Supreme Court सोमवार को Cauvery water विवाद में तमिलनाडु की याचिका पर करेगा सुनवाई
उच्चतम न्यायालय तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा, जिसमें कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी नदी का जल तत्काल छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। उच्चतम न्यायालय की 17 अगस्त की वाद सूची के अनुसार, मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ करेगी। शीर्ष अदालत ने 12 अगस्त को कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु सरकार और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सहित अन्य पक्षों की ओर से दायर याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई की जाएगी।
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इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने कहा था कि बारिश की कमी वाले साल में राज्य को कावेरी नदी के पानी का अपना उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। जोसफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने तीन अगस्त को उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु के हिस्से का पानी तत्काल छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। राज्य सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) द्वारा तमिलनाडु के लिए निर्धारित जल की मात्रा और पड़ोसी राज्य कर्नाटक द्वारा छोड़ा गया पानी, दोनों ही तय हिस्से से काफी कम हैं।
तमिलनाडु सरकार ने कहा कि 28 जुलाई को सीडब्ल्यूआरसी की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिन तक 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। उसने कहा कि हालांकि, 29 जुलाई से दो अगस्त के बीच बिलिगुंडलु में छोड़े गए पानी की मात्रा 158 से 550 क्यूसेक के बीच रही। तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि तीन अगस्त तक कर्नाटक में केआरएस, काबिनी, हरंगी और हेमावती जलाशयों में कुल मिलाकर 77.537 टीएमसी पानी उपलब्ध था।
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उसने कहा कि ऐसे में कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का पानी अनुपात के आधार पर छोड़ने में कोई कठिनाई नहीं होगी। इसमें कहा गया कि कर्नाटक में हाल में केआरएस और काबिनी बांधों के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद, बिलिगुंडलु में छोड़े जाने वाले पानी का अनुपातिक हिस्सा 26.954 टीएमसी होना चाहिए।
Ayodhya में Sawan Jhula Mela हुआ शुरू, 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रद्धालुओं के लिए महाकुंभ माने जाने वाले सावन झूला मेले की शुरुआत शनिवार से हो गई और इसके साथ ही रामनगरी भक्ति के रंग में रंग गई है। यह मेला 28 अगस्त तक चलेगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, करीब 10 लाख श्रद्धालु अयोध्या में मौजूद हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया कि पहली बार सावन झूला मेले के दौरान आम श्रद्धालुओं को रामलला को झूला झुलाने का अवसर देने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। राम मंदिर के अनुष्ठान प्रभारी और मेले के व्यवस्थापक आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि सुरक्षा कारणों से सावन उत्सव के दौरान रामलला का झूला कुबेर टीला ले जाया जाएगा, जहां ‘झूलन विहार’ समारोह आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि इस दौरान अयोध्या के विभिन्न मंदिरों से प्रतिदिन देवी-देवताओं की शोभायात्राएं निकलेंगी और इनका समापन मणिपर्वत पर सांस्कृतिक आयोजन के साथ होगा।
मिश्र ने बताया कि अयोध्या के 5,000 से अधिक मंदिरों में सावन झूला सजाया गया है। अयोध्या में छोटे-बड़े 5,000 से अधिक मंदिर हैं, लेकिन इस उत्सव की भव्यता श्री राम जन्मभूमि, कनक भवन, राजा दशरथ जी का महल, अशर्फी भवन, राम वल्लभा कुंज, दिव्य कला कुंज, रंग महल, जानकी महल, राज सदन, रूप कला कुंज और मणिराम दास जी की छावनी जैसे प्रमुख मंदिरों में विशेष रूप से देखने को मिलेगी। स्थानीय संतों के अनुसार, सावन झूला मेला मनाने की परंपरा बहुत प्राचीन है।
ऐसी मान्यता है कि रामलला के जन्म के चार महीने बाद माता कौशल्या ने राजा दशरथ की अन्य रानियों के साथ मिलकर रामलला और उनके भाइयों को झूला झुलाया था और इस दौरान कजरी गीत गाए थे। अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में यह सुंदर परंपरा सदियों से चली आ रही है। राम जन्मभूमि में भी सावन के पूरे महीने रामलला को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाकर प्रतिदिन झूला झुलाया जाता है।
सोमवार को अयोध्या में प्रसिद्ध नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रसिद्ध नागेश्वर नाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। सावन झूला मेले को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है।
पूरे क्षेत्र को छह जोन और 29 सेक्टर में बांटकर दो पालियों में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। अयोध्या के नगर पुलिस अधीक्षक चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि आवश्यकता के अनुसार पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। उन्होंने कहा कि अपर पुलिस अधीक्षक से लेकर कांस्टेबल तक पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
इसके अलावा पीएसी, त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ), एटीएस कमांडो और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें भी उपलब्ध रहेंगी। ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। मणिपर्वत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
त्रिपाठी ने कहा, ‘‘हमने अधिकारियों के बीच काम स्पष्ट रूप से बांट दिया है और जिम्मेदारियां तय कर दी हैं, ताकि किसी तरह की कमी न रहे।’’ प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मेले के दौरान यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपात सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू बनाए रखने के लिए मणिपर्वत से लेकर अयोध्या के विभिन्न हिस्सों तक पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। जिला स्तर पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर ने कहा कि सावन झूला मेला श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। ग्रोवर ने कहा, ‘‘हमने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मणिपर्वत समेत मेले के पूरे क्षेत्र को जोन और सेक्टर में बांटकर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए सभी अधिकारी सतर्क हैं।
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