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वंदे मातरम विवाद को लेकर मुसीबत में आईं सोनिया गांधी, दिल्ली के थाने में दी गई शिकायत; FIR की रखी मांग
Vande Mataram Controversy: देश भर में मनाए गए 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है. कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के खिलाफ राष्ट्रगीत वंदे मातरम के कथित अपमान को लेकर पुलिस में औपचारिक शिकायत दी गई है. यह शिकायत दिल्ली हाईकोर्ट के एक वकील ने दिल्ली के आईपी स्टेट थाने में दर्ज कराई है, जिसमें मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है.
15 अगस्त के दिन कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण और राष्ट्रगीत का गायन चल रहा था. उसी दौरान सोनिया गांधी के कुछ इशारे और हाव भाव कैमरे में कैद हुए. वीडियो फुटेज सामने आने के बाद यह आरोप लगाया जा रहा है कि राष्ट्रगीत के जारी रहने के दौरान उन्होंने नाराजगी जताई और अपने पास खड़े नेताओं को कुछ निर्देश देकर टोकने का प्रयास किया. हालांकि इस बात की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि उनकी नाराजगी की असली वजह क्या थी, लेकिन इसे लेकर अब कानूनी कदम उठाया जा चुका है.
पुलिस को दी गई शिकायत में क्या आरोप लगाए गए
थाने में दी गई शिकायत में पूरे घटनाक्रम का विस्तार से ब्योरा दिया गया है. शिकायतकर्ता के अनुसार, 15 अगस्त 2026 को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस का आधिकारिक कार्यक्रम चल रहा था. इस दौरान जब राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी मंच पर मौजूद थीं. मीडिया रिपोर्ट और सार्वजनिक हुए वीडियो में देखा गया कि गीत का शुरुआती हिस्सा गाए जाने के बाद सोनिया गांधी ने वहां उपस्थित लोगों की तरफ हाथ से इशारे किए और बातचीत की.
शिकायत में कहा गया है कि पहली नजर में उनके हाव भाव से ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें राष्ट्रगीत को आगे जारी रखने पर ऐतराज था. कई समाचार माध्यमों ने भी इस पर खबरें प्रसारित की हैं कि राष्ट्रगीत को पूरा गाए जाने पर आपत्ति जताई गई थी. वकील का कहना है कि सोनिया गांधी के इन इशारों, उनके व्यवहार और इसके पीछे की मंशा की असलियत क्या थी, यह केवल एक सक्षम जांच एजेंसी की निष्पक्ष जांच से ही साफ हो सकता है.
वीडियो फुटेज और बयानों पर उठाए गए सवाल
शिकायतकर्ता ने अपने शिकायती पत्र में एक और वीडियो फुटेज का हवाला दिया है. इसमें कहा गया है कि एक अन्य फुटेज में राहुल गांधी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि हम वंदे मातरम नहीं गा रहे हैं. शिकायत में यह तर्क दिया गया है कि राष्ट्रगीत के गायन के समय सोनिया गांधी के व्यवहार और राहुल गांधी के इस बयान को एक साथ जोड़कर देखने पर गहरी चिंताएं पैदा होती हैं.
शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि यदि जांच के दौरान ऐसा कोई आचरण जानबूझकर किया गया साबित होता है, तो यह राष्ट्रगीत के प्रति अनादर की श्रेणी में आएगा. यह देश के नागरिकों की भावनाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी का मामला बनता है. इसलिए पुलिस प्रशासन को बिना किसी देरी के मामले की सच्चाई सामने लानी चाहिए.
कानूनी प्रावधान और सजा के नियम
इस मामले में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है. इस संशोधित कानून के तहत राष्ट्रगान को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा की तरह ही राष्ट्रगीत को भी कड़ा कानूनी संरक्षण दिया गया है. कानून की संशोधित धारा तीन के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत को गाने से रोकता है या ऐसे गायन में शामिल सभा में बाधा डालता है, तो यह एक दंडनीय अपराध है.
इस प्रकार के कृत्य के लिए दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, आर्थिक जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ देने का कड़ा प्रावधान है. शिकायतकर्ता ने पुलिस से मांग की है कि वह घटना की तारीख और शिकायत की तारीख के आधार पर इस नए संशोधन की कानूनी स्थिति की पड़ताल करे और नियमों के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ाए.
इसके साथ ही शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के श्याम नारायण चौकसे बनाम भारत संघ मामले के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया गया है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट माना है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों के गायन को रोकने से जुड़ा कानून एक दंडात्मक नियम है, जो जानबूझकर बाधा पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति पर सख्ती से लागू होता है. अब देखना यह होगा कि पुलिस इस शिकायत पर क्या अगला कदम उठाती है.
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