Kangana Ranaut: Gen Z को ‘गटर’ कहने पर Kangana Ranaut ने दी सफाई, बोलीं- ‘खुद को कॉकरोच कहने वालों की बात की थी’
Kangana Ranaut On Genertaion Gutter Remark: एक्ट्रेस और BJP सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने ‘Generation Gutter’ वाले बयान को लेकर चर्चा में हैं। युवाओं और Gen Z को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर विवाद बढ़ने के बाद अब कंगना ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका बयान पूरे युवा वर्ग के लिए नहीं था, बल्कि कुछ खास लोगों के लिए था, जो खुद को ‘कॉकरोच’ कहते हैं।
सभी युवाओं की बात नहीं की
कंगना ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सभी युवाओं को ‘गटर’ का हिस्सा नहीं बताया था। कंगना के मुताबिक, उन्होंने सिर्फ उन लोगों की बात की थी, जो खुद को ‘कॉकरोच’ कहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई खुद को कॉकरोच कहता है, तो उसे यह कहे जाने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए कि कॉकरोच गटर में रहते हैं।
मैं खुद को कॉकरोच नहीं मानती
कंगना ने अपनी बात समझाते हुए कहा कि अगर कोई उन्हें कॉकरोच कहे और गटर में रहने की बात करे, तो वह इसका विरोध करेंगी, क्योंकि वह खुद को कॉकरोच नहीं मानती। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, उनके लिए गटर वाली बात कही गई थी। उनका दावा है कि उनका इशारा पूरे Gen Z या सभी युवाओं की ओर नहीं था।
ड्रग्स और सट्टेबाजी का भी किया जिक्र
कंगना ने कहा कि आज के समय में युवाओं के एक वर्ग में ड्रग्स, सट्टेबाजी, जुआ और डार्क वेब जैसी गतिविधियों को लेकर चर्चा होती है। किसी खास वर्ग की आलोचना करने का मतलब यह नहीं है कि पूरे युवा वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब उन्होंने कुछ लोगों या कुछ महिलाओं की बात की थी, तो इसे सभी युवाओं पर लागू क्यों किया जा रहा है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
कंगना का यह बयान जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के बाद सामने आया था। NEET-UG पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों के कुछ वीडियो पर कंगना ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर इन वीडियो को लेकर नाराजगी जाहिर की थी और प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों की भाषा पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘Generation Gutter’ कहा था।
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10 हार के बाद भी गंभीर के समर्थन में मिश्रा:कहा-कोच के साथ खिलाड़ियों को भी जिम्मेदारी लेनी होगी, रेड-बॉल क्रिकेट को देना होगा समय
भारतीय हेड कोच गौतम गंभीर के लिए अब तक का सफर आसान नहीं रहा है। टेस्ट में 10 हार के बाद भी पूर्व भारतीय लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने उनका समर्थन किया है। मिश्रा ने कहा कि इस दौर के लिए सिर्फ कोच को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों को भी ज्यादा जिम्मेदारी लेने की जरूरत है और गंभीर को रेड-बॉल क्रिकेट में समय मिलना चाहिए। व्हाइट-बॉल क्रिकेट में टीम इंडिया ने शानदार नतीजे दिए हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं। इसी वजह से टीम के कोचिंग सेटअप और खासतौर पर गंभीर की भूमिका पर चर्चा होती रही है। टेस्ट में गंभीर पर क्यों उठे सवाल गंभीर के कार्यकाल में न्यूजीलैंड ने भारत को घरेलू मैदान पर 3-0 से हराया, जबकि साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारत को घर में 2-0 की हार झेलनी पड़ी। भारत ने ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 3-1 से गंवाई। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज 2-2 से बराबर रही। मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप साइकिल में भी भारत की स्थिति फिलहाल मजबूत नहीं है। ऐसे में आने वाली टेस्ट सीरीज टीम के लिए बेहद अहम होने वाली हैं। मिश्रा ने कोच को दोष देने से इनकार किया लगातार खराब नतीजों के बीच अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग कोच रखने की चर्चा भी सामने आती रही है। मिश्रा इस सोच से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। मिश्रा ने कहा, कोच के लिए यह मुश्किल है। मुझे लगता है कि खिलाड़ियों को ज्यादा जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। कई सालों से एक कोच सभी फॉर्मेट के लिए रहा है। किसी भी कोच को समय देना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा, टेस्ट मैचों में हमारे पास कम अनुभव वाले नए खिलाड़ी हैं। कोच और खिलाड़ियों को साथ मिलकर काम करने और विकसित होने में समय लगता है। राहुल द्रविड़ का उदाहरण दिया अपनी बात समझाने के लिए मिश्रा ने राहुल द्रविड़ का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा, राहुल द्रविड़ को खुद को स्थापित करने में 1-1.5 साल लगे थे। उसके बाद प्रदर्शन में सुधार आया। मिश्रा के मुताबिक, इंटरनेशनल क्रिकेट में जगह मिलना ही काफी नहीं है। खिलाड़ियों को हालात के हिसाब से अपना खेल बदलना भी आना चाहिए। गंभीर को रेड-बॉल में और समय देने की मांग मिश्रा का मानना है कि गंभीर को टेस्ट क्रिकेट में अपनी योजनाएं लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट में समय दीजिए। उन्हें टीम के नए खिलाड़ियों को समझाने की जरूरत है। कोच और खिलाड़ी की भूमिका का फर्क बताते हुए मिश्रा ने कहा, कोच का काम मानसिक पहलुओं और स्किल्स पर काम करना है, लेकिन खिलाड़ियों को मैदान पर प्रदर्शन करना होता है। उन्होंने कहा, आपको दबाव लेना होता है, परिस्थितियों को समझना होता है। आपको समय बिताना होता है और परिस्थिति, खिलाड़ी, गेंदबाज और विकेट के अनुसार अपना खेल बदलना होता है।
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