बॉलीवुड की बड़ी फिल्मों के लिए कैसी की जाती है कास्टिंग? जानिए एक्टर के सेलेक्शन की पूरी इनसाइड स्टोरी
How Bollywood Films Casting Process Works: बॉक्स ऑफिस पर अक्स जब भी कोई फिल्म हिट होती है तो लोग अक्सर उसकी स्टोरी, गाने या स्टारकास्ट की तारीफ करते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि किसी फिल्म के लिए परफेक्ट सेलेक्ट करना भी उसकी कामयाबी की सबसे बड़ी वजहों में से एक होता है. कई बार शानदार स्टोरी भी गलत कास्टिंग की वजह से ऑडियंस को पसंद नहीं आती है. वहीं, नॉर्मल सी स्टोरी भी सही कास्टिंग की वजह से सुपरहिट बन जाती है. इसी वजह आज बॉलीवुड में कास्टिंग का पूरा सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा प्रोफेशनल और सिस्टेमेटिक हो चुका है. अब किसी बड़े रोल के लिए सिर्फ कॉन्टैक्ट या सिफारिश काफी नहीं होती, बल्कि कई दौर की जांच और टेस्ट के बाद ही किसी कलाकार को चुना जाता है. इस एक्सप्लेनर में कास्टिंग के बारे में विस्तार से जानते हैं-
कास्टिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी क्या होती है?
आज किसी भी बड़ी फिल्म के लिए कास्टिंग डायरेक्टर की रोल बेहद अहम होता है.हालांकि, पहले ऐसा नहीं था. 1990 के दशक तक ज्यादातर फिल्मों में डायरेक्टर और प्रोड्यूसर अपनी जान-पहचान के कलाकारों को ही लेते थे. लेकिन समय के साथ कास्टिंग डायरेक्टर एक अलग प्रोफेशन बन गया. आज मुकेश छाबड़ा, शानू शर्मा और नंदिनी श्रीकांत जैसे कास्टिंग डायरेक्टर फिल्मों के लिए कास्टिंग करते हैं. उनकी टीम का काम सिर्फ नए आर्टिस्ट ढूंढना नहीं होता, बल्कि यह देखना भी होता है कि कौन-सा कलाकार किस किरदार के लिए सबसे सटीक रहेगा. कई फिल्मों की कास्टिंग पर ही बहुत बजट लग जाता है.
कब से शुरू होती कास्टिंग की तैयारी
फिल्म की स्टोरी फाइनल होने के बाद उसकी स्क्रिप्ट कास्टिंग डायरेक्टर को दी जाती है. इसके बाद हर रोल के लिए अलग-अलग प्रोफाइल तैयार की जाती है. इस प्रोफाइल में किरदार की उम्र, कद-काठी, बोलने का तरीका, पहनावा लैंग्वेज और बैकग्राउंड जैसी बातें लिखी जाती हैं. इसके आधार पर तय किया जाता है कि रोल के लिए किस किसकी कास्टिंग की जाएगी. अगर कोई बड़ी फिल्म की सीक्रेट हो, तो उसके बारे में जानकारी पब्लिक नहीं की जाती. ऐसे मामलों में सिर्फ कुछ ही शानदार कलाकारों या टैलेंट एजेंसियों को ही कास्टिंग के लिए कहा जाता है.
हजारों लोगों में से कैसे की जाती है कास्टिंग
आज बड़ी कास्टिंग एजेंसियों के पास हजारों की तादाद कलाकारों का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद होता है. इसमें कलाकार की फोटो, वीडियो, उम्र, लंबाई, लैंग्वेज की जानकारी समेत कई स्किल्स दर्ज होती हैं.मान लीजिए किसी फिल्म में 25 साल के ऐसे कलाकार की जरूरत है जिसे घुड़सवारी आती हो और हिंदी के साथ पंजाबी भी बोलान जानता हो. कास्टिंग टीम अपने डेटाबेस में इसी के आधार पर सर्च करती है और हजारों आर्टिस्ट में से कुछ सौ लोगों को शॉर्टलिस्ट करती है. इसके बाद कलाकारों से उनकी स्लेट वीडियो मांगी जाती है. इसमें उन्हें कैमरे के सामने अपना नाम, उम्र, प्रोफाइल और लैंग्वेज बतानी होती है. जिससे कास्टिंग टीम ये जानने की कोशिश करती है कि वह उस किरदार के लिए कितना फिट है.
सेल्फ-टेप ऑडिशन क्या होता है
कोरोना वायरस के बाद बॉलीवुड के ऑडिशन प्रोसेस में काफी बदलाव आया है. इससे पहले कलाकारों को घंटों कास्टिंग डायरेक्टर के ऑफिस के बाहर लाइन में खड़ा रहना पड़ता था, लेकिन अब शुरुआती ऑडिशन ज्यादातर ऑनलाइन होते हैं.शॉर्टलिस्ट किए गए कलाकारों को स्क्रिप्ट का कुछ हिस्सा भेजा जाता है. जिससे उन्हें अपने किरदार को समझने में मदद मिले. इसे 'साइड्स' कहा जाता है. इसके बाद कलाकार अपने घर पर बैकग्राउंड में एक्टिंग का डेमो तैयार करके भेजता है. इसे सेल्फ-टेप कहा जाता है. कास्टिंग टीम इस वीडियो में कलाकार की एक्टिंग, आवाज, डायलॉग बोलने का तरीका और कैमरे पर उसकी प्रजेंस को जांचती हैं. इसी तरह उनके पास ऐसे कई वीडियो आते हैं. जिसके बाद वह अपना निर्णय लेते हैं.
स्टूडियो में होता है असली ऑडिशन
सेल्फ-टेप के बाद अगर कोई आर्टिस्ट सेलेक्ट हो जाता है तो उसके बाद उसे स्टूडियों में ऑडिशन के लिए बुलाया जाता है. यहां कास्टिंग डायरेक्टर और उनकी टीम आर्टिस्ट का ऑडिशन लेते हैं. एक ही सीन कई तरीकों से करवाया जाता है. कभी गुस्से में, कभी इमोशनल होकर और कभी नॉर्मल अंदाज में. इसका मकसद सिर्फ एक्टिंग देखना नहीं होता, बल्कि यह भी देखना होता है कि कलाकार डायरेक्टर की बातों को कितनी जल्दी सझने की काबलियत रखता है और उसी हिसाब से अपनी एक्टिंग में बदलाव कर सकता है या नहीं.
लुक टेस्ट और स्क्रीन टेस्ट क्यों जरूरी होता है?
अच्छी एक्टिंग के बाद भी किसी आर्टिस्ट का सेलेक्शन तय नहीं होता है. इसके बाद लुक टेस्ट और स्क्रीन टेस्ट होता है. इसके लिए आर्टिस्ट को फिल्म की कॉस्ट्यूम पहनाई जाती है और मेकअप किया जाता है. इतना ही उसे असली लाइटिंग में कैमरे के सामने शूट किया जाता है, जैसी फिल्म में इस्तेमाल होगी. कई बार कोई कलाकार एक्टिंग करने में अच्छा होता है, लेकिन उसका चेहरा उस किरदार से मैच नहीं खाता या जमता नहीं है तो उसके लिए बाहर कर दिया जाता है. दरअसल, कई बड़ी फिल्मों के लिए लुक कहानी के मुताबिक होना बहुत जरूरी होता है.
हीरो-हीरोइन की केमिस्ट्री भी होती है अहम
अगर फिल्म में रोमांस या रिलेशन को दिखाना हो तो केमिस्ट्री टेस्ट भी किया जाता है. मान लीजिए एक एक्ट्रेस पहले ही सेलेक्ट की जा चुकी है और हीरो के लिए तीन आर्टिस्ट बचे हैं. ऐसे में तीनों को एक्ट्रेस के साथ अलग-अलग सीन करवाए जाते हैं. डायरेक्टर और फिल्म के प्रोड्यूसर देखते हैं कि उनकी फिल्म के लिए दोनों साथ में स्क्रीन पर कैसे लग रहे हैं. कई बार बहुत अच्छे कलाकार सिर्फ इसलिए फिल्म में शामिल नहीं हो पता हैं क्योंकि दूसरे कलाकार के साथ उनकी स्क्रीन केमिस्ट्री नेचुरल नहीं लगती है.
बड़ी फिल्मों की कास्टिंग कितने दिनों में होती है
आपको बता दें कि बड़ी फिल्मों की कास्टिंग में काफी समय लगता है. कई बार तो कास्टिंग में कई महीने लग जाते हैं. इसका सबसे फेमस एग्जांपल दंगल है. इस फिल्म में गीता और बबीता फोगाट के बचपन और एडल्ट किरदारों के लिए करीब आठ महीने तक ऑडिशन लिए गए थे. इस दौरान 11 हजार से ज्यादा लड़कियों का ऑडिशन हुआ, तब जाकर कास्टिंग प्रोसेस पूरा हुआ. दंगल नहीं ऐसे कई सारी फिल्मों के उदाहरण हैं. जिसकी कास्टिंग में काफी टाइम लगा था. इसके अलावा रामायण जैसी बड़ी फिल्मों में छोटे से छोटे किरदार के लिए भी देशभर के थिएटर आर्टिस्ट का ऑडियंस लिया गया. वहीं जवान में विलेन के रोल के लिए ऐसा कलाकार चुना गया जो स्क्रीन पर शाहरुख खान के सामने कमजोर न लगे.
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पीएम मोदी की 4 घंटे चली मैराथन बैठक, सचिवों को दिए बड़े निर्देश; जानें किन बातों पर रहा पूरा फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के शीर्ष सचिवों के साथ करीब चार घंटे तक चली अहम बैठक में प्रशासनिक सुधारों, सुशासन और विकास से जुड़े एजेंडे की विस्तार से समीक्षा की. इस उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना था. बैठक में विशेष रूप से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘ईज ऑफ लिविंग’, आत्मनिर्भर भारत और अगली पीढ़ी के सुधारों (नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स) पर जोर दिया गया.
सुधारों की रफ्तार तेज करने पर जोर
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नई योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना भी है. उन्होंने मंत्रालयों से नियमों को सरल बनाने, अनावश्यक प्रक्रियाओं को खत्म करने और आम नागरिकों व उद्योगों के लिए सरकारी सेवाओं को अधिक आसान बनाने पर विशेष ध्यान देने को कहा. सरकार का मानना है कि कम नियम और अधिक पारदर्शिता निवेश तथा रोजगार को बढ़ावा देने में मदद करेंगे.
हर मंत्रालय ने रखा अपना रोडमैप
बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने विभागों में किए गए सुधारों और भविष्य की योजनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया. अधिकारियों ने बताया कि कौन-कौन से नियमों में बदलाव किए गए हैं और आने वाले समय में किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है. प्रत्येक सचिव को अपने विभाग की प्रगति और आगामी रणनीति संक्षेप में रखने के लिए निर्धारित समय दिया गया था.
'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर विशेष फोकस
बैठक का सबसे अहम विषय आम लोगों के जीवन को आसान बनाना और कारोबार करने की प्रक्रिया को अधिक सरल करना रहा. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकारी नीतियों का सीधा लाभ नागरिकों तक पहुंचे और सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक देरी या लंबित मामलों को कम किया जाए. साथ ही उद्योगों के लिए लाइसेंस, अनुमतियों और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने पर जोर दिया गया.
आत्मनिर्भर भारत और गतिशक्ति मिशन पर चर्चा
बैठक में आत्मनिर्भर भारत अभियान को और मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया गया. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक मजबूती के लिए घरेलू उत्पादन, नवाचार और बुनियादी ढांचे का विस्तार बेहद जरूरी है. इसके साथ ही पीएम गतिशक्ति मिशन के तहत विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए गए.
लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे का निर्देश
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि नागरिकों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी. उन्होंने सभी मंत्रालयों को लंबित परियोजनाओं और जनहित से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा करने तथा समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. सरकार की प्राथमिकता सेवा वितरण को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है.
विकसित भारत 2047 के विजन पर आगे बढ़ने का संदेश
बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सुधारों पर काम करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दक्षता, तकनीकी नवाचार और जन-केंद्रित नीतियां ही भारत को अगले दो दशकों में वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं. इसी दिशा में सभी मंत्रालयों को समन्वित और परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाने की सलाह दी गई.
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