वित्त मंत्रालय ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के बजट को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दे दी है, जिससे देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का अगले चरण का रास्ता साफ हो गया है। यह जानकारी एडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में दी गई।
इस प्रस्ताव को समिति ने पिछले हफ्ते मंजूरी दी थी और अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
आईएसएम 2.0 प्रस्तावित बजट आईएसएम 1.0 के तहत आवंटित 76,000 करोड़ रुपए से काफी अधिक है। आईएसएम 1.0 के तहत सरकार ने चिप बनाने, असेंबली और डिजाइन से जुड़ी 10 सेमीकंडक्टर सुविधाओं को मंजूरी दी थी।
आईएसएम 2.0 से भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने के उद्देश्य से इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशल केमिकल, कैपिटल इक्विपमेंट, एमएसएमई और सहायक सप्लायर जैसे बड़े इकोसिस्टम को मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भारत 2030 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 75 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा।
सरकार नई स्कीम को शुरू करने के लिए मंत्रालयों के बीच बातचीत पहले ही कर चुकी है और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार था।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की खपत और उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। आज भारत में 65 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का सालाना उत्पादन 12 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
साथ ही, देश एआई-आधारित सिस्टम, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी बना रहा है, जिनके लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की जरूरत होती है। मांग और इनोवेशन में इस तेजी की वजह से भारत के लिए ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी जगह बनाना जरूरी हो गया है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 10 सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दी गई है। इन प्लांट का निर्माण तेजी से चल रहा है। गुजरात के साणंद में एक यूनिट में पायलट प्रोडक्शन लाइन पहले ही शुरू हो चुकी है और एक साल के अंदर चार और यूनिट में प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। एप्लाइड मैटेरियल्स, लैम रिसर्च, मर्क और लिंडे जैसी ग्लोबल कंपनियां सपोर्टिंग फैक्टरियों और सप्लाई चेन में निवेश कर रही हैं।
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इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की गलत बिक्री रोकने के लिए आईआरडीएआई बैंकों के लिए जारी करेगा नए दिशा-निर्देश: चेयरपर्सन
मुंबई, 30 जून (आईएएनएस)। बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) जल्द ही बैंकों द्वारा बीमा उत्पादों की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) पर रोक लगाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करेगा। यह जानकारी आईआरडीएआई के चेयरपर्सन अजय सेठ ने मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में दी।
उन्होंने कहा कि नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को उनकी जरूरत और पात्रता के अनुसार ही बीमा उत्पाद उपलब्ध कराए जाएं।
अजय सेठ ने बताया कि बीमा सुगम डिजिटल प्लेटफॉर्म के सितंबर 2026 तक लॉन्च होने की संभावना है। इस पर शुरुआत में मोटर इंश्योरेंस उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद हेल्थ इंश्योरेंस और फिर टर्म लाइफ इंश्योरेंस को भी इसमें जोड़ा जाएगा।
बीमा सुगम का उद्देश्य बीमा खरीदने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है।
आईआरडीएआई प्रमुख ने बताया कि सरकार द्वारा बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दिए जाने के बाद एक विदेशी बीमा कंपनी को भारतीय जीवन बीमा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि एक अन्य प्रस्ताव अभी समीक्षा के चरण में है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई को ऑटोमैटिक रूट के तहत मंजूरी देने की अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, इसके लिए बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों का पालन और आईआरडीएआई की मंजूरी आवश्यक होगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के लिए अलग व्यवस्था जारी रहेगी। एलआईसी में विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत ही रहेगी और यह भी ऑटोमैटिक रूट के तहत होगी।
नई व्यवस्था के तहत बीमा ब्रोकर, री-इंश्योरेंस ब्रोकर, बीमा सलाहकार, कॉरपोरेट एजेंट, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए), सर्वेयर, लॉस असेसर, मैनेजिंग जनरल एजेंट और इंश्योरेंस रिपॉजिटरी जैसे बीमा मध्यस्थों में भी 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है।
अजय सेठ ने कहा कि आईआरडीएआई जल्द ही इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री के लिए प्रोडक्ट सूटेबिलिटी फ्रेमवर्क भी लाएगा।
उन्होंने बताया कि नियामक इस मामले में सख्त प्रतिबंध लगाने के बजाय मार्गदर्शक सिद्धांत जारी करेगा, ताकि ग्राहकों को उनकी जरूरत के अनुसार उपयुक्त बीमा उत्पाद बेचे जा सकें।
आईआरडीएआई ने हाल ही में बीमा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों (मुख्य प्रबंधन कर्मी- केएमपी) के वेतन और बोनस से जुड़े नियम भी सख्त किए हैं।
अब उनके प्रोत्साहन और बोनस को क्लेम निपटान की गति, शिकायतों के समाधान, उत्पादों के प्रदर्शन और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता जैसे मापदंडों से जोड़ा जाएगा।
इसके अलावा, हाल ही में आईआरडीएआई ने एक नई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को भी लाइसेंस मंजूर किया है, जो हाल के समय में दिया गया दूसरा नया लाइसेंस है।
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