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा छाया रहा। विपक्ष लगातार इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह से जवाब की मांग कर रहा था। इस मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि वह सदन में जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आज इस मामले पर उनके जवाब देने की संभावना है।
सत्र के दौरान विपक्ष ने छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ राम मंदिर चंदा चोरी के मामले को भी जोरदार तरीके से उठाया और सरकार से जवाब मांगा। हालांकि, सत्ता पक्ष का लगातार यही कहना रहा कि सरकार नियमों के तहत सभी जरूरी और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। इसलिए विपक्ष को हंगामा करने के बजाय सदन की कार्यवाही चलने देनी चाहिए। मानसून सत्र शुरू होने से पहले भी सरकार ने सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों से सदन को शांतिपूर्वक चलाने में सहयोग की अपील की थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से बुलाई गई इस सर्वदलीय बैठक में सरकार ने साफ किया था कि नियमों के दायरे में उठाए जाने वाले हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर वह चर्चा के लिए तैयार है।
कई अहम विधेयकों पर हुआ काम
अगर विधायी कामकाज की बात करें तो संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर काम आगे बढ़ाया गया है। इनमें एंटी पेपर लीक बिल, सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा विधेयक, केरल का नाम बदलने से संबंधित विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। हालांकि, सत्र के दौरान कुल 19 विधेयकों के पारित होने के दावे को आधिकारिक संसदीय रिकॉर्ड में अलग-अलग बिलों की वास्तविक स्थिति देखने के बाद ही अंतिम माना जाना चाहिए। बिना आधिकारिक सत्र-समापन रिपोर्ट के इस संख्या को पूरी तरह सही आंकड़ा बताना जल्दबाजी होगी।
कई बड़े बिल अब भी पेंडिंग
इसके साथ ही कई बड़े और महत्वपूर्ण विधेयक अब भी संसद के रिकॉर्ड में लंबित दिखाई दे रहे हैं। इनमें वर्ष 2026 का परिसीमन विधेयक शामिल है, जो फिलहाल लोकसभा के रिकॉर्ड में लंबित है। इसके अलावा फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन यानी FCRA संशोधन विधेयक 2026 भी पेंडिंग विधेयकों की सूची में बना हुआ है। गृह मंत्रालय से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विधेयक भी लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में अभी लंबित दिखाया गया है। आज 13 अगस्त को इस सत्र की 19वीं और आखिरी बैठक हो रही है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि आखिरी दिन सदन में कितना विधायी काम हो पाता है। पूरे सत्र में तीखी राजनीतिक बहस के साथ कई विधायी काम जरूर हुए, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के कारण सदन का कामकाज प्रभावित भी हुआ। इसकी अंतिम तस्वीर सत्र के समापन के बाद जारी होने वाली आधिकारिक रिपोर्ट से ही पूरी तरह साफ हो पाएगी।
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