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Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र का लेखा-जोखा! जानिए कितने विधेयक हुए पास और कितने रह गए पेंडिंग

​संसद का यह मॉनसून सत्र शुरुआत से ही देश की राजनीति का सबसे बड़ा गर्म केंद्र बना रहा। नीट (NEET) परीक्षा में धांधली, युवाओं के प्रदर्शन, महंगाई, सुरक्षा मामलों और राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी बहसों को लेकर विपक्ष ने दोनों सदनों में तीखा रुख अपनाया। विपक्षी सांसद लगातार वेल में आकर नारेबाजी और तख्तियां लहराते रहे।

दूसरी तरफ, सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बाकायदा पत्र लिखकर कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दों और नीट परीक्षा पर किसी भी नियम के तहत जितने समय तक चाहें चर्चा कराने को तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी बार-बार अपील की, लेकिन गतिरोध समाप्त नहीं हो सका। इस भारी विरोध के बीच भी सरकार ने प्रशासनिक, बजटीय और कानूनी सुधारों से जुड़े 12 महत्वपूर्ण बिलों को संसद की मंजूरी दिला दी।

मानसून सत्र में कौन-कौन से प्रमुख विधेयक हुए पारित?

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक, साल्वर गैंग, नकल और संगठित साइबर अपराध को रोकने के लिए इसे और कड़ा किया गया है। इसके तहत दोषियों को भारी जुर्माने के साथ-साथ गैर-जमानती धाराओं के तहत सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026
 सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जजों की स्वीकृत क्षमता बढ़ाई गई है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर अन्य जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 (CJI सहित कुल 38) करने का प्रावधान शामिल है।

केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026
संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करते हुए दक्षिणी राज्य 'केरल' का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने के प्रस्ताव को संसद ने सर्वसम्मति/ध्वनिमत से पारित कर दिया।

जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
देश के सभी नागरिकों के जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड को डिजिटल और केंद्रीयकृत डेटाबेस से जोड़ना। देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बनाया गया है।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC संशोधन) विधेयक, 2026
सहकारिता मंत्रालय के अधीन आने वाले NCDC के दायरे को बढ़ाना, जिससे देश भर की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और सहकारी क्षेत्रों को आसानी और तेज़ी से फंड दिया जा सके।

न्यायाधिकरण सुधार (संशोधन) विधेयक, 2026 (Tribunal Reforms Bill)
देश के 16 प्रमुख ट्रिब्यूनल्स (जैसे- इनकम टैक्स, कंज्यूमर, एनजीटी, आर्म्ड फोर्सेज) में खाली पड़े पदों की भर्ती और उनके कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए एक 'राष्ट्रीय अधिकरण आयोग' (National Tribunals Commission) का गठन किया जाएगा।

कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 (Taxation Laws Bill)
 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के नियमों में संशोधन। औद्योगिक विनिर्माण और बिजनेस इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए टैक्स असेसमेंट की प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है।

आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026
अध्यादेश की जगह लेने वाला यह कानून विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और अंतरराष्ट्रीय बैंकों के लिए सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) के लेन-देन पर कर छूट की प्रक्रियाओं को स्पष्ट करता है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 (MSME Bill)
छोटे और मध्यम उद्योगों के बकाये भुगतानों (Delayed Payments) के विवादों को तय समय सीमा के भीतर हल करने और राज्य स्तरीय सुविधा परिषदों को अधिक अधिकार देने से संबंधित।

खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026
क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की खोज और खनन में निजी व स्वदेशी कंपनियों को आधुनिक तकनीक के साथ लाइसेंस और नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने की छूट देना।

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026
1971 के मूल कानून में बदलाव कर राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों के असम्मान पर कानूनी दंड को और कड़ा किया गया है।

बैंककार बही साक्ष्य (संशोधन) विधेयक, 2026 (Bankers' Books Evidence Bill)
डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और बैंक डेटा के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को अदालतों में प्राथमिक साक्ष्य के रूप में कानूनी मान्यता देने का प्रावधान। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक, साल्वर गैंग, नकल और संगठित साइबर अपराध को रोकने के लिए इसे और कड़ा किया गया है। इसके तहत दोषियों को भारी जुर्माने के साथ-साथ गैर-जमानती धाराओं के तहत सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

सरकार की लिस्ट में से जो प्रमुख विवादित और बड़े बिल पास नहीं हो सके

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Bill)
​स्थिति: JPC (संयुक्त संसदीय समिति) के पास समीक्षा के लिए अटका हुआ है।

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025/2026 (VBSA Bill)
स्थिति: UGC/AICTE को खत्म करने से जुड़ा बिल, JPC के पास लंबित है।

​परिसीमन विधेयक, 2026 (Delimitation Bill)
​स्थिति: लोकसभा पटल पर विचारणाधीन (Pending) रह गया।

​131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026
​स्थिति: लोकसभा सीटों के पुनर्गठन और महिला आरक्षण से जुड़ा प्रस्ताव गिर/अटक गया।

130वां संविधान संशोधन विधेयक
​स्थिति: 30 दिन जेल में रहने पर पीएम/सीएम को हटाने वाला बिल जेपीसी (अपरजिता सारंगी समिति) के पास पेंडिंग है।

​भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI संशोधन) विधेयक, 2026
​स्थिति: पेंडिंग लिस्ट में दर्ज।

​कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Corporate Laws Bill)
​स्थिति: पेंडिंग लिस्ट में दर्ज।

प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 (Securities Markets Code)
​स्थिति: पेंडिंग लिस्ट में दर्ज।

परिसीमन विधेयक पर क्या रहा ताजा अपडेट?
इस सत्र में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला विषय 'परिसीमन विधेयक 2026' (Delimitation Bill, 2026) और 131वां संविधान संशोधन विधेयक रहा। इन प्रस्तावों में 2011 की जनगणना के आधार पर देश में लोकसभा सीटों की संख्या (जो वर्तमान में 543 है) को बढ़ाकर 815 या 850 तक करने और महिला आरक्षण को इसके साथ लागू करने का प्रावधान शामिल है।

हालांकि, राज्यों के प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों के बाद इस बिल पर गहन मंथन जारी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े तकनीकी पहलुओं को सुलझाने के लिए सरकार विशेष सत्र या सर्वदलीय बैठक के माध्यम से रास्ता निकाल सकती है।

हंगामे और वॉकआउट के बीच ऐसा रहा सदन का कामकाज
मानसून सत्र के दौरान नीट पेपर लीक, महंगाई, राम मंदिर मामले और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई।

इसके चलते कई बार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार, हंगामे के बावजूद सरकार ने अपने प्रमुख बजटीय और विधायी एजेंडे को पूरा करने का प्रयास किया, लेकिन कई नीतिगत विधेयकों पर व्यापक बहस न हो पाना चिंता का विषय बना रहा।

​'सदन में केवल राजनीतिक ड्रामा करने आए विपक्षी सांसद'- किरेन रिजिजू
​संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आंकड़े देते हुए बताया कि इस पूरे सत्र में लोकसभा की कार्य उत्पादकता (Productivity) महज 19 प्रतिशत के करीब रही। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा-

​"मैंने अपने 30 साल के लंबे संसदीय करियर में ऐसा गैर-जिम्मेदार और दिशाहीन विपक्ष नहीं देखा। विपक्ष का इरादा चर्चा करना था ही नहीं, वे केवल हाथ में तख्तियां लेकर मीडिया के सामने ड्रामा करने आए थे। 12 में से 11 बिलों को हंगामे के बीच बिना बहस के पास कराना पड़ा, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर जाती है।"

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हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद संसद पहुंचा: खड़गे के आरोप पर राज्यसभा में हंगामा, नड्डा बोले- BJP का इससे कोई लेना-देना नहीं

नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद गुरुवार को संसद तक पहुंच गया। मानसून सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में खड़गे ने आरोप लगाया कि जिस मंच से उन्होंने 8 अगस्त को जनसभा को संबोधित किया था, वहां बाद में हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया गया। इस मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ।

खड़गे ने इसे गंभीर मामला बताते हुए सवाल उठाया कि “क्या लोकतंत्र में यही तरीका है?” उन्होंने इस मामले में कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। वहीं, केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच कराई जाएगी।

संसद में क्या बोले मल्लिकार्जुन खड़गे?
कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 8 अगस्त को जिस मंच से उन्होंने रैली को संबोधित किया था, वहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने "हवन" कर उस मंच का "शुद्धिकरण" किया।

खड़गे ने कहा, "उस समय वहां लाखों लोग मौजूद थे। मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया। मैंने सिर्फ वहां के लोगों की समस्याओं के बारे में बात की। लेकिन मेरे भाषण के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने हवन किया।"

कांग्रेस के इतिहास में दूसरे दलित नेता के तौर पर पार्टी की कमान संभालने वाले खड़गे ने आगे कहा, "क्या लोकतंत्र में यही तरीका है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं नेता प्रतिपक्ष हूं। मैं कभी इन मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहता था।"

'भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती': नड्डा
कांग्रेस सांसदों की जोरदार नारेबाजी के बीच राज्यसभा के सभापति ने खड़गे को शांत करने की कोशिश करते हुए इस बात पर जोर दिया कि दुनिया में 'छुआछूत' से बड़ा कोई पाप नहीं है।

उन्होंने कहा, "इसकी निंदा होनी चाहिए। जिन्होंने यह किया है, उन्हें पकड़ा जाना चाहिए। इस पर कोई दो राय नहीं है।"

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस घटना से भाजपा को अलग करने की कोशिश करते हुए खड़गे को आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, "कृपया बार-बार यह मत कहिए कि हमने (भाजपा ने) यह किया। भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि वहां जो कुछ भी हुआ, उसकी निश्चित तौर पर जांच होगी। पार्टी अध्यक्ष खुद इस मामले को देखेंगे। यह हम सभी के लिए बेहद खेद की बात है कि आपकी भावनाएं आहत हुईं।"

इस पर खड़गे ने स्पष्ट किया कि वे इस घटना के लिए किसी को दोष नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं कह रहा हूं कि मामला दर्ज करें, उन्हें गिरफ्तार करें। हमारी यही मांग है।"

आखिर क्या है पूरा विवाद?
यह मामला उत्तराखंड में एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। इस 'शुद्धिकरण' समारोह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक पुजारी को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन कराते हुए देखा जा सकता है।

एक अन्य वीडियो में आयोजकों में से एक व्यक्ति यह कहते नजर आता है कि इस स्थान का धार्मिक महत्व है और इसे सख्ती से केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ही आरक्षित रखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक आयोजनों के लिए। TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनुष्ठान का बचाव करते हुए संगठन के एक सदस्य गिरीश चंद्र पांडे ने कहा कि खड़गे की रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारे "इस्लामिक नारों जैसे लग रहे थे।"

कांग्रेस और भाजपा में तीखी बयानबाजी
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि यह अनुष्ठान श्री राम सेना नामक संगठन ने करवाया, जिसे उन्होंने भाजपा से जुड़ा हुआ बताया। हालांकि भाजपा ने इस आरोप को खारिज कर दिया है।

गोदियाल ने दावा किया कि यह अनुष्ठान इसलिए कराया गया क्योंकि खड़गे दलित समुदाय से आते हैं, और उन्होंने भाजपा पर समाज में जातिगत विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने तो इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग तक कर डाली। प्रियंका ने कहा, "यह मानसिकता साफ तौर पर भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को दर्शाती है। इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए।"

इस घटना को लेकर राजद की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई, जिसने भाजपा पर ऐसे "जातिवादी कट्टरपंथियों" को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। राजद प्रवक्ता प्रियंका भारती ने ट्वीट करते हुए लिखा, "मनु की बर्बर संतान इस बात को हजम नहीं कर पा रही कि एक दलित देश के शीर्ष नेताओं में से एक है।"

हालांकि भाजपा ने इस समारोह के आयोजकों से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है।

वहीं दूसरी ओर, पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड के मंत्री और भाजपा प्रवक्ता खजान दास ने आरोप लगाया कि खड़गे की रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से सनातन समुदाय की "भावनाएं आहत" हुई होंगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामलीला मैदान एक धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान है, और वहां किसी अन्य धर्म से जुड़े नारे लगाए जाने से लोगों में नाराजगी पैदा हुई होगी।

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  Sports

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babar azam injury: इंग्लैंड दौरे पर मौजूद पाकिस्तान क्रिकेट टीम 19 अगस्त से हेडिंग्ले में पहला टेस्ट मैच खेलने उतरेगी. इससे पहले कप्तान बाबर आजम की चोट ने पाकिस्तान की नींद उड़ा रखी है. बाबर आजम दाहिने हाथ की चोट से जूझ रहे हैं, इसी को लेकर उनके पहले टेस्ट मैच में खेलने पर सस्पेंस बना हुआ है. हालांकि, अब खबर सामने आई है कि उनका पहले मुकाबले में खेलना मुश्किल है. Mon, 17 Aug 2026 23:30:37 +0530

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