UN says health services under pressure in Venezuela after twin earthquakes | BBC News
The United Nations said tens of thousands of Venezuelans face hunger, homelessness and disease, as the country struggles with the aftermath of last week’s double earthquake. More than 1,900 people are now confirmed dead, tens of thousands of others are still unaccounted for. In the worst hit areas, the UN said basic services collapsed and foot shortages are widespread, with communication almost impossible. The BBC's Latin America correspondent Will Grant reported from the coastal town of Caraballeda in La Guaira - one of the hardest hit areas by the earthquakes. Subscribe to our channel here: https://bbc.in/bbcnews For the latest news download the BBC News app or visit BBC.com/news #Venezuala #BBCNews
Explainer: क्या आप जानते हैं द्रौपदी की ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि उन्हें पांचों पांडवों से करनी पड़ी शादी? जानिए विवाह की पूरी कहानी
Mahabharat Draupadi Marriage Secret: महाभारत केवल युद्ध की कहानी नहीं है. बल्कि यह धर्म, कर्म, रिश्तों और जीवन के गहरे सिद्धांतों को समझाने वाला महाग्रंथ भी है. इस ग्रंथ के कई प्रसंग आज भी लोगों के मन में उत्सहास पैदा करते हैं. इन्हीं में से एक सबसे मशहूर सवाल है कि आखिर द्रौपदी ने पांचों पांडवों से विवाह क्यो किया? क्या यह उनकी इच्छा थी? क्या उन्हें मजबूरी में ऐसा करना पड़ा? या फिर इसके पीछे कोई धार्मिक और दैवीय कारण था? आइए इस पूरे सवाल का जवाब विस्तार से जानते हैं.
कौन थीं द्रौपदी?
द्रौपदी, राजा द्रुपद की पुत्री थीं. उनका जन्म सामान्य तरीके से नहीं हुआ था. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, राजा द्रुपद ने द्रोणाचार्य से अपमान का बदला लेने के लिए एक विशेष यज्ञ कराया था. उसी यज्ञ की अग्नि से दो संतानों का जन्म हुआ. एक थे धृष्टद्युम्न और दूसरी थीं द्रौपदी. द्रौपदी को यज्ञसेनी भी कहा जाता है, क्योंकि उनका जन्म यज्ञ की अग्नि से हुआ था. वे बेहद सुंदर, बुद्धिमान और तेजस्वी मानी जाती थीं.
द्रौपदी के स्वयंवर में क्या हुआ?
जब द्रौपदी विवाह योग्य हुईं, तब राजा द्रुपद ने उनके लिए भव्य स्वयंवर का आयोजन किया. इसमें आर्यावर्त के कई बड़े राजा और योद्धा शामिल हुए. स्वयंवर की शर्त बेहद कठिन थी. एक घूमती हुई मछली की आंख को नीचे रखे पानी में उसका प्रतिबिंब देखकर निशाना लगाना था. कर्ण ने भी इस प्रतियोगिता में भाग लेना चाहा, लेकिन कुछ कथाओं के अनुसार द्रौपदी ने उन्हें सूतपुत्र कहकर प्रतियोगिता से रोक दिया. इसके बाद ब्राह्मण वेश में पहुंचे अर्जुन ने यह कठिन लक्ष्य भेद दिया और स्वयंवर जीत लिया.
फिर पांचों पांडवों से विवाह कैसे हुआ?
अर्जुन द्रौपदी को लेकर उस कुटिया में पहुंचे, जहां उनकी माता कुंती मौजूद थीं. पांडव रोज की तरह मां से बोले, "मां, देखिए आज हम क्या लाए हैं." कुंती उस समय अंदर थीं और बिना देखे ही उन्होंने कह दिया "जो भी लाए हो, आपस में बांट लो." जब कुंती बाहर आईं और उन्होंने द्रौपदी को देखा, तब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ. लेकिन उस समय माता के वचन को धर्म माना जाता था. उनके शब्दों को असत्य नहीं किया जा सकता था. यहीं से द्रौपदी के पांचों पांडवों से विवाह का प्रसंग शुरू हुआ.
क्या केवल कुंती के वचन ही कारण थे?
महाभारत के अनुसार केवल कुंती के वचन ही इसका एकमात्र कारण नहीं थे. इस विवाह के पीछे कई धार्मिक और दैवीय मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं. महर्षि व्यास ने बताया कि द्रौपदी का पांचों पांडवों से विवाह पूर्व निर्धारित था. यह केवल संयोग नहीं, बल्कि ईश्वर की योजना का हिस्सा था.
भगवान शिव के वरदान की कथा
एक लोकप्रिय धार्मिक कथा के अनुसार, अपने पूर्व जन्म में द्रौपदी ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. जब शिवजी प्रसन्न हुए तो उन्होंने वर मांगने को कहा. उस समय द्रौपदी ने आदर्श पति की कामना करते हुए पांच बार पति का वर मांग लिया. तब भगवान शिव ने कहा था कि अगले जन्म तुम्हें पांच गुणों वाले एक पति की जगह पांच अलग-अलग पति मिलेंगे. भगवान शिव ने कहा कि अगले जन्म में तुम्हें पांच गुणों वाले एक पति की जगह पांच अलग-अलग पति मिलेंगे. प्रत्येक पति में अलग-अलग श्रेष्ठ गुण होंगे. इसी वरदान की वजह से अगले जन्म में उनका विवाह पांचों पांडवों से हुआ.
पांचों पांडवों में कौन-सा गुण था?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रत्येक पांडव में अलग-अलग विशेषताएं थीं.
- युधिष्ठिर - धर्म और न्याय का प्रतीक.
- भीम - अपार शक्ति और साहस के धनी.
- अर्जुन - अद्वितीय धनुर्धर और वीर योद्धा.
- नकुल - सुंदरता, विनम्रता और अश्वविद्या में निपुण.
- सहदेव - ज्ञान, बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता के लिए प्रसिद्ध.
ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी को एक ही व्यक्ति में ये सभी गुण नहीं मिल सकते थे. इसलिए उन्हें पांचों पांडवों का साथ मिला.
क्या द्रौपदी की सहमति थी या फिर कोई मजबूरी?
महाभारत में यह प्रसंग कई नजरिए से देखा जाता है. ग्रंथ में यह उल्लेख मिलता है कि प्रारंभ में द्रौपदी इस निर्णय से आश्चर्यचकित थीं. हालांकि बाद में महर्षि व्यास ने उन्हें इस विवाह के दैवीय कारणों और धर्म की व्याख्या समझाई. इसके बाद उन्होंने इस विवाह को स्वीकार किया. आज के सामाजिक और कानूनी संदर्भ में इस घटना को नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह एक पौराणिक कथा है और उस समय की सामाजिक व्यवस्था, धार्मिक मान्यताओं तथा परिस्थितियां अलग थीं.
विवाह के बाद क्या नियम बनाए गए?
पांचों पांडवों के साथ विवाह के बाद एक महत्वपूर्ण नियम बनाया गया. द्रौपदी एक समय में केवल एक ही पांडव के साथ रहती थीं. प्रत्येक वर्ष उनके साथ रहने वाले पति का क्रम बदलता था. यदि कोई दूसरा भाई उस समय बिना अनुमति के उस कक्ष में प्रवेश करता, तो उसे निश्चित अवधि के लिए वनवास जाना पड़ता. इसी नियम के कारण एक बार अर्जुन को वनवास भी जाना पड़ा था.
महाभारत में द्रौपदी का महत्व
द्रौपदी केवल पांच पांडवों की पत्नी नहीं थीं, बल्कि महाभारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में उनकी गिनती होती है. उन्होंने हर कठिन परिस्थिति में साहस दिखाया. हस्तिनापुर की सभा में हुआ उनका चीरहरण महाभारत का सबसे मार्मिक प्रसंग माना जाता है. उसी घटना ने अंततः कुरुक्षेत्र के महायुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की. द्रौपदी ने अन्याय के सामने कभी हार नहीं मानी और हमेशा धर्म के पक्ष में खड़ी रहीं.
क्या यह घटना आज भी चर्चा का विषय है?
द्रौपदी का पांचों पांडवों से विवाह आज भी इतिहास, धर्म और साहित्य के विद्वानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. कुछ लोग इसे धर्म पालन का उदाहरण मानते हैं, तो कुछ इसे भगवान शिव के वरदान और पूर्वजन्म के कर्मों से जोड़कर देखते हैं. महाभारत के विभिन्न संस्करणों और पुराणों में इस प्रसंग की व्याख्या थोड़े-बहुत अंतर के साथ मिलती है, लेकिन अधिकांश कथाओं में कुंती के वचन, महर्षि व्यास की सलाह और भगवान शिव के वरदान को मुख्य कारण माना गया है.
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