पेरेंटिंग- बेटी हर छोटी बात पर रोती है:कोई चिढ़ाए तो लड़ती नहीं, रोने लगती है, क्या इतना टची होना सही है, उसे स्ट्रॉन्ग कैसे बनाएं?
सवाल- मैं कानपुर से हूं। मेरी 8 साल की बेटी बहुत संवेदनशील है। छोटी-छोटी बातों पर रोने लगती है, जैसे किसी ने कुछ कह दिया या गेम में हार गई। कोई थोड़ा–सा चिढ़ा भी दे तो वो जवाब देने या मुकाबला करने की बजाय रोने लगती है। स्कूल में भी बहुत जल्दी आहत हो जाती है। सब कहते हैं कि वह ‘बहुत कमजोर दिल की’ है। मेरी फिक्र ये है कि उसे स्ट्रॉन्ग कैसे बनाऊं। क्या इतना सेंसिटिव होना सही है? मैं इससे कैसे डील करूं। प्लीज गाइड मी। एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपकी चिंता वाजिब है। लेकिन सबसे पहले मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि संवेदनशील होना कोई कमजोरी नहीं है। दरअसल, कुछ बच्चे जन्म से ही भावनाओं को गहराई से महसूस करते हैं। अगर कोई उन्हें कुछ कह दे, दोस्त बात न करे, गेम में हार जाएं या टीचर कोई कमेंट कर दे, तो वे उसे लंबे समय तक याद रखते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि वे जिंदगी में कमजोर साबित होंगे। कई बार यही संवेदनशीलता आगे चलकर उन्हें दयालु, सहानुभूतिपूर्ण और समझदार इंसान बनाती है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि बच्ची को अपनी भावनाओं को मैनेज करना सिखाया जाए। आइए आपके सवाल पर विस्तार से बात करते हैं। बच्चे ओवर सेंसिटिव क्यों होते हैं? हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है। कुछ बच्चे मिलनसार होते हैं, तो कुछ शांत रहते हैं। इसी तरह कुछ बच्चे भावनाओं को बहुत गहराई से महसूस करते हैं। 8 साल की उम्र में बच्चे अभी भावनाओं को समझना और रेगुलेट करना सीख रहे होते हैं। ऐसे में अगर कोई बात उन्हें बुरी लग जाए, तो उनके लिए उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होता है। संवेदनशील बच्चे अक्सर- बच्चे की इस सेंसिटिविटी के पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं, ग्राफिक में देखिए- संवेदनशीलता कोई कमजोरी नहीं बहुत से माता-पिता यह मान लेते हैं कि जो बच्चा जल्दी रोता है या बातों को दिल पर ले लेता है, वह दिल का कमजोर है। जबकि ये सच नहीं है। संवेदनशील बच्चे अक्सर दूसरों की भावनाओं को बेहतर समझते हैं, उनमें सहानुभूति ज्यादा होती है और वे रिश्तों को गहराई से महसूस करते हैं। दूसरों की बातों का प्रभाव बच्चे अक्सर दूसरों की राय, प्रतिक्रिया और व्यवहार को खुद से जोड़कर देखने लगते हैं। किसी की आलोचना, मजाक या नाराजगी उन्हें वयस्कों की तुलना में ज्यादा प्रभावित कर सकती है। संवेदनशील बच्चे दूसरों के शब्दों और भावनाओं को अधिक गहराई से महसूस करते हैं। वे सबको खुश रखने की कोशिश करते हैं। छोटी-सी नकारात्मक टिप्पणी भी उन्हें आहत कर सकती है। ओवर सेंसिटिविटी बच्चे पर कुछ नेगेटिव प्रभाव भी डालती है। इसे ग्राफिक में देखिए- इसलिए बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि हर किसी की राय उनकी पहचान तय नहीं करती। धीरे-धीरे उनमें नकारात्मक बातों का हेल्दी तरीके से सामना करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। बच्चा रोए तो कैसे डील करें? ऐसी स्थिति में अक्सर माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया होती है, "बस करो, अब रोना बंद करो।" लेकिन रोते समय बच्चा सीखने की स्थिति में नहीं होता। उस समय उसका ब्रेन कई सारी भावनाओं से भरा होता है। इसलिए सबसे पहले उसकी भावनाओं को स्वीकार करें। उदाहरण के लिए, उससे कहें- जब बच्ची महसूस करेगी कि उसे समझा जा रहा है, तो उसका मन धीरे-धीरे शांत होगा। ध्यान रखें, भावनाओं को स्वीकारना और गलत व्यवहार को स्वीकारना, दोनाें अलग बातें हैं। आप उसकी उदासी को समझ सकते हैं। साथ ही उसे यह भी सिखा सकते हैं कि हर निराशा के बाद संभलना जरूरी है। समस्या से बचाना समाधान नहीं कई पेरेंट्स यह गलती करते हैं कि जब बच्चा किसी कारण से दुखी होता है ताे तुरंत उसकी समस्या हल करने लगते हैं। उदाहरण के लिए- अगर दोस्त ने कुछ कह दिया तो कहते हैं- "चलो मैं टीचर से बात करती हूं।" लेकिन बच्चे को जीवन में हमेशा हर समस्या, हर बुरी बात से बचाना संभव नहीं है। इसलिए बच्चे की हर छोटी–मोटी प्रॉब्लम सॉल्व करने की बजाय उसे कठिन भावनाओं को मैनेज करना सिखाएं। जैसेकि आप पूछ सकती हैं- इमोशंस को पहचानना सिखाएं बच्चे सिर्फ रोना जानते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि वे वास्तव में क्या महसूस कर रहे हैं। इसलिए उसे अपनी भावनाओं को पहचानना और उसे नाम देना सिखाएं। जैसेकि- जब बच्चा अपनी भावना को शब्दों में व्यक्त करना सीखता है, तो रोना धीरे-धीरे कम होने लगता है। उदाहरण के लिए वह कह पाएगा कि- यह भावनात्मक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संवदेनशील बच्चे को सपोर्ट करने के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। ग्राफिक में देखिए- आत्मविश्वास बढ़ाना जरूरी संवेदनशील बच्चे को इमोशनल सपोर्ट के साथ मजबूत आत्मविश्वास की भी जरूरत होती है। इसके लिए बच्चे की पसंदीदा हॉबीज को सपोर्ट करें, जहां उसे सफलता का अनुभव हो। जैसे- जब बच्चा किसी क्षेत्र में सफल महसूस करता है, तो धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी पहचान सिर्फ उसकी भावनाओं से नहीं, बल्कि उसकी खूबियों से भी है। पेरेंट्स कौन-सी गलतियां न करें? संवेदनशील बच्चे के साथ पेरेंट्स जाने-अनजाने में कुछ गलतियां करते हैं, जो स्थिति को और मुश्किल बना सकती हैं। सभी गलतियां ग्राफिक में देखिए- एक्सपर्ट की मदद कब लें? संवेदनशील होना सामान्य है। लेकिन अगर आपको लगे कि यह संवेदनशीलता धीरे-धीरे बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगी है, तो काउंसलर की सलाह लेना मददगार हो सकता है। इन स्थितियों में किसी चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर से बात करें। अगर बच्चा- अंत में यही कहूंगी कि आपकी बेटी संवेदनशील है। अभी उसे बदलने की नहीं, बल्कि समझने की जरूरत है। जब बच्ची यह महसूस करेगी कि उसकी भावनाएं गलत नहीं हैं तो वह धीरे-धीरे उसे मैनेज करना सीख जाएगी। याद रखिए, लक्ष्य उसे कम संवेदनशील बनाना नहीं है। लक्ष्य यह है कि वह अपनी संवेदनशीलता के साथ मजबूत बनना सीखे। पेरेंट्स का धैर्य, स्वीकार्यता और प्यार इस सफर में उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं। ……………… ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 13 साल की बेटी हकलाती है: बच्चे मजाक उड़ाते हैं, क्लास में कुछ बोलती नहीं, हमेशा चुप रहती है, हम उसे कैसे हेल्प करें? ‘द स्टटरिंग फाउंडेशन’ के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 1% यानी 8 करोड़ से ज्यादा लोग हकलाते हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह समस्या लगभग चार गुना ज्यादा होती है। करीब 5% बच्चे उम्र के किसी-न-किसी दौर में हकलाहट का सामना करते हैं। इनमें से लगभग 75% बच्चे बड़े होते-होते ठीक हो जाते हैं, जबकि करीब 1% में यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। आगे पढ़िए...
जरूरत की खबर- मानसून में जल्दी खराब होता इनवर्टर:हवा-नमी से बचाएं, बैटरी का पानी बदलें, एक्सपर्ट से जानें मेंटेनेंस के टिप्स
बारिश के मौसम में बिजली ज्यादा कटती है और इनवर्टर पर लोड बढ़ जाता है। ये मौसम इनवर्टर की बैटरी के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। हवा में नमी, सीलन, जंग, वोल्टेज फ्लक्चुएशन और बैकअप की जरूरत के कारण इनवर्टर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे इनवर्टर का परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकता है। कई लोग बैटरी में पानी, साफ-सफाई और सर्विसिंग से जुड़ी जरूरी बातें नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इनवर्टर के जल्दी खराब होने का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज समझेंगे कि मानसून में इनवर्टर को कैसे सुरक्षित रखें। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: आशीष जायसवाल, एनर्जी मैनेजर, ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी, भारत सरकार सवाल- मानसून में इनवर्टर जल्दी खराब क्यों होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या मानसून में इनवर्टर पर ज्यादा दबाव पड़ता है? जवाब- हां, इसकी मुख्य वजह ये है कि बारिश के मौसम में बिजली कटौती बढ़ जाती है। इसके कारण- सवाल- क्या नमी से इनवर्टर के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स खराब हो सकते हैं? जवाब- हां, इन टेक्निकल कारणों से ऐसा होता है- सवाल- मानसून में इनवर्टर की देखभाल और मेंटेनेंस कैसे करें? जवाब- सभी जरूरी टिप्स पॉइंटर्स से समझें- सवाल- इनवर्टर बैटरी में पानी क्यों डाला जाता है? जवाब- इन कारणों से बैटरी में पानी डाला जाता है- सवाल- बैटरी का पानी कितने दिन में चेक करना चाहिए? जवाब- सामान्य तौर पर हर 45-60 दिन में बैटरी का वाटर लेवल चेक करना चाहिए। मानसून और ज्यादा उपयोग के दौरान इसकी फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जा सकती है। सवाल- पानी कब बदलना या भरना चाहिए? जवाब- जब बैटरी का इलेक्ट्रोलाइट लेवल ‘मिनिमम’ मार्क से नीचे चला जाए, तब पानी भरना चाहिए। भरते हुए ध्यान रखना चाहिए कि- सवाल- क्या बैटरी का पूरा पानी बदलना पड़ता है? जवाब- आमतौर पर पूरा पानी नहीं बदला जाता। सिर्फ लेवल कम होने पर और पानी डालकर उसका लेवल पूरा किया जाता है। बैटरी में डिस्टिल्ड वाटर डाला जाता है। सवाल- क्या RO का पानी बैटरी में डाल सकते हैं? जवाब- नहीं। RO पानी में भी कुछ मिनरल्स हो सकते हैं। इसलिए केवल बैटरी-ग्रेड डिस्टिल्ड वाटर ही सुरक्षित है। सवाल- बैटरी में ज्यादा पानी भरने से क्या नुकसान है? जवाब- ओवरफिलिंग से एसिड बाहर आ सकता है, जिससे बैटरी और आसपास के हिस्सों को नुकसान हो सकता है। सवाल- मानसून में इनवर्टर की सफाई कैसे करें? जवाब- सूखे कपड़े से धूल साफ करें। टर्मिनल्स पर जंग दिखे तो उन्हें साफ करके ग्रीस लगाएं। सवाल- क्या इनवर्टर को ढककर रखना चाहिए? जवाब- नहीं। पूरी तरह नहीं ढकना चाहिए। इससे वेंटिलेशन रुकता है और गर्मी बढ़ सकती है। इससे बैटरी फटने का रिस्क हो सकता है। सवाल- इनवर्टर रखने की सही जगह क्या है? जवाब- सूखी, हवादार और ऊंची जगह सबसे बेहतर होती है। इसे सीधे फर्श पर रखने से नमी का असर बढ़ सकता है। सवाल- क्या इनवर्टर को दीवार से सटाकर रखना ठीक है? जवाब- नहीं, चारों तरफ थोड़ी जगह छोड़नी चाहिए ताकि गर्मी बाहर निकल सके। सवाल- क्या मानसून में जंग लगना सामान्य है? जवाब- हां, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जंग बढ़ने से करंट फ्लो प्रभावित होता है। सवाल- बैटरी टर्मिनल पर सफेद परत क्यों जमती है? जवाब- यह एसिडिक करप्शन होता है, जो नमी और गैस रिएक्शन की वजह से होता है। सवाल- क्या बारिश में इनवर्टर से करंट लगने का खतरा बढ़ जाता है? जवाब- हां, अगर वायरिंग खराब हो या नमी इनवर्टर के अंदर पहुंच जाए तो रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- इनवर्टर से स्पार्किंग क्यों होती है? जवाब- ढीले कनेक्शन, टर्मिनल में जंग या ओवरलोडिंग के कारण स्पार्किंग हो सकती है। सवाल- क्या इनवर्टर फट भी सकता है? जवाब- हां, खराब वेंटिलेशन, गलत चार्जिंग या गैस जमा होने पर बैटरी ब्लास्ट का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- कैसे पता चलेगा कि बैटरी कमजोर हो रही है? जवाब- बैटरी कमजोर होने पर कुछ कॉमन संकेत दिखते हैं। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- इनवर्टर बैटरी की एवरेज लाइफ कितनी होती है? जवाब- सामान्य तौर पर 3-5 साल, लेकिन सही मेंटेनेंस से यह ज्यादा समय तक भी चल सकती है। सवाल- क्या लगातार ओवरलोडिंग से नुकसान होता है? जवाब- हां, जरूरत से ज्यादा उपकरण चलाने पर बैटरी जल्दी खराब हो सकती है। सवाल- मानसून में कौन-से उपकरण इनवर्टर पर नहीं चलाने चाहिए? जवाब- इनवर्टर पर भारी लोड वाले उपकरण नहीं चलाने चाहिए। नीचे ग्राफिक में उपकरणों की पूरी सूची देखिए। सवाल- क्या लंबे समय तक इनवर्टर बंद रखना ठीक है? जवाब- नहीं, लंबे समय तक बंद रहने पर बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज हो सकती है। इससे उसकी एफिशिएंसी घटती है और वह जल्दी खराब हो सकती है। सवाल- क्या मानसून से पहले इनवर्टर की सर्विसिंग कराना जरूरी है? जवाब- हां, सर्विसिंग से बैटरी, वायरिंग और टर्मिनल की स्थिति चेक की जाती है, जिससे बारिश के मौसम में खराबी की आशंका कम रहती है। सवाल- सर्विसिंग कितने महीने में करानी चाहिए? जवाब- हर 6-12 महीने में सर्विसिंग करानी चाहिए, ताकि बैटरी, कनेक्शन और सिस्टम की एफिशिएंसी बनी रहे। सवाल- क्या लोकल मैकेनिक से सर्विसिंग कराना सुरक्षित है? जवाब- नहीं, केवल प्रशिक्षित और अनुभवी टेक्नीशियन से ही सर्विसिंग कराएं। गलत हैंडलिंग से बैटरी, वायरिंग या इनवर्टर खराब हो सकता है। सवाल- क्या इनवर्टर हमेशा ऑन रखने से बैटरी डैमेज होती है? जवाब- नहीं, अच्छी क्वालिटी वाले इनवर्टर में ऑटोमैटिक चार्ज कंट्रोल होता है, जो बैटरी को ओवरचार्जिंग और नुकसान से बचाता है। सवाल- क्या ज्यादा चार्जिंग से बैटरी फट सकती है? जवाब- हां, ओवरचार्जिंग से बैटरी गर्म हो सकती है, जिससे गंभीर नुकसान या दुर्घटना का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- क्या इनवर्टर बंद करके रखने से बिजली की बचत होती है? जवाब- हां, थोड़ी बिजली बच सकती है। लेकिन लंबे समय तक बंद रखने से बैटरी डिस्चार्ज होकर खराब भी हो सकती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- क्या वॉशिंग मशीन बालकनी में रखना सही: जानें मेंटेनेंस टिप्स, 12 सावधानियां, कितने दिनों में सर्विसिंग जरूरी वॉशिंग मशीन आज लगभग हर घर की जरूरत बन चुकी है। ज्यादातर घरों में यह आपको बालकनी में रखी मिलेगी। लोग जगह बचाने के लिए ऐसा करते हैं। यह सुविधाजनक तो है, लेकिन इसके नुकसान भी हैं। खुले स्पेस के कारण धूप, बारिश, नमी और धूल सबका असर सीधे मशीन पर पड़ता है। आगे पढ़िए…
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