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Demat Account: शेयर मार्केट में इंवेस्ट करने वाले लाखों लोगों के मन में एक सवाल जरूर होता है कि अगर किसी वजह से डिमैट अकाउंट बंद हो जाए तो क्या उनके शेयर भी खत्म हो जाएंगे? मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सबसे आम गलतफहमियों में से एक है जो इंवेस्टर्स, खासकर नए इंवेस्टर्स के मन में रहती है. तो आइए इस सवाल का सीधा और साफ जवाब जानते हैं.
Demat Account बंद होने से क्या शेयर गायब हो जाते हैं?
सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह जान लीजिए कि अगर आपका डिमैट अकाउंट किसी भी वजह से बंद हो जाता है, तो आपके शेयर गायब नहीं होते. डिमैट अकाउंट केवल एक डिजिटल लॉकर की तरह काम करता है जिसमें आपके शेयर रखे जाते हैं. लॉकर बंद होने का मतलब यह नहीं कि उसमें रखी चीजें खत्म हो गईं. आपके शेयरों पर आपकी ओनरशिप बनी रहती है, चाहे अकाउंट की स्थिति कुछ भी हो.
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खुद से अकाउंट बंद कराया तो क्या होगा?
अगर आपने खुद अपने ब्रोकर को अकाउंट क्लोजर की रिक्वेस्ट दी है तो प्रोसेस बेहद आसान है. ब्रोकर आमतौर पर पहले आपके सभी शेयर किसी दूसरे डिमैट अकाउंट में ट्रांसफर कराता है और उसके बाद ही अकाउंट बंद करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है. जानकारों का कहना है कि यह इसलिए किया जाता है ताकि निवेशक की एसेट्स पूरी तरह सुरक्षित रहें और कोई भी शेयर बिना ट्रांसफर के लटका न रहे.
ब्रोकर के साथ कोई दिक्कत हो तो क्या हो सकता है?
यह सवाल और भी जरूरी है. अगर ब्रोकर किसी विवाद, वित्तीय संकट या कानूनी कारणों से अचानक बंद हो जाए, तो भी आपके शेयर पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं. इसकी वजह यह है कि भारत में शेयरों का असली रिकॉर्ड NSDL या CDSL के पास होता है. ब्रोकर सिर्फ एक इंटरमीडियरी यानी बिचौलिए की भूमिका निभाता है. ब्रोकर के बंद होने से NSDL या CDSL के रिकॉर्ड में आपकी ओनरशिप पर कोई असर नहीं पड़ता.
भारत में आपके शेयर रखे कहां जाते हैं?
यह एक बेहद दिलचस्प सवाल है. भारत में दो डिपॉजिटरी हैं जो देश के सभी निवेशकों के शेयरों का केंद्रीकृत और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखती हैं. पहली है NSDL जो NSE से जुड़ी है, और दूसरी है CDSL जो BSE से जुड़ी है. जब आप कोई शेयर खरीदते हैं तो वह इन्हीं डिपॉजिटरी में आपके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में दर्ज हो जाता है. आपका डिमैट अकाउंट इन्हीं डिपॉजिटरी से लिंक्ड होता है.
शेयर ट्रांसफर करने का प्रोसेस क्या है?
अगर आप एक डिमैट अकाउंट से दूसरे में शेयर ट्रांसफर करना चाहते हैं तो यह प्रोसेस काफी सीधा है. आपको डिलीवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप (DIS) भरनी होती है या ऑनलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट डालनी होती है. दोनों डिपॉजिटरी के बीच ट्रांसफर के लिए इंटर डिपोजिटरी ट्रांसफर की प्रक्रिया होती है, जबकि एक ही डिपॉजिटरी के अंदर ट्रांसफर इंट्रा डिपोजिटरी ट्रांसफर कहलाता है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अकाउंट बंद कराने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना जरूरी है कि सभी शेयर दूसरे एक्टिव डिमैट अकाउंट में ट्रांसफर हो चुके हों.
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से है. किसी भी निवेश फैसले से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
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