'भारत दुनिया के मुश्किल इलाके में है...', US राजदूत सर्जियो गोर ने क्यों कहा?
Ambassador Sergio Gor: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत की भौगोलिक स्थिति पर टिप्पणी की है। अमेरिका में एक इवेंट ने भारत पर बात करते हुए गोर ने कहा कि भारत दुनिया के एक मुश्किल इलाके में है। यहां कुछ मुश्किल और कठोर पड़ोसी हैं।
दरअसल, वॉशिंगटन DC में IX USISPF लीडरशिप समिट 2026 कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के एक मुश्किल इलाके में है। यहां कुछ मुश्किल और कठोर पड़ोसी हैं और ऐसे लोग भी हैं जो बुरे मूड में उठते हैं और उस इलाके में हालात बदल जाते हैं।
कहा कि अमेरिका और भारत में बहुत सी समानताएं हैं और यही बात हमें आने वाले दशकों तक जोड़े रखेगी। आप कोई भी सेक्टर चुन लें - AI, टेक्नोलॉजी, एविएशन - कुछ भी हो, हमारे पास साथ मिलकर काम करने की क्षमता है। ये अगले दो साल हमारे रिश्तों को आने वाले कई दशकों के लिए एक नई दिशा देंगे।
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#WATCH | Washington DC | At the IX USISPF Leadership Summit 2026, US Ambassador to India Sergio Gor says, "... India is in a tough part of the world. There are some tough and rough neighbours and you have individuals that wake up in a bad mood and things change in that part of… pic.twitter.com/yhrhQNKIHE
— ANI (@ANI) June 30, 2026
भारत अमेरिकी डील पर क्या बोले गोर?
राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका-भारत एक और बड़ी डील करने के बहुत करीब हैं, और हम इसे पूरा करने के लिए उत्सुक हैं। अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। भारत का उदय हो रहा है। भारत ने अपनी जगह बना ली है। हम इसे समझते हैं। हम भारत के साथ साझेदारी करना चाहते हैं।
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भारत संबंधों पर क्या बोले ट्रंप के सांसद?
IX USISPF लीडरशिप समिट 2026 में कांग्रेसमैन रो खन्ना ने कहा कि मेरी उम्मीद है कि जब हम US-भारत संबंधों के बारे में बात करें, तो हम सिर्फ रक्षा, आर्थिक या निवेश संबंधों से आगे बढ़कर बात करें। हम इस बारे में बात करें कि हमारे सबसे ऊंचे मूल्यों के हिसाब से हमारे संबंध कैसे होने चाहिए। ऐसे मूल्य जो यहां और दुनिया भर में इंसानी आजादी को फलते-फूलते देखना चाहते हैं। ऐसे मूल्य जो यहां और दुनिया भर में आत्म-निर्णय को फलते-फूलते देखना चाहते हैं।
कहा कि ऐसे मूल्य जो एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहाँ शांति हो और जो सभ्यता की समस्याओं को सुलझाने के लिए काम करे। अपने सबसे अच्छे रूप में अमेरिका यही है और भारतीय-अमेरिकियों को भी अपने सबसे अच्छे रूप में ऐसा ही होना चाहिए। यह किसी आंख बंद करके किए गए गठबंधन के बारे में नहीं है। यह एक ऐसा गठबंधन खोजने के बारे में है जो सभ्यता और इंसानियत के मूल्यों को आगे बढ़ाए।
दिसंबर में अमेरिका जाएंगे PM मोदी
राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा पर, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि यह मिड-टर्म चुनाव के समय की बात नहीं है। जब प्रधानमंत्री उनसे फ्रांस में मिले थे, तो भारतीय पक्ष ने उन्हें निमंत्रण देने की बात उठाई थी। हम चाहेंगे कि यह जल्द से जल्द हो। उन्होंने यह भी कहा कि सेक्रेटरी मार्को रुबियो ने उनसे मुलाकात के दौरान पीएम मोदी को आमंत्रित किया था। हम चाहेंगे कि वे फिर यहां आएं। और मुझे पता है कि वे दिसंबर में G20 के लिए आ रहे हैं।
'चौहान' के टीजर पर विवाद:'पठानों से कह दो, चौहान आ गया' डायलॉग पर आपत्ति, क्षत्रिय परिषद बोला- इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से न दिखाएं
अजय देवगन की फिल्म 'चौहान' का टीजर विवाद में आ गया। क्षत्रिय परिषद नाम के संगठन ने कहा कि ऐतिहासिक विरासत को सांप्रदायिक लामबंदी का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। संगठन ने फिल्म प्रोड्यूसर्स से राजपूत नाम का इस्तेमाल जातीय और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने के लिए नहीं करने की अपील की। 25 जून को फिल्म का टीजर रिलीज किया गया था। इसमें अजय देवगन की आवाज में एक डायलॉग है, "पठानों से कह दो, चौहान आ गया है।" सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे धार्मिक विभाजन बढ़ाने की कोशिश बताया। फिल्म को कश्मीर संघर्ष के चित्रण और यह दिखाने को लेकर भी आलोचना मिली कि पैलेट गन से कम नुकसान होता है। क्षत्रिय परिषद ने अपने बयान में कहा कि इतिहास की जटिलता का सम्मान किया जाना चाहिए और राजपूत विरासत का इस्तेमाल राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्यों के लिए नहीं होना चाहिए। संगठन ने कहा कि 'चौहान' कुलनाम का समकालीन सांप्रदायिक राजनीति के लिए इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन ने कहा कि जब मेनस्ट्रीम मीडिया और पब्लिक बातचीत में राजपूत समुदाय की आवाज पहले से कम प्रतिनिधित्व रखती है, तब किसी राजपूत कुलनाम का उपयोग केवल विवाद, जातीय और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने या राजनीतिक माहौल बनाने के लिए करना गैर-जिम्मेदाराना और असम्मानजनक है। इतिहास के उदाहरण भी दिए संगठन ने कहा कि भारतीय इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। बयान में कहा गया कि कई अवसरों पर राजपूत और पठान एक-दूसरे के साथ मिलकर लड़े। इसमें खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा के नेतृत्व में महमूद लोदी, हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की सेना में हकीम खान सूर, फरीद खान (बाद में शेरशाह सूरी) का राजा रायसल शेखावत से जुड़ाव और प्रथम पानीपत के युद्ध में महाराजा विक्रमादित्य तोमर का लोदी सेना के साथ लड़ना शामिल है। संगठन ने कहा कि ये घटनाएं बताती हैं कि मध्यकालीन राजनीतिक गठबंधन शासन, निष्ठा और सैन्य रणनीति पर आधारित थे, न कि आज थोपे जा रहे सांप्रदायिक नजरिए पर। फिल्म के टीजर की सोशल मीडिया पर तारीफ और आलोचना, दोनों हुई। एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने कश्मीर में पैलेट गन के सबसे कम उम्र के पीड़ित से जुड़ी एक खबर शेयर करते हुए लिखा कि पैलेट गन कम नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यधारा के कश्मीरी पठान नहीं हैं और पोस्ट के साथ ‘विवेक अग्निहोत्री-फिकेशन ऑफ बॉलीवुड’ लिखा। जियो स्टूडियोज और कलर येलो प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ज्योति देशपांडे, आनंद एल राय और हिमांशु शर्मा की यह फिल्म 1 अक्टूबर को रिलीज होगी।

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