हवलदार पंकज की तलाश के लिए मुख्यमंत्री ने दिए प्रभावी निर्देश, परिजनों की सोशल मीडिया पर गुहार का मुख्यमंत्री ने लिया स्वतः संज्ञान
चमोली की नीति घाटी में भारी बारिश के चलते उफान पर आए तमक नाले में लापता हुए BRO के हवलदार पंकज की तलाश को लेकर उनके परिजनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार से मदद की गुहार लगाई थी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिजनों की इस गुहार का स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं.
हरसंभव तेजी लाई जाए
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हवलदार पंकज की तलाश के लिए चल रहे खोज एवं बचाव अभियान पर लगातार नजर रखी जाए और अभियान में हरसंभव तेजी लाई जाए. सेना, BRO, ITBP, पुलिस, जिला प्रशासन, NDRF एवं SDRF की टीमें लगातार खोज अभियान में जुटी हैं.
लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा
हवलदार पंकज पिथौरागढ़ के निवासी हैं. पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी ने उनके परिजनों से संवाद कर उन्हें प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है. मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा भी परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है तथा खोज अभियान की प्रगति की निरंतर जानकारी ली जा रही है.
आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हवलदार पंकज के परिजनों से भी दूरभाष पर वार्ता कर उनका हाल जाना तथा उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार इस कठिन घड़ी में पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है. मुख्यमंत्री ने परिजनों को हवलदार पंकज की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने और परिवार को हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि हवलदार पंकज की तलाश के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है और परिवार को हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. संकट की इस घड़ी में सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ परिवार के साथ खड़ी है.
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में होगा बंपर इजाफा, 68 हजार से ज्यादा हो सकता है न्यूनतम मूल वेतन
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इन दिनों आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं. हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद उनकी मासिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी. इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम कड़ी फिटमेंट फैक्टर को माना जाता है, क्योंकि यही वह पैमाना है जो सीधे तौर पर कर्मचारियों के मूल वेतन का निर्धारण करता है. कर्मचारी संगठनों की तरफ से मांग उठ रही है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 किया जाए. अगर सरकार इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो वर्तमान में मिलने वाली 18 हजार रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर करीब 68,940 रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि यह अभी केवल कर्मचारियों की मांग और एक संभावित अनुमान है, सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है.
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और इसका गणित?
वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आसान शब्दों में समझें तो यह एक ऐसा गुणक या पैमाना है, जिसके जरिए पुराने वेतन ढांचे के मूल वेतन को नए वेतन ढांचे में बदला जाता है. जब भी नया वेतन आयोग आता है, तब कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन का संशोधन इसी के आधार पर किया जाता है. इसका सीधा फार्मूला होता है कि कर्मचारी के मौजूदा मूल वेतन को तय फिटमेंट फैक्टर से गुणा कर दिया जाता है. सातवें वेतन आयोग में सरकार ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर तय किया था. इसी आधार पर छठे वेतन आयोग की सात हजार रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर सीधे 18 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई थी.
मांग पूरी होने पर कितना होगा संभावित फायदा
अगर आठवें वेतन आयोग में कर्मचारी यूनियनों की 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग पर सहमति बन जाती है, तो बेसिक पे में बहुत बड़ा उछाल देखने को मिलेगा. वर्तमान की 18 हजार रुपये की न्यूनतम सैलरी को 3.83 से गुणा करने पर यह राशि लगभग 68,940 रुपये बनती है. इसका मतलब यह हुआ कि निचले स्तर के कर्मचारियों की भी न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग चार गुना तक बढ़ सकती है. हालांकि कर्मचारियों को यह ध्यान रखना होगा कि यह आंकड़ा अभी सिर्फ एक गणना है. जब तक आठवां वेतन आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को नहीं सौंपता और केंद्रीय मंत्रिमंडल इसे मंजूरी नहीं देता, तब तक किसी भी आंकड़े को तय नहीं माना जा सकता.
पहले से चौथे वेतन आयोग तक का ऐतिहासिक सफर
देश में सरकारी कर्मचारियों के वेतन संशोधन का इतिहास बहुत पुराना है. भारत में पहला वेतन आयोग आजादी से ठीक पहले साल 1946 में लाया गया था. उस समय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 55 रुपये और अधिकतम मूल वेतन दो हजार रुपये तय हुआ था. इसके बाद साल 1959 में दूसरा वेतन आयोग लागू हुआ, जिसमें न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 80 रुपये और अधिकतम सैलरी को तीन हजार रुपये किया गया. साल 1973 में तीसरे वेतन आयोग के आने पर न्यूनतम मूल वेतन 196 रुपये और अधिकतम वेतन 3,500 रुपये निर्धारित हुआ. इसके बाद साल 1986 में चौथे वेतन आयोग ने न्यूनतम बेसिक पे को 750 रुपये और अधिकतम बेसिक पे को बढ़ाकर आठ हजार रुपये कर दिया.
पांचवें से सातवें वेतन आयोग में बड़ा बदलाव
साल 1996 में पांचवां वेतन आयोग प्रभावी हुआ, जिसमें पहली बार 1.74 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया. इसके तहत कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 2,550 रुपये और अधिकतम सैलरी 26 हजार रुपये हो गई. साल 2006 में आए छठे वेतन आयोग में 1.86 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ, जिससे न्यूनतम बेसिक पे सात हजार रुपये और अधिकतम 80 हजार रुपये पर पहुंच गई. इसके बाद साल 2016 में सातवें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर के साथ न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे 18 हजार रुपये और अधिकतम सैलरी ढाई लाख रुपये तय की गई.
आठवें वेतन आयोग से टिकी बड़ी उम्मीदें
साल 1946 में मात्र 55 रुपये से शुरू हुआ न्यूनतम बेसिक सैलरी का यह सफर आज 18 हजार रुपये तक पहुंच चुका है. पिछले वेतन आयोगों के इतिहास को देखते हुए कर्मचारियों को पूरी उम्मीद है कि इस बार भी उनके वेतन में संतोषजनक बढ़ोतरी की जाएगी. हालांकि अंतिम निर्णय आयोग के गठन, उसकी सिफारिशों और सरकार के आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के बाद ही साफ हो पाएगा.
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