नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। भारत में वर्ष 2030 तक पानी की मांग उपलब्ध जल आपूर्ति से लगभग दोगुनी हो सकती है, और इस चुनौती से निपटने के लिए अगले दशक में 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की संभावना है। यह जानकारी पीएल कैपिटल की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।
Extreme Heat Approaching US: गर्मी में भारत में 40-45 डिग्री का तापमान कोई नई बात नहीं है लेकिन यूरोप और अमेरिका में अगर यही टेम्परेचर पहुंच जाए, तो मुसीबत हो जाती है. यूरोप के तापमान ने तो हाहाकार मचा रखा था, अब अमेरिका में भी 38 डिग्री तक पारा पहुंचने की वॉर्निंग दी जा रही है.
Supreme Court on Ethanol supply policy: एथेनॉल आवंटन प्रक्रिया को लेकर चल रहे कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एथेनॉल आपूर्ति की मौजूदा पॉलिसी को हरी झंडी दे दी है और आवंटन प्रक्रिया को बरकरार रखने का निर्देश दिया है।
यह विवाद कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद खड़ा हुआ था, जिसमें अधिकारियों को एथेनॉल आवंटन की प्रक्रिया को फिर से खोलने के निर्देश दिए गए थे।
20 फीसदी एथेनॉल लक्ष्य पर अडिग केंद्र सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग का सरकार का लक्ष्य पूरी तरह से कायम है। उन्होंने इसे देश के ऊर्जा क्षेत्र और पर्यावरण सुधार के लिए एक 'महत्वाकांक्षी प्रयोग' बताया।
सरकार का मानना है कि इस योजना के वास्तविक और दूरगामी परिणाम अगले साल तक पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया कि 20 फीसदी ब्लेंडिंग का लक्ष्य अपरिवर्तित रहेगा।
क्यों था विवाद? यह सारा विवाद एथेनॉल आपूर्ति के अनुबंधों (Supply Contracts) को लेकर था। कर्नाटक हाई कोर्ट ने आवंटन प्रक्रिया को दोबारा खोलने का आदेश दिया था, जिस पर BPCL ने आपत्ति जताई थी। BPCL का तर्क था कि अगर आवंटन प्रक्रिया को बीच में ही दोबारा खोला गया, तो इससे सरकार के राष्ट्रीय एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की पूरी व्यवस्था चरमरा सकती है और आपूर्ति में बड़ी बाधा उत्पन्न हो सकती है।
कानूनी पेच और सरकार की चिंता अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को अवगत कराया कि एथेनॉल आपूर्ति के अनुबंध अक्टूबर 2025 में ही संपन्न हो चुके हैं। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि देश के अलग-अलग हाई कोर्ट्स में इस मुद्दे पर कई याचिकाएं लंबित हैं, जिससे विरोधाभासी आदेश आने का खतरा है। सरकार का तर्क है कि इससे राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन में बड़ी बाधा आ सकती है। सरकार ने इन सभी मामलों को एक जगह समेकित करने का आग्रह किया है।
अगली सुनवाई तक वर्तमान व्यवस्था बरकरार सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने सरकार की ट्रांसफर याचिका का विरोध करते हुए इसे कार्यवाही में देरी का प्रयास बताया, लेकिन सरकार ने तर्क दिया कि अक्टूबर से पहले फैसला आना अनिवार्य है क्योंकि तब तक नए अनुबंध दिए जाने हैं।
तमाम दलीलों को सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था को यथावत रखने का आदेश दिया है। इस फैसले से सरकार को अपनी ब्लेंडिंग नीति को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाने में बड़ी राहत मिली है।